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पूँजी बजट तथा राजस्व बजट के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए। इन दोनों बजटों के संघटकों को समझाइए । (150 words) [UPSC 2021]
पूंजी बजट और राजस्व बजट के मध्य अंतर **1. मुख्य अंतर: पूंजी बजट: यह दीर्घकालिक पूंजीगत खर्चों और निवेश को दर्शाता है, जैसे विकास परियोजनाएँ और इन्फ्रास्ट्रक्चर। इसका उद्देश्य स्थायी संपत्तियों का निर्माण और मौजूदा संपत्तियों का नवीनीकरण करना है। राजस्व बजट: यह बजट रोज़मर्रा के संचालन और नियमित खर्चोRead more
पूंजी बजट और राजस्व बजट के मध्य अंतर
**1. मुख्य अंतर:
**2. पूंजी बजट के घटक:
**3. राजस्व बजट के घटक:
निष्कर्ष: पूंजी बजट दीर्घकालिक विकास और स्थायी परियोजनाओं के लिए आवंटित होता है, जबकि राजस्व बजट रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों और सेवाओं को संचालित करने के लिए होता है।
See lessभारत की सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) के वर्ष 2015 के पूर्व तथा वर्ष 2015 के पश्चात् परिकलन विधि में अन्तर की व्याख्या कीजिए। (150 words) [UPSC 2021]
भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) गणना में 2015 के पूर्व और 2015 के पश्चात् का अंतर **1. 2015 के पूर्व की विधि: पुराना आधार वर्ष: GDP की गणना के लिए 2004-05 को आधार वर्ष के रूप में अपनाया गया था, जो कि अब पुराना हो चुका था। सर्वेक्षण आधारित डेटा: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और कृषि डेटा जैसे मुख्य सRead more
भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) गणना में 2015 के पूर्व और 2015 के पश्चात् का अंतर
**1. 2015 के पूर्व की विधि:
**2. 2015 के पश्चात की विधि:
उदाहरण: GST के लागू होने के बाद, व्यापार और सेवा डेटा का डिजिटल संग्रहण GDP गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे विवादों और त्रुटियों की संभावना कम हो गई है।
निष्कर्ष: 2015 के बाद की गणना विधि ने GDP के आकलन को अद्यतन किया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अधिक सटीक रूप से दर्शाया जा सकता है।
See lessसमेकित कृषि प्रणाली क्या है ? भारत में छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह कैसे लाभदायक हो सकती है ? (250 words) [UPSC 2022]
समेकित कृषि प्रणाली: परिभाषा और लाभ **1. समेकित कृषि प्रणाली क्या है?: समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System, IFS) एक बहुआयामी दृष्टिकोण है जिसमें विभिन्न प्रकार की कृषि गतिविधियाँ जैसे कि फसल उत्पादन, पशुपालन, मछली पालन, और वृक्षारोपण एक ही प्रणाली में एकीकृत की जाती हैं। इसका उद्देश्य कृषRead more
समेकित कृषि प्रणाली: परिभाषा और लाभ
**1. समेकित कृषि प्रणाली क्या है?:
**2. भारत में छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभ:
**a. आय विविधीकरण:
**b. संसाधनों का प्रभावी उपयोग:
**c. विपणन और भंडारण में सुधार:
**d. पर्यावरणीय स्थिरता:
**3. हाल के उदाहरण:
**a. किसान उत्पादक संगठनों: कई राज्यों में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) ने समेकित कृषि प्रणाली को अपनाया है। उत्तर प्रदेश में, किसान समूहों ने कृषि-लाइवस्टॉक समेकन के माध्यम से अपनी आय को दोगुना किया है और फसलों की जोखिम को कम किया है।
**b. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स: आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे eNAM और किसान मित्र ने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली के लाभ और जानकारी प्रदान की है, जिससे वे बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं और संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष: समेकित कृषि प्रणाली छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक प्रभावी तरीका है जिससे वे आय विविधीकरण, संसाधनों के कुशल उपयोग, और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत में इसे लागू करने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और स्थायी कृषि प्रथाएँ प्रोत्साहित होंगी।
See lessभारत में कृषि उत्पादों के विपणन की ऊर्ध्वमुखी और अधोमुखी प्रक्रिया में मुख्य बाधाएँ क्या हैं ? (250 words) [UPSC 2022]
भारत में कृषि उत्पादों के विपणन में बाधाएँ **1. ऊर्ध्वमुखी प्रक्रिया की बाधाएँ: **a. गुणवत्ता युक्त इनपुट्स की सीमित पहुँच: किसान अक्सर उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और कीटनाशकों तक सीमित पहुँच का सामना करते हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में छोटे और सीमांत किसान प्रमाणित बीजों की कमी से प्रभावित होते हRead more
भारत में कृषि उत्पादों के विपणन में बाधाएँ
**1. ऊर्ध्वमुखी प्रक्रिया की बाधाएँ:
**a. गुणवत्ता युक्त इनपुट्स की सीमित पहुँच:
**b. अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा:
**c. असंगठित विस्तार सेवाएँ:
**2. अधोमुखी प्रक्रिया की बाधाएँ:
**a. टुकड़ों में आपूर्ति श्रृंखला:
**b. बाजार पहुँच की समस्याएँ:
**c. मूल्य अस्थिरता:
**3. हाल की पहलें और समाधान:
**a. डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म:
**b. कोल्ड स्टोरेज निवेश:
**c. विस्तार सेवाओं में सुधार:
निष्कर्ष: इन बाधाओं को दूर करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें बुनियादी ढाँचा विकास, बेहतर बाजार पहुँच, प्रभावी विस्तार सेवाएँ, और प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है। eNAM जैसी पहलें और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं में सुधार सही दिशा में कदम हैं, लेकिन उपयुक्त और स्थायी प्रयासों की आवश्यकता है।
See lessक्या आपके विचार में भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50 प्रतिशत भाग, वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त कर लेगा ? अपने उत्तर के औचित्य को सिद्ध कीजिए। जीवाश्म ईंधनों से सब्सिडी हटाकर उसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में लगाना उपर्युक्त उद्देश्य पूर्ति में किस प्रकार सहायक होगा ? समझाइए । (250 words) [UPSC 2022]
भारत का 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य **1. लक्ष्य की संभावना: भारत की प्रतिबद्धता: भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50% भाग नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) का हिस्सा है। वर्तमान प्रगति: 2024 की शुरुआत तक,Read more
भारत का 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य
**1. लक्ष्य की संभावना:
**2. हाल की पहलें:
**3. जीवाश्म ईंधनों से सब्सिडी का स्थानांतरण:
**4. चुनौतियाँ और समाधान:
निष्कर्ष: भारत द्वारा 2030 तक 50% नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य प्राप्त करना संभव है यदि सही नीतियों, प्रौद्योगिकियों, और सब्सिडी की पुनरावृत्ति के माध्यम से समर्पित प्रयास जारी रहें। यह संक्रमण न केवल भारत के जलवायु लक्ष्यों को समर्थन देगा बल्कि सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।
See less"हाल के दिनों का आर्थिक विकास श्रम उत्पादकता में वृद्धि के कारण संभव हुआ है।" इस कथन को समझाइए । ऐसे संवृद्धि प्रतिरूप को प्रस्तावित कीजिए जो श्रम उत्पादकता से समझौता किए बिना अधिक रोजगार उत्पत्ति में सहायक हो। (250 words) [UPSC 2022]
श्रम उत्पादकता और हाल के आर्थिक विकास **1. श्रम उत्पादकता की भूमिका: श्रम उत्पादकता से तात्पर्य प्रति श्रमिक उत्पादित आउटपुट से है। हाल के वर्षों में, आर्थिक विकास में श्रम उत्पादकता में वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उदाहरण के लिए, भारत की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र ने उच्च उत्पादकता केRead more
श्रम उत्पादकता और हाल के आर्थिक विकास
**1. श्रम उत्पादकता की भूमिका:
**2. हाल के उदाहरण:
श्रम उत्पादकता से समझौता किए बिना रोजगार सृजन के लिए संवृद्धि प्रतिरूप
**1. कौशल विकास और शिक्षा:
**2. उभरते क्षेत्रों का समर्थन:
**3. उद्यमिता और छोटे उद्यमों का समर्थन:
**4. संविधानिक अवसंरचना विकास:
इन पहलों के माध्यम से भारत उच्च श्रम उत्पादकता बनाए रखते हुए अधिक रोजगार उत्पन्न कर सकता है। यह संतुलित दृष्टिकोण स्थायी आर्थिक विकास और समान रोजगार वितरण सुनिश्चित करता है।
See lessदेश में आयु संभाविता में आई वृद्धि से समाज में नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। यह नई चुनौतियाँ कौन-कौन सी हैं और उनके समाधान हेतु क्या-क्या कदम उठाए जाने आवश्यक हैं ? (150 words)[UPSC 2022]
देश में आयु संभाविता में आई वृद्धि से नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ **1. क्रोनिक बीमारियाँ: दीर्घकालिक बीमारियाँ जैसे हृदय रोग, डायबिटीज, और कैंसर बढ़ रही हैं। हाल ही में, भारत में डायबिटीज के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। **2. वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल: वृद्ध जनसंख्या की बढ़ती संख्या के साथ गेरियाRead more
देश में आयु संभाविता में आई वृद्धि से नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ
**1. क्रोनिक बीमारियाँ:
**2. वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल:
**3. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ:
**4. स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव:
समाधान हेतु आवश्यक कदम
**1. रोकथाम और नियमित जांचें:
**2. गेरियाट्रिक देखभाल में निवेश:
**3. मानसिक स्वास्थ्य समर्थन:
**4. स्वास्थ्य ढांचे का उन्नयन:
इन उपायों के माध्यम से, समाज में बढ़ती आयु संभाविता से संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
See lessभारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कार्यक्षेत्र और महत्त्व का सविस्तार वर्णन कीजिए । (150 words)[UPSC 2022]
भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कार्यक्षेत्र और महत्त्व **1. कार्यक्षेत्र: विविध उत्पाद: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग फल, सब्जियाँ, डेयरी, मांस, और अनाज उत्पादों की प्रसंस्करण में संलग्न है। इसमें पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, तैयार भोजन, और पेय पदार्थ भी शामिल हैं। विस्तारशीलता: भारत में इस उद्योग की वृद्धिRead more
भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कार्यक्षेत्र और महत्त्व
**1. कार्यक्षेत्र:
**2. आर्थिक महत्त्व:
**3. खाद्य सुरक्षा और पोषण:
**4. हालिया विकास:
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि, खाद्य सुरक्षा, और पोषण में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके विकास से देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सशक्त किया जा सकता है।
See lessभारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे किस प्रकार प्रभावी तथा पारदर्शी बनाया जा सकता है ? (150 words)[UPSC 2022]
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) की प्रमुख चुनौतियाँ **1. लीकेज और वितरण में गड़बड़ी: पी.डी.एस. में सार्वजनिक वितरण के अंतर्गत सहायता प्राप्त खाद्यान्न का बाजार में विक्रय हो रहा है, जिससे गरीबों तक उचित खाद्य सामग्री नहीं पहुँचती। उदाहरण के लिए, 2023 में कई राज्यों में गेहूं और चावल केRead more
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) की प्रमुख चुनौतियाँ
**1. लीकेज और वितरण में गड़बड़ी: पी.डी.एस. में सार्वजनिक वितरण के अंतर्गत सहायता प्राप्त खाद्यान्न का बाजार में विक्रय हो रहा है, जिससे गरीबों तक उचित खाद्य सामग्री नहीं पहुँचती। उदाहरण के लिए, 2023 में कई राज्यों में गेहूं और चावल के काला बाजारी की खबरें आईं।
**2. भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा: भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थी जैसे मुद्दे भी प्रमुख समस्याएं हैं। 2023 में, कुछ राज्यों में राशन कार्ड के फर्जी लाभार्थियों की पहचान की गई।
**3. अप्रभावी वितरण तंत्र: डिलीवरी और भंडारण की समस्याएँ जैसे असुविधाजनक बुनियादी ढांचा और खराब लॉजिस्टिक्स की वजह से खाद्यान्न की बर्बादी और विलंब हो रहा है।
**4. लक्षित वितरण की कमी: लाभार्थी पहचान में गड़बड़ी के कारण योग्य परिवार छूट जाते हैं या अयोग्य लाभार्थियों को शामिल कर लिया जाता है।
पी.डी.एस. को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उपाय
**1. प्रौद्योगिकी का उपयोग: आधार आधारित प्रमाणीकरण और इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ़ सेल (ePOS) का उपयोग कर लीकेज को कम किया जा सकता है और सही वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
**2. निगरानी तंत्र को मजबूत करना: मॉनिटरिंग और ऑडिटिंग सिस्टम को बेहतर बनाकर वितरण प्रक्रिया की ट्रैकिंग और भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है।
**3. पारदर्शिता बढ़ाना: लाभार्थी सूचियों की सार्वजनिक घोषणा और वास्तविक समय की ट्रैकिंग से जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास बढ़ाया जा सकता है।
**4. क्षमता निर्माण: पी.डी.एस. कर्मियों की प्रशिक्षण और भंडारण सुविधाओं में निवेश से प्रभावशीलता और वितरण की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
इन सुधारात्मक उपायों के माध्यम से पी.डी.एस. को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
See lessक्या बाज़ार अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत समावेशी विकास संभव है ? भारत में आर्थिक विकास की प्राप्ति के लिए वित्तीय समावेश के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। (150 words)[UPSC 2022]
क्या बाज़ार अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत समावेशी विकास संभव है? बाज़ार अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास: बाज़ार अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास संभव है, लेकिन इसके लिए सही नीतियों और नियामक ढांचे की आवश्यकता होती है। समावेशी विकास का मतलब है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी समाज के वर्गों तक पहुंचे, न कि केवल कुछRead more
क्या बाज़ार अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत समावेशी विकास संभव है?
बाज़ार अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास:
बाज़ार अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास संभव है, लेकिन इसके लिए सही नीतियों और नियामक ढांचे की आवश्यकता होती है। समावेशी विकास का मतलब है कि आर्थिक विकास का लाभ सभी समाज के वर्गों तक पहुंचे, न कि केवल कुछ विशेष समूहों तक सीमित रहे।
हाल के उदाहरण:
इन पहलों से यह स्पष्ट होता है कि बाज़ार अर्थव्यवस्था के अंतर्गत समावेशी विकास संभव है, बशर्ते कि नीति निर्धारण और कार्यक्रमों का ध्यान सभी समाज के वर्गों की जरूरतों पर केंद्रित हो।
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