1857 की क्रांति भारत की प्रथम क्रांति थी तथा 1857 के सिपाही विद्रोह को भारत में ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ के नाम से तथा ब्रिटेन में ‘इंडियन म्यूटिनी’ के नाम से अभिव्यक्त किया जाता है। 1857 की क्रांति के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सैन्य कारण थे, लेकिन इसका मुख्य कारण भारतीय जनता का शोषण और सैनिकों का असंतोष था। जिसके निम्नलिखित कारण थे। अंग्रेजों ने सती प्रथा (1829), हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (1856) तथा 1850 के धार्मिक अधिनियम के माध्यम से पारंपरिक हिन्दू कानूनों में संशोधन किया, ब्रिटिश शासन में कृषि का व्यावसायीकरण हुआ, ज़बरदस्त औद्योगीकरण और धन का निकास हुआ, जिसके कारण अर्थव्यवस्था में गिरावट आई। सेना में असंतोष का एक कारण जनरल सर्विस एन्लिस्टमेंट एक्ट 1856 बना। इस क्रांति का तात्कालिक एवं मुख्य कारण दिसंबर 1856 में सरकार द्वारा पुरानी ब्राउन बेज़ बंदूक के स्थान पर नवीन एनफील्ड राइफल के उपयोग का निर्णय था, यही भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम – 1857 के विद्रोह – का तात्कालिक और प्रमुख कारण बना। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर के सैनिकों ने चर्बी लगे कारतूसों के उपयोग से इनकार कर दिया। मंगल पांडे ने लेफ्टिनेंट बाग और मेजर ह्यूसन को गोली मार दी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके परिणामस्वरूप मंगल पांडे को गिरफ्तार किया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई। इसके बाद 10 मई 1857 को मेरठ की पैदल टुकड़ी ने विद्रोह कर 1857 की क्रांति की शुरुआत की। उस समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग थे। 1857 के सशस्त्र हिंसक संग्राम का प्रतीक ‘कमल’ और ‘रोटी’ था। यह क्रांति एक जगह तक सीमित न रहकर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में फैली। इसमें कई बहादुर नेता उभरे जिनमें नाना साहेब, बेगम हज़रत महल और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई प्रमुख थीं। परंतु यह क्रांति असफल रही।