“भ्रष्टाचार सरकारी राजकोष का दुरुपयोग, प्रशासनिक अदक्षता एवं राष्ट्रीय विकास के मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है।” कौटिल्य के विचारों की विवेचना कीजिए । (150 words) [UPSC 2016]
भारत के संदर्भ में सामाजिक न्याय की जॉन रॉल्स की संकल्पना 1. न्याय का सिद्धांत: व्याख्या: जॉन रॉल्स का सिद्धांत "न्याय को समानता के रूप में" प्रस्तुत करता है, जिसमें दो प्रमुख सिद्धांत होते हैं: समान मूलभूत स्वतंत्रताएँ और समान अवसरों की निष्पक्षता, साथ ही फर्क सिद्धांत जो आर्थिक असमानताओं की अनुमतिRead more
भारत के संदर्भ में सामाजिक न्याय की जॉन रॉल्स की संकल्पना
1. न्याय का सिद्धांत:
- व्याख्या: जॉन रॉल्स का सिद्धांत “न्याय को समानता के रूप में” प्रस्तुत करता है, जिसमें दो प्रमुख सिद्धांत होते हैं: समान मूलभूत स्वतंत्रताएँ और समान अवसरों की निष्पक्षता, साथ ही फर्क सिद्धांत जो आर्थिक असमानताओं की अनुमति देता है अगर वे सबसे कमजोर वर्ग के हित में हों।
- भारतीय संदर्भ: भारतीय संविधान में इन सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए, मूलभूत अधिकार और समानता की गारंटी दी गई है, और आरक्षण जैसे उपाय असमानता को दूर करने का प्रयास करते हैं।
2. समान मूलभूत स्वतंत्रताएँ:
- व्याख्या: रॉल्स का मानना है कि सभी व्यक्तियों को समान बुनियादी स्वतंत्रताएँ प्राप्त होनी चाहिए, जैसे कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
- भारतीय संदर्भ: भारतीय संविधान के तहत अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) इस सिद्धांत का पालन करते हैं।
3. समान अवसरों की निष्पक्षता:
- व्याख्या: सभी व्यक्तियों को समान अवसर प्राप्त होना चाहिए, चाहे उनका सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि कोई भी हो।
- भारतीय संदर्भ: शिक्षा और रोजगार में आरक्षण अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए समान अवसर प्रदान करने का प्रयास है।
4. फर्क सिद्धांत:
- व्याख्या: रॉल्स असमानताओं की अनुमति देते हैं यदि वे समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लाभ के लिए हों।
- भारतीय संदर्भ: मनरेगा जैसे कार्यक्रम गरीबों के लिए रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो इस सिद्धांत को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष: जॉन रॉल्स की सामाजिक न्याय की संकल्पना भारतीय संविधान और नीतियों में समानता, स्वतंत्रता, और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए प्रयुक्त होती है।
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कौटिल्य के भ्रष्टाचार पर विचार 1. सरकारी राजकोष का दुरुपयोग: व्याख्या: कौटिल्य की अर्थशास्त्र में भ्रष्टाचार को राज्य के संसाधनों के दुरुपयोग के रूप में देखा गया है। भ्रष्ट अधिकारी सरकारी धन का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए करते हैं, जिससे राज्य को वित्तीय हानि होती है। उदाहरण: 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जैRead more
कौटिल्य के भ्रष्टाचार पर विचार
1. सरकारी राजकोष का दुरुपयोग:
2. प्रशासनिक अदक्षता:
3. राष्ट्रीय विकास में बाधा:
निष्कर्ष: कौटिल्य के विचार दर्शाते हैं कि भ्रष्टाचार न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करता है, बल्कि यह राष्ट्रीय विकास की गति को भी रोकता है। इसका प्रभाव व्यापक और विनाशकारी होता है।
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