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हाल के समय में भारत में आर्थिक संवृद्धि की प्रकृति का वर्णन अक्सर नौकरीहीन संवृद्धि के तौर पर किया जाता है। क्या आप इस विचार से सहमत हैं ? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए । (200 words) [UPSC 2015]
हाँ, यह विचार कि भारत में आर्थिक संवृद्धि की प्रकृति "नौकरीहीन संवृद्धि" के रूप में देखी जा रही है, एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस विचार से सहमत होने के कुछ प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं: नौकरी की कमी: भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, नई नौकरियों का सृजन पर्याप्त नहीं हो रहा है। रोजगार वृद्धि की दर अक्सरRead more
हाँ, यह विचार कि भारत में आर्थिक संवृद्धि की प्रकृति “नौकरीहीन संवृद्धि” के रूप में देखी जा रही है, एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस विचार से सहमत होने के कुछ प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं:
इन तर्कों के आधार पर, यह स्पष्ट है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की प्रकृति में “नौकरीहीन संवृद्धि” का तत्व मौजूद है, और इस चुनौती को हल करने के लिए समेकित नीतियों और पहल की आवश्यकता है।
See less"जिस समय हम भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (डेमोग्राफ़िक डिविडेंड) को शान से प्रदर्शित करते हैं, उस समय हम रोजगार योग्यता की पतनशील दरों को नज़रअन्दाज़ कर देते हैं।" क्या हम ऐसा करने में कोई चूक कर रहे हैं? भारत को जिन जॉबों की बेसबरी से दरकार है, वे जॉब कहाँ से आएँगे? स्पष्ट कीजिए। (200 words) [UPSC 2014]
भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश और रोजगार योग्यता की चुनौतियाँ: 1. चूक और समस्याएँ: रोजगार योग्यता में कमी: भारत का बड़ा युवा जनसंख्या को जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, परंतु यह रोजगार योग्यता में कमी को नज़रअंदाज़ करता है। NASSCOM की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में इंजीनियरिंग ग्रेजुRead more
भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश और रोजगार योग्यता की चुनौतियाँ:
1. चूक और समस्याएँ:
2. जॉब्स के स्रोत:
हालिया उदाहरण:
निष्कर्ष: भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को लेकर गर्व करते समय, रोजगार योग्यता की कमी को नजरअंदाज़ करना एक महत्वपूर्ण चूक है। सभी स्तरों पर कौशल सुधार, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में निवेश, उद्यमिता को प्रोत्साहन, और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास से रोजगार के अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं।
See lessसामान्यतः देश कृषि से उद्योग और बाद में सेवाओं को अन्तरित होते हैं पर भारत सीधे ही कृषि से सेवाओं को अन्तरित हो गया है। देश में उद्योग के मुकाबले सेवाओं की विशाल संवृद्धि के क्या कारण है? क्या भारत सशक्त औद्योगिक आधार के बिना एक विकसित देश बन सकता है? (200 words) [UPSC 2014]
भारत का कृषि से सीधे सेवाओं की ओर संक्रमण और औद्योगिक आधार की आवश्यकता: 1. सेवाओं की विशाल संवृद्धि के कारण: आईटी और बीपीओ क्रांति: भारत में आईटी और बीपीओ क्षेत्रों ने 1990 के दशक से तेजी से वृद्धि की है। लिबरलाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन के साथ, भारत ने एक बड़ा, कुशल अंग्रेजी-भाषी श्रम बल विकसित किया। TaRead more
भारत का कृषि से सीधे सेवाओं की ओर संक्रमण और औद्योगिक आधार की आवश्यकता:
1. सेवाओं की विशाल संवृद्धि के कारण:
2. औद्योगिक आधार के बिना भारत की विकसित देश बनने की संभावना:
हालिया उदाहरण:
निष्कर्ष: भारत का कृषि से सीधे सेवाओं की ओर संक्रमण आईटी और बीपीओ की वृद्धि, आर्थिक सुधार, और शहरीकरण द्वारा प्रेरित है। भारत के लिए विकसित देश बनने के लिए, एक मजबूत औद्योगिक आधार का निर्माण आवश्यक है, साथ ही सेवाओं के क्षेत्र में भी निरंतर वृद्धि की आवश्यकता है।
See less"गाँवों में सहकारी समिति को छोड़कर, ऋण संगठन का कोई भी अन्य ढाँचा उपयुक्त नहीं होगा।"- अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण। भारत में कृषि वित्त की पृष्ठभूमि में, इस कथन पर चर्चा कीजिए। कृषि वित्त प्रदान करने वाली वित्तीय संस्थाओं को किन बाध्यताओं और कसौटियों का सामना करना पड़ता है? ग्रामीण सेवार्थियों तक बेहतर पहुँच और सेवा के लिए प्रौद्योगिकी का किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है? (200 words) [UPSC 2014]
गाँवों में सहकारी समितियों की उपयुक्तता और कृषि वित्त में बाधाएँ: 1. सहकारी समितियों की उपयुक्तता: सहकारी समितियाँ और ग्रामीण वित्त: अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण ने यह बताया कि सहकारी समितियाँ गाँवों में ऋण संगठनों के रूप में सबसे उपयुक्त हैं। इनका स्थानीय प्रबंधन और समुदाय पर आधारित ढाँचा ग्रामRead more
गाँवों में सहकारी समितियों की उपयुक्तता और कृषि वित्त में बाधाएँ:
1. सहकारी समितियों की उपयुक्तता:
2. कृषि वित्त में बाधाएँ:
3. प्रौद्योगिकी का उपयोग:
निष्कर्ष: सहकारी समितियाँ गाँवों में ऋण संगठनों के रूप में अत्यंत उपयुक्त हैं क्योंकि वे स्थानीय जरूरतों और प्रबंधन को बेहतर ढंग से समझती हैं। कृषि वित्त की प्रभावशीलता को सुधारने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग महत्वपूर्ण है, जिसमें डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक समाधान, और स्मार्ट एग्रीकल्चर तकनीकों के माध्यम से बेहतर पहुँच और सेवा सुनिश्चित की जा सकती है।
See lessवैश्वीकृत संसार में, बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का महत्व हो जाता है और वे मुक़दमेबाजी का एक स्रोत हो जाते हैं। कॉपीराइट, पेटेंट और व्यापार गुप्तियों के बीच मोटे तौर पर विभेदन कीजिए। (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: वैश्वीकरण की दुनिया में बौद्धिक सम्पदा अधिकार (IPR) महत्वपूर्ण हो जाते हैं और ये मुक़दमेबाजी के प्रमुख स्रोत बन जाते हैं। बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के अंतर्गत कॉपीराइट, पेटेंट और व्यापार गुप्तियाँ आते हैं, जो विभिन्न प्रकार की रचनात्मक और नवाचारी संपत्तियों की सुरक्षा प्रदान करते हैं। कॉपीराइट:Read more
परिचय: वैश्वीकरण की दुनिया में बौद्धिक सम्पदा अधिकार (IPR) महत्वपूर्ण हो जाते हैं और ये मुक़दमेबाजी के प्रमुख स्रोत बन जाते हैं। बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के अंतर्गत कॉपीराइट, पेटेंट और व्यापार गुप्तियाँ आते हैं, जो विभिन्न प्रकार की रचनात्मक और नवाचारी संपत्तियों की सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कॉपीराइट:
पेटेंट:
व्यापार गुप्तियाँ:
निष्कर्ष: कॉपीराइट, पेटेंट और व्यापार गुप्तियाँ प्रत्येक बौद्धिक संपदा के विभिन्न रूपों की सुरक्षा प्रदान करती हैं। कॉपीराइट रचनात्मक अभिव्यक्तियों की सुरक्षा करता है, पेटेंट नवाचारों की रक्षा करता है, और व्यापार गुप्तियाँ गोपनीय व्यापार सूचनाओं की सुरक्षा करती हैं। इन भिन्नताओं को समझना बौद्धिक संपदा अधिकारों के जटिल परिदृश्य में प्रभावी ढंग से नेविगेट करने और मुक़दमेबाजी से बचने के लिए आवश्यक है।
See lessक्या ऐन्टीबायोटिकों का अति-उपयोग और डॉक्टरी नुस्खे के बिना मुक्त उपलब्धता, भारत में औषधि प्रतिरोधी रोगों के आविर्भाव के अंशदाता हो सकते हैं? अनुवीक्षण और नियंत्रण की क्या क्रियाविधियाँ उपलब्ध है? इस सम्बन्ध में विभिन्न मुद्दों पर समालोचनापूर्वक चर्चा कीजिए। (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: ऐन्टीबायोटिकों का अति-उपयोग और डॉक्टरी नुस्खे के बिना उनकी मुक्त उपलब्धता भारत में औषधि प्रतिरोधी रोगों के उदय के प्रमुख कारण हो सकते हैं। यह समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है, क्योंकि इससे ऐन्टीबायोटिक की प्रभावशीलता कम होती है और प्रतिरोधी बैक्टीरिया का प्रसार होतRead more
परिचय: ऐन्टीबायोटिकों का अति-उपयोग और डॉक्टरी नुस्खे के बिना उनकी मुक्त उपलब्धता भारत में औषधि प्रतिरोधी रोगों के उदय के प्रमुख कारण हो सकते हैं। यह समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है, क्योंकि इससे ऐन्टीबायोटिक की प्रभावशीलता कम होती है और प्रतिरोधी बैक्टीरिया का प्रसार होता है।
औषधि प्रतिरोध के योगदानकर्ता:
अनुवीक्षण और नियंत्रण की क्रियाविधियाँ:
समीक्षा:
निष्कर्ष: ऐन्टीबायोटिकों का अति-उपयोग और नुस्खे के बिना उपलब्धता भारत में औषधि प्रतिरोधी रोगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रभावी नियंत्रण के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करना, स्टुअर्डशिप कार्यक्रमों को लागू करना, और जन जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। संबंधित मुद्दों पर ध्यान देकर ही इस समस्या का समाधान संभव है।
See lessरक्षा क्षेत्रक में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ० डी० आइ०) को अब उदारीकृत करने की तैयारी है। भारत की रक्षा और अर्थव्यवस्था पर अल्पकाल और दीर्घकाल में इसके क्या प्रभाव अपेक्षित हैं? (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: रक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को उदारीकृत करने का निर्णय भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने रक्षा निर्माण में FDI की सीमा को स्वचालित मार्ग से 74% तक और कुछ मामलों में सरकारी अनुमोदन के माध्यम से 100% तक बढ़ा दिया है। इस नीति परिवRead more
परिचय: रक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को उदारीकृत करने का निर्णय भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने रक्षा निर्माण में FDI की सीमा को स्वचालित मार्ग से 74% तक और कुछ मामलों में सरकारी अनुमोदन के माध्यम से 100% तक बढ़ा दिया है। इस नीति परिवर्तन से भारत की रक्षा और अर्थव्यवस्था पर अल्पकाल और दीर्घकाल में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
अल्पकालिक प्रभाव:
दीर्घकालिक प्रभाव:
निष्कर्ष: रक्षा क्षेत्र में FDI की उदारीकरण से भारत की रक्षा क्षमताओं और आर्थिक विकास पर परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। अल्पकाल में, यह निर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा, जबकि दीर्घकाल में, यह आत्मनिर्भरता, नवाचार, और रणनीतिक स्वायत्तता में योगदान देगा। इन लाभों को अधिकतम करने के लिए, भारत को मजबूत नियामक ढांचे और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए।
See lessराष्ट्रीय नगरीय परिवहन नीति 'वाहनों की आवाजाही' के बजाय 'लोगों की आवाजाही पर बल देती है। इस सम्बन्ध में सरकार की विविध रणनीतियों की सफलता की आलोचनात्मक चर्चा कीजिए। (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: राष्ट्रीय नगरीय परिवहन नीति (NUTP) 'वाहनों की आवाजाही' के बजाय 'लोगों की आवाजाही' पर बल देती है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन, गैर-मोटर चालित परिवहन और सतत शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देना है। इस नीति का लक्ष्य ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, और निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करना है। सरकारी रणनीतियों कीRead more
परिचय: राष्ट्रीय नगरीय परिवहन नीति (NUTP) ‘वाहनों की आवाजाही’ के बजाय ‘लोगों की आवाजाही’ पर बल देती है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन, गैर-मोटर चालित परिवहन और सतत शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देना है। इस नीति का लक्ष्य ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, और निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करना है।
सरकारी रणनीतियों की सफलता:
निष्कर्ष: हालांकि सरकार ने ‘वाहनों की आवाजाही’ के बजाय ‘लोगों की आवाजाही’ पर ध्यान केंद्रित करने में प्रगति की है, लेकिन सफलता मिश्रित रही है। व्यापक योजना, बेहतर क्रियान्वयन, और बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर करना राष्ट्रीय नगरीय परिवहन नीति के उद्देश्यों को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
See lessसमझाइए कि दीर्घकालिक पक्कनावधि (जेस्टेशन) आधारिक संरचना परियोजनाओं में निजी लोक भागीदारी (प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप) किस प्रकार अधारणीय (अन्सस्टेनेबल) देयताओं को भविष्य पर अन्तरित कर सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उत्तरोत्तर पीढ़ियों की सक्षमताओं के साथ कोई समझौता न हो, क्या व्यवस्थाएँ स्थापित की जानी चाहिए? (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: दीर्घकालिक पक्कनावधि (जेस्टेशन) आधारिक संरचना परियोजनाओं में निजी लोक भागीदारी (PPP) मॉडल ने बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, यदि इनका सही प्रबंधन न किया जाए, तो ये भविष्य की पीढ़ियों पर अधारणीय (अन्सस्टेनेबल) देयताओं का बोझ डाल सकती हैं। अधारणीय देयताओं के हस्Read more
परिचय: दीर्घकालिक पक्कनावधि (जेस्टेशन) आधारिक संरचना परियोजनाओं में निजी लोक भागीदारी (PPP) मॉडल ने बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, यदि इनका सही प्रबंधन न किया जाए, तो ये भविष्य की पीढ़ियों पर अधारणीय (अन्सस्टेनेबल) देयताओं का बोझ डाल सकती हैं।
अधारणीय देयताओं के हस्तांतरण के जोखिम:
सतत PPP व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के उपाय:
निष्कर्ष: भविष्य की पीढ़ियों पर अधारणीय देयताओं के हस्तांतरण से बचने के लिए, PPP व्यवस्थाओं में मजबूत संस्थागत ढांचे, पारदर्शी शासन, और समान जोखिम साझेदारी तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए। यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि आधारिक संरचना का विकास सतत और भविष्य की पीढ़ियों के लिए लाभकारी हो।
See lessपूँजीवाद ने विश्व अर्थव्यवस्था का अभूतपूर्व समृद्धि तक दिशा-निर्देशन किया है। परन्तु फिर भी, वह अक्रसर अदूरदर्शिता को प्रोत्साहित करता है तथा धनवानों और निर्धनों के बीच विस्तृत असमताओं को बढ़ावा देता है। इसके प्रकाश में, भारत में समावेशी संवृद्धि को लाने के लिए क्या पूँजीवाद में विश्वास करना और उसको अपना लेना सही होगा? चर्चा कीजिए। (200 words) [UPSC 2014]
परिचय: पूँजीवाद, जो कि निजी स्वामित्व और मुक्त बाजारों पर आधारित है, ने निस्संदेह विश्व अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व समृद्धि तक पहुँचाया है। परन्तु, इसके साथ ही यह अल्पकालिक लाभ और आय असमानताओं को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। पूँजीवाद के लाभ: आर्थिक वृद्धि: पूँजीवाद नवाचार और प्रतिस्पर्धा को प्रRead more
परिचय: पूँजीवाद, जो कि निजी स्वामित्व और मुक्त बाजारों पर आधारित है, ने निस्संदेह विश्व अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व समृद्धि तक पहुँचाया है। परन्तु, इसके साथ ही यह अल्पकालिक लाभ और आय असमानताओं को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है।
पूँजीवाद के लाभ:
पूँजीवाद की आलोचना:
भारत में समावेशी संवृद्धि और पूँजीवाद:
निष्कर्ष: हालाँकि पूँजीवाद आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है, परन्तु भारत में समावेशी संवृद्धि प्राप्त करने के लिए यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है। संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए पूँजीवाद की शक्तियों के साथ राज्य हस्तक्षेप और सामाजिक नीतियों को मिलाना आवश्यक है ताकि न्यायसंगत और स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
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