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Naxalism is a social, economic and developmental issue manifesting as a violent internal security threat. In this context, discuss the emerging issues and suggest a multilayered strategy to tackle the menace of Naxalism. (250 words) [UPSC 2022]
नक्सलवाद: उभरती समस्याएँ और बहुपरकारी रणनीति **1. उभरती समस्याएँ: सामाजिक असंतोष: नक्सलवाद मुख्यतः आदिवासी और गरीब क्षेत्रों में सामाजिक असंतोष से प्रेरित है। इन क्षेत्रों में भ्रष्टाचार, भौगोलिक अलगाव और शासन की कमी जैसी समस्याएँ नक्सलवाद को बढ़ावा देती हैं। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदRead more
नक्सलवाद: उभरती समस्याएँ और बहुपरकारी रणनीति
**1. उभरती समस्याएँ:
**2. नक्सलवाद से निपटने के लिए बहुपरकारी रणनीति:
निष्कर्ष: नक्सलवाद एक जटिल समस्या है जो सामाजिक, आर्थिक और विकासात्मक मुद्दों को एक साथ मिलाकर एक हिंसात्मक आंतरिक सुरक्षा खतरा उत्पन्न करती है। एक प्रभावी रणनीति में सामाजिक और आर्थिक विकास, सुरक्षा उपाय, मानवाधिकार सम्मान, और जन जागरूकता शामिल होनी चाहिए। इस तरह की बहुपरकारी रणनीति नक्सलवाद की समस्या को प्रभावी ढंग से संबोधित कर सकती है।
See lessसाइबर सुरक्षा के विभिन्न तत्त्व क्या हैं ? साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए समीक्षा कीजिए कि भारत ने किस हद तक एक व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति सफलतापूर्वक विकसित की है। (250 words) [UPSC 2022]
साइबर सुरक्षा के तत्त्व और भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति **1. साइबर सुरक्षा के तत्त्व: प्रवेश नियंत्रण: यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि केवल अधिकृत व्यक्ति ही नेटवर्क और डेटा तक पहुँच प्राप्त कर सकें। उदाहरण के लिए, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का उपयोग किया जाता है। डेटा एन्क्रिप्शन: संवेRead more
साइबर सुरक्षा के तत्त्व और भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति
**1. साइबर सुरक्षा के तत्त्व:
**2. भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति:
निष्कर्ष: भारत ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न तत्त्वों को ध्यान में रखते हुए एक ठोस राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति तैयार की है, लेकिन साइबर खतरे के विकसित होते परिदृश्य के साथ-साथ, निरंतर उन्नति और सुधार की आवश्यकता है।
See lessWhat are the different elements of cyber security? Keeping in view the challenges in cyber security, examine the extent to which India has successfully developed a comprehensive National Cyber Security Strategy. (250 words) [UPSC 2022]
साइबर सुरक्षा के तत्व और भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति **1. साइबर सुरक्षा के तत्व: साइबर सुरक्षा की परिभाषा: साइबर सुरक्षा वह प्रक्रिया है जो डिजिटल डेटा, नेटवर्क, और प्रणालियों को साइबर हमलों, हैकिंग, और डेटा चोरी से सुरक्षित रखने के लिए अपनाई जाती है। मुख्य तत्व: प्रवेश नियंत्रण: आधिकारिकRead more
साइबर सुरक्षा के तत्व और भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति
**1. साइबर सुरक्षा के तत्व:
**2. भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति:
**3. चुनौतियाँ और प्रदर्शन:
निष्कर्ष: भारत ने साइबर सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन साइबर खतरों के विकसित होते परिदृश्य को देखते हुए, एक पूरी तरह से प्रभावी और सामयिक रणनीति की आवश्यकता है। निरंतर सुधार और सक्रिय निगरानी के माध्यम से भारत अपनी साइबर सुरक्षा को और सुदृढ़ कर सकता है।
See lessभारत में तटीय अपरदन के कारणों एवं प्रभावों को समझाइए । ख़तरे का मुकाबला करने के लिए उपलब्ध तटीय प्रबंधन तकनीकें क्या हैं? (250 words) [UPSC 2022]
भारत में तटीय अपरदन: कारण, प्रभाव और प्रबंधन तकनीकें **1. तटीय अपरदन के कारण: प्राकृतिक कारण: लहरें और तूफान: समुद्र की लहरें और चक्रवात तटीय क्षेत्र को क्षति पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए, 2020 में अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में व्यापक अपरदन किया। जलवायु परिवर्तन: वैश्वRead more
भारत में तटीय अपरदन: कारण, प्रभाव और प्रबंधन तकनीकें
**1. तटीय अपरदन के कारण:
**2. तटीय अपरदन के प्रभाव:
**3. तटीय प्रबंधन तकनीकें:
निष्कर्ष: भारत में तटीय अपरदन एक गंभीर समस्या है, जिसका प्रभाव भौतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्तर पर महसूस किया जाता है। प्रभावी तटीय प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करके हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं और तटीय क्षेत्रों की स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।
See lessExplain the causes and effects of coastal erosion in India. What are the available coastal management techniques for combating the hazard? (250 words) [UPSC 2022]
कोस्टल इरोजन: कारण, प्रभाव और प्रबंधन तकनीकें **1. कोस्टल इरोजन के कारण: प्राकृतिक कारण: संबंधित समुद्री ताकतें, जैसे लहरों और तूफानों का प्रभाव, तटरेखा को काटने में योगदान करते हैं। उदाहरण के लिए, गुजरात के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात और तूफान तटरेखा की क्षति का कारण बनते हैं। जलवायु परिवर्तन: ग्लोबRead more
कोस्टल इरोजन: कारण, प्रभाव और प्रबंधन तकनीकें
**1. कोस्टल इरोजन के कारण:
**2. कोस्टल इरोजन के प्रभाव:
**3. कोस्टल प्रबंधन तकनीकें:
निष्कर्ष: तटीय क्षति एक गंभीर समस्या है जो भौतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव डालती है। प्रभावी तटीय प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से हम कोस्टल इरोजन के प्रभाव को कम कर सकते हैं और तटीय क्षेत्रों की स्थिरता सुनिश्चित कर सकते हैं।
See lessग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) की चर्चा कीजिए और वैश्विक जलवायु पर इसके प्रभावों का उल्लेख कीजिए । क्योटो प्रोटोकॉल, 1997 के आलोक में ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनने वाली ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम करने के लिए नियंत्रण उपायों को समझाइए । (250 words) [UPSC 2022]
ग्लोबल वार्मिंग: प्रभाव और नियंत्रण उपाय **1. ग्लोबल वार्मिंग क्या है?: ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी की सतह का औसत तापमान बढ़ने की प्रक्रिया है, मुख्यतः ग्रीनहाउस गैसों जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) के बढ़ते उत्सर्जन के कारण। ये गैसें सौर विकिरण को पृथ्वी की सतह पर फंसRead more
ग्लोबल वार्मिंग: प्रभाव और नियंत्रण उपाय
**1. ग्लोबल वार्मिंग क्या है?:
**2. वैश्विक जलवायु पर प्रभाव:
**3. कंट्रोल उपाय: क्योटो प्रोटोकॉल, 1997:
**4. नवीन उपाय:
निष्कर्ष: ग्लोबल वार्मिंग की गंभीरता को देखते हुए, क्योटो प्रोटोकॉल और अन्य उपायों के माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना आवश्यक है। प्रभावी नियंत्रण उपायों को अपनाकर और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर हम वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपट सकते हैं।
See lessभारत में वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने में प्रधानमंत्री जन-धन योजना की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
प्रधानमंत्री जन-धन योजना , जो 2014 में शुरू की गई थी, भारत में वित्तीय समावेशन को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को सभी भारतीय नागरिकों तक विस्तारित करना है, विशेषकर उन लोगों तक जो वित्तीय सेवाओं से वंचित हैं। प्रधानमंत्री जन-धन योजना की भूमिRead more
प्रधानमंत्री जन-धन योजना , जो 2014 में शुरू की गई थी, भारत में वित्तीय समावेशन को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को सभी भारतीय नागरिकों तक विस्तारित करना है, विशेषकर उन लोगों तक जो वित्तीय सेवाओं से वंचित हैं।
प्रधानमंत्री जन-धन योजना की भूमिका का मूल्यांकन:
बैंक खाता खोलना: योजना के तहत लाखों लोगों को बिना किसी न्यूनतम बैलेंस के बैंक खाते खोलने की सुविधा मिली है। इससे वित्तीय सेवा की पहुँच में सुधार हुआ है।
वित्तीय साक्षरता: योजना ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वित्तीय शिक्षा को बढ़ावा दिया है, जिससे लोग बैंकिंग सेवाओं और उत्पादों के लाभ को समझने लगे हैं।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): जन-धन खातों के माध्यम से सरकारी सब्सिडी और लाभ सीधे खाताधारकों के खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और भ्रष्ट्राचार में कमी आई है।
बीमा और पेंशन योजनाएँ: योजना के अंतर्गत खाता धारकों को दुर्घटना बीमा और जीवन बीमा जैसे लाभ मिलते हैं, जिससे सामाजिक सुरक्षा में सुधार हुआ है।
डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा: जन-धन खातों को आधार से लिंक कर डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित किया गया है, जिससे वित्तीय समावेशन में वृद्धि हुई है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने भारत में वित्तीय समावेशन को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया है, और इससे आर्थिक और सामाजिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
See lessमानव पूंजी के स्रोत क्या हैं? किसी देश की आर्थिक संवृद्धि में मानव पूंजी की भूमिका पर प्रकाश डालिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
मानव पूंजी के स्रोत मुख्यतः व्यक्ति की शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, और अनुभव से संबंधित होते हैं। इन स्रोतों में शामिल हैं: शिक्षा: प्रारंभिक और उच्च शिक्षा के माध्यम से व्यक्तियों को ज्ञान और कौशल प्राप्त होता है, जो उनके उत्पादकता को बढ़ाता है। कौशल प्रशिक्षण: विशेष कौशल और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे व्यावRead more
मानव पूंजी के स्रोत मुख्यतः व्यक्ति की शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, और अनुभव से संबंधित होते हैं। इन स्रोतों में शामिल हैं:
शिक्षा: प्रारंभिक और उच्च शिक्षा के माध्यम से व्यक्तियों को ज्ञान और कौशल प्राप्त होता है, जो उनके उत्पादकता को बढ़ाता है।
कौशल प्रशिक्षण: विशेष कौशल और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम और कार्यशालाएँ।
स्वास्थ्य: अच्छा स्वास्थ्य व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, जिससे वे लंबे समय तक और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
अनुभव: कार्य अनुभव और व्यावसायिक ज्ञान, जो समय के साथ बढ़ता है और अधिक मूल्यवान हो जाता है।
मानव पूंजी की भूमिका आर्थिक संवृद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है:
उत्पादकता वृद्धि: उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और कौशल से कामकाजी उत्पादकता बढ़ती है, जिससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलता है।
See lessनवाचार और प्रतिस्पर्धा: शिक्षित और कुशल श्रमिक नये विचार और तकनीकें पेश कर सकते हैं, जो उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करते हैं।
आय में वृद्धि: अच्छी शिक्षा और कौशल वाले व्यक्ति उच्च वेतन प्राप्त करते हैं, जिससे उपभोक्ता खर्च बढ़ता है और आर्थिक विकास को बल मिलता है।
स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार: स्वस्थ कार्यबल अधिक प्रभावी ढंग से काम करता है, जो सामाजिक और आर्थिक लाभ को बढ़ाता है।
इस प्रकार, मानव पूंजी का सही उपयोग और निवेश किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि और समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।
फसल पद्धति और फसल प्रणाली के बीच अंतर को स्पष्ट कीजिए। साथ ही, भारत में प्रचलित विभिन्न प्रकार की फसल प्रणालियों पर चर्चा कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
फसल पद्धति और फसल प्रणाली में अंतर यह है कि फसल पद्धति एक विशिष्ट फसल की उगाने की विधि को दर्शाती है, जबकि फसल प्रणाली एक साथ उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों का एक व्यवस्थित समूह है। फसल पद्धति: यह एक विशिष्ट फसल के उत्पादन की विधि को संदर्भित करती है, जैसे कि सिंचित, वर्षा आधारित, या जैविक खेती। उदाहरRead more
फसल पद्धति और फसल प्रणाली में अंतर यह है कि फसल पद्धति एक विशिष्ट फसल की उगाने की विधि को दर्शाती है, जबकि फसल प्रणाली एक साथ उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों का एक व्यवस्थित समूह है।
फसल पद्धति: यह एक विशिष्ट फसल के उत्पादन की विधि को संदर्भित करती है, जैसे कि सिंचित, वर्षा आधारित, या जैविक खेती। उदाहरण के लिए, चावल की खेती में हवाई खेत की विधि एक फसल पद्धति है।
फसल प्रणाली: यह एक कृषि प्रबंधन प्रणाली है जिसमें एक साथ या अनुक्रमिक रूप से उगाई जाने वाली फसलों का संयोजन होता है। यह फसलें विभिन्न उद्देश्यों, जैसे खाद्य सुरक्षा, भूमि उपयोग या आर्थिक लाभ के लिए चुनी जाती हैं।
भारत में प्रमुख फसल प्रणालियाँ निम्नलिखित हैं:
मल्टी-क्रॉपिंग (Multi-Cropping): एक ही खेत में विभिन्न फसलों की बारी-बारी से खेती, जैसे कि गेंहू के बाद चने की फसल।
इंटर-क्रॉपिंग (Inter-Cropping): एक ही समय में विभिन्न फसलों की खेती, जैसे मक्का और दालें एक साथ।
सिल्वो-अग्रीकल्चर (Silvo-Agriculture): कृषि और वानिकी के संयोजन में फसलें, जैसे पेड़ और फसलें एक ही खेत में उगाना।
रोटेशनल क्रॉपिंग (Rotational Cropping): एक ही क्षेत्र में समय-समय पर विभिन्न फसलों का अनुक्रम, जैसे गेंहू और चावल का परिवर्तन।
ये प्रणालियाँ भूमि उपयोग को बेहतर बनाती हैं और संसाधनों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करती हैं।
See lessभारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव की विवेचना कीजिए। इस संबंध में सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?(उत्तर 200 शब्दों में दें)
जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अत्यधिक तापमान, असामान्य मौसमी पैटर्न, और अप्रत्याशित वर्षा की घटनाएँ फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकती हैं। उच्च तापमान से फसलों की वृद्धि में कमी हो सकती है और सूखा, फसल क्षति का मुख्य कारण बन सकता है। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ से भी खेतों कीRead more
जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अत्यधिक तापमान, असामान्य मौसमी पैटर्न, और अप्रत्याशित वर्षा की घटनाएँ फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकती हैं। उच्च तापमान से फसलों की वृद्धि में कमी हो सकती है और सूखा, फसल क्षति का मुख्य कारण बन सकता है। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ से भी खेतों की मिट्टी और फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार ने इन प्रभावों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जलवायु कृषि: फसल विविधीकरण, पानी की बचत तकनीकें (जैसे ड्रिप इरिगेशन) और मिट्टी सुधार जैसी विधियाँ अपनाई जा रही हैं।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना: इसमें कृषि क्षेत्र के लिए विशेष योजनाएं शामिल हैं, जैसे कि जलवायु-टिकाऊ कृषि प्रौद्योगिकियों का विकास।
सिंचाई परियोजनाएँ: “प्रति वर्षा क्षेत्र” जैसी योजनाओं के तहत, सिंचाई की सुविधा बढ़ाई जा रही है।
कृषि बीमा योजनाएँ: फसलों की क्षति को लेकर वित्तीय सुरक्षा देने के लिए कृषि बीमा योजनाओं को लागू किया गया है।
इन पहलों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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