उत्तर लेखन के लिए रोडमैप परिचय दादाभाई नौरोजी का संक्षिप्त परिचय: उन्हें ‘भारत का ग्रैंड ओल्डमैन’ कहा जाता है और उनके आर्थिक विचारों का महत्व। थीसिस वक्तव्य: उनके द्वारा भारतीय आर्थिक कठिनाइयों के कारणों की पहचान और विश्लेषण का सारांश। मुख्य भाग 1. धन की ...
Dadabhai Naoroji, a prominent economist of the 19th century, played a key role in analyzing the economic plight of India under British colonial rule. His most significant contribution was his concept of the “drain of wealth,” which he argued was the main cause of India’s economic distress. AccordingRead more
Dadabhai Naoroji, a prominent economist of the 19th century, played a key role in analyzing the economic plight of India under British colonial rule. His most significant contribution was his concept of the “drain of wealth,” which he argued was the main cause of India’s economic distress. According to Naoroji, Britain was draining India’s wealth through colonial exploitation, including the extraction of raw materials, forced exports, and the imposition of heavy taxes.
Naoroji also highlighted the adverse effects of British policies on India’s industrial and agricultural sectors, leading to widespread poverty and unemployment. He showed how Indian resources were being siphoned off to benefit British industries, causing stagnation in India’s own economy.
In conclusion, Naoroji’s economic theories laid the foundation for the Indian independence movement’s economic strategy, raising awareness about the exploitative colonial system and its impact on the Indian populace.
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दादाभाई नौरोजी भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने भारतीयों की आर्थिक कठिनाइयों के कारणों की गहरी पहचान की और उनका विश्लेषण किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भारत पर लगाए गए आर्थिक शोषण को प्रमुख कारण माना। उनका Drain of Wealth सिद्धांत इस बात की व्याख्या करता है कि कैसे बRead more
दादाभाई नौरोजी भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने भारतीयों की आर्थिक कठिनाइयों के कारणों की गहरी पहचान की और उनका विश्लेषण किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भारत पर लगाए गए आर्थिक शोषण को प्रमुख कारण माना। उनका Drain of Wealth सिद्धांत इस बात की व्याख्या करता है कि कैसे ब्रिटिश उपनिवेशी शासन ने भारतीय संसाधनों और संपत्तियों को अपने देश भेजकर भारतीयों को गरीबी और बदहाली में धकेला। नौरोजी ने यह भी बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटिश नीतियों के कारण अत्यधिक कमजोर हो गई थी, जिससे भारतीयों के लिए रोजगार और समृद्धि की कोई संभावना नहीं थी।
उनकी रचनाओं ने भारतीय समाज को अपनी आर्थिक स्थिति को समझने में मदद दी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए एक आर्थिक दृष्टिकोण तैयार किया।
इस प्रकार, दादाभाई नौरोजी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के शोषण को उजागर किया और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया।
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