गीता का ‘अनासक्त योग’ क्या है? सिविल सेवकों के लिये यह क्या संदेश देता है? व्याख्या कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2020]
लोक प्रशासन की 'सामाजिक जिम्मेदारी' लोक प्रशासन की सामाजिक जिम्मेदारी का अर्थ है कि सरकार और उसके अधिकारी न केवल कानूनों को लागू करें, बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी कार्य करें। इसका तात्पर्य है कि प्रशासन को जनता की जरूरतों को समझना चाहिए और उनका समाधान करना चाहिए। इसमें गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वाRead more
लोक प्रशासन की ‘सामाजिक जिम्मेदारी’
लोक प्रशासन की सामाजिक जिम्मेदारी का अर्थ है कि सरकार और उसके अधिकारी न केवल कानूनों को लागू करें, बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी कार्य करें। इसका तात्पर्य है कि प्रशासन को जनता की जरूरतों को समझना चाहिए और उनका समाधान करना चाहिए। इसमें गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर ध्यान देना शामिल है। लोक प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए ताकि जनता पर इसका विश्वास बना रहे।
अन्य शब्दों में, लोक प्रशासन की सामाजिक जिम्मेदारी का मतलब है कि सरकार को जनता की सेवा करना चाहिए और समाज के विकास के लिए काम करना चाहिए।
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अनासक्त योग' भगवद गीता के चतुर्थ अध्याय में वर्णित एक महत्वपूर्ण योग है, जो कर्मों को बिना किसी व्यक्तिगत आशक्ति के करने की कला को दर्शाता है। इसमें क्रियाशीलता को केवल अपने कर्तव्यों के निर्वहन के रूप में देखा जाता है, बिना किसी परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत असफलता और सफलता दोनों पर समान दृष्टिकRead more
अनासक्त योग’ भगवद गीता के चतुर्थ अध्याय में वर्णित एक महत्वपूर्ण योग है, जो कर्मों को बिना किसी व्यक्तिगत आशक्ति के करने की कला को दर्शाता है। इसमें क्रियाशीलता को केवल अपने कर्तव्यों के निर्वहन के रूप में देखा जाता है, बिना किसी परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत असफलता और सफलता दोनों पर समान दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह देता है।
सिविल सेवकों के लिए संदेश:
निष्कर्ष: ‘अनासक्त योग’ सिविल सेवकों को अपनी कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण से करने की सलाह देता है, बिना परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत धैर्य, संतुलन, और प्रोफेशनलिज़्म बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है, जो सरकारी कार्यों में सच्ची सेवा और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करता है।
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