सार्वजनिक जीवन के आधारिक सिद्धांत क्या हैं? इन में से किन्हीं तीन सिद्धांतों को उपयुक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिए। (150 words) [UPSC 2019]
नीतिपरक मुद्दे और समाधान के उपाय **1. नीतिपरक मुद्दे a. अव्यवस्थित आपातकालीन प्रबंधन: लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए अपर्याप्त आवागमन और आश्रय की सुविधाएँ प्रमुख समस्याएं थीं। इसके कारण कई श्रमिकों को यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उन्हें भोजन और सुरक्षा की कमी का सामना करना पडRead more
नीतिपरक मुद्दे और समाधान के उपाय
**1. नीतिपरक मुद्दे
a. अव्यवस्थित आपातकालीन प्रबंधन:
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए अपर्याप्त आवागमन और आश्रय की सुविधाएँ प्रमुख समस्याएं थीं। इसके कारण कई श्रमिकों को यात्रा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उन्हें भोजन और सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ा।
b. शोषण और असंवेदनशीलता:
प्रवासी श्रमिकों के शोषण और उनके अधिकारों की अनदेखी की गई। उन्हें मजदूरी और आवागमन की सुविधाओं की मांग करनी पड़ी, जो उनकी मौलिक आवश्यकताओं की अनदेखी दर्शाता है।
c. मानसिक और शारीरिक पीड़ा:
आजीविका के नुकसान, भोजन की कमी, और घर पहुँचने में असमर्थता ने प्रवासी श्रमिकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इस संकट ने उनकी स्थिति को और भी बदतर बना दिया।
**2. नीतिपरक सेवा प्रदाता राज्य
एक नीतिपरक सेवा प्रदाता राज्य वह है जो:
- समय पर और प्रभावी सहायता: आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करता है।
- समानता और न्याय: सभी नागरिकों, विशेषकर कमजोर वर्गों, को समान और न्यायपूर्ण संसाधन और सहायता प्रदान करता है।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: निर्णय और कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखता है।
**3. सभ्य समाज की सहायता
a. आपातकालीन सहायता और राहत:
सभ्य समाज को आपातकालीन स्थितियों में तुरंत सहायता प्रदान करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, COVID-19 महामारी के दौरान, कई एनजीओ और स्वैच्छिक संगठन जैसे ‘गुंज’ और ‘अक्षय पात्र’ ने राहत सामग्री वितरित की।
b. जागरूकता और समर्थन:
जन जागरूकता अभियान चलाना और प्रवासी श्रमिकों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित करना महत्वपूर्ण है। मीडिया और सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान से समाज में संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है।
c. स्वयंसेवी प्रयास और धनसंग्रह:
स्वयंसेवी संगठन और व्यक्ति राहत कार्यों में सहयोग कर सकते हैं और धनसंग्रह के माध्यम से आवश्यक संसाधन जुटा सकते हैं। ‘फीड माय स्टार्विंग चिल्ड्रन’ जैसे प्रयासों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
d. नीति सिफारिशें:
प्रवासी श्रमिकों के लिए बेहतर नीतिगत उपायों की सिफारिश करना, जैसे कि बेहतर श्रम कानून और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाएं, सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नीति निर्माताओं के साथ समन्वय करना।
निष्कर्ष:
प्रवासी श्रमिकों की स्थिति ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन प्रबंधन और मानवाधिकारों की अनदेखी गंभीर नैतिक समस्याएं पैदा कर सकती हैं। एक नीतिपरक सेवा प्रदाता राज्य की भूमिका इन समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण है। सभ्य समाज की सक्रिय भूमिका, जैसे कि आपातकालीन सहायता, जागरूकता और नीति सुधार, प्रवासी श्रमिकों की पीड़ाओं को कम करने में सहायक हो सकती है।
सार्वजनिक जीवन के आधारिक सिद्धांत **1. ईमानदारी परिभाषा: ईमानदारी का तात्पर्य नैतिक सिद्धांतों और सत्यता का पालन करने से है, जिसमें पारदर्शिता और स्पष्टता शामिल है। उदाहरण: अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री, ने डिजिटल करप्शन के खिलाफ सख्त उपायों के तहत ‘ई-नाम’ जैसे प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया, जिससे सरकारRead more
सार्वजनिक जीवन के आधारिक सिद्धांत
**1. ईमानदारी
परिभाषा: ईमानदारी का तात्पर्य नैतिक सिद्धांतों और सत्यता का पालन करने से है, जिसमें पारदर्शिता और स्पष्टता शामिल है।
उदाहरण: अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री, ने डिजिटल करप्शन के खिलाफ सख्त उपायों के तहत ‘ई-नाम’ जैसे प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया, जिससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित की जा सके।
**2. जवाबदेही
परिभाषा: जवाबदेही का मतलब है अपने कार्यों और निर्णयों के प्रति जिम्मेदार होना और उन पर रिपोर्ट देना।
उदाहरण: सोनिया गांधी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष, ने लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी के वित्तीय विवरणों को सार्वजनिक किया, जिससे पार्टी के खर्च और योगदानों के प्रति जवाबदेही बढ़ी।
**3. समानता
परिभाषा: समानता का तात्पर्य सभी व्यक्तियों को समान अवसर और निष्पक्ष उपचार देने से है, भले ही वे किसी भी सामाजिक या आर्थिक स्थिति में हों।
उदाहरण: प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, ने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार किया, जिससे सभी नागरिकों को स्वच्छता के लाभ मिले और समाज में समानता बढ़ी।
ये सिद्धांत सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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