भारत में स्मार्ट नगर स्मार्ट गाँवों के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।’ ग्रामीण नगरीय एकीकरण की पृष्ठभूमि में इस कथन पर चर्चा कीजिये। (200 words) [UPSC 2015]
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“भारत में स्मार्ट नगर स्मार्ट गाँवों के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं” कथन ग्रामीण-नगरीय एकीकरण की आवश्यकता को उजागर करता है। स्मार्ट नगर और स्मार्ट गाँवों के बीच एक स्वस्थ संतुलन और समन्वय आवश्यक है ताकि सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके। इस संदर्भ में, निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा सकती है:
1. ग्रामीण-नगरीय एकीकरण की पृष्ठभूमि:
संसाधन और सेवाओं का साझा उपयोग: स्मार्ट नगरों में उन्नत अवसंरचना, जैसे कि स्मार्ट ग्रिड्स, बेहतर परिवहन नेटवर्क, और स्वास्थ्य सेवाएँ, को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ समन्वयित किया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों को भी समान सेवाएँ प्राप्त हो सकती हैं, जिससे समग्र जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।
आर्थिक और सामाजिक संपर्क: ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और संपर्क की आवश्यकता है। स्मार्ट गाँवों में कृषि, ई-कॉमर्स, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्मार्ट तकनीकों का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना सकता है और नगरीय क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ा सकता है।
पर्यावरणीय स्थिरता: स्मार्ट नगरों में उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय दबाव और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय संरक्षण और सतत कृषि प्रथाओं की आवश्यकता है। इससे समग्र पर्यावरणीय स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सकता है।
2. स्मार्ट नगर और स्मार्ट गाँवों की आवश्यकता:
स्मार्ट गाँवों की भूमिका: स्मार्ट गाँव, जिनमें उन्नत अवसंरचना, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, और डिजिटल कनेक्टिविटी होती है, स्मार्ट नगरों के लिए आवश्यक संसाधनों और सेवाओं की आपूर्ति करते हैं। स्मार्ट गाँवों में कृषि, शिक्षा, और स्वास्थ्य में सुधार से नगरीय क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सामाजिक और आर्थिक विकास: स्मार्ट नगरों के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की विकास योजनाओं को भी गति मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि स्मार्ट नगरों में ग्रामीण उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
समन्वित योजना और नीति: ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के बीच एकीकरण के लिए एक समन्वित योजना और नीति की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करती है कि संसाधनों का उपयोग समान रूप से हो और सभी क्षेत्रों में विकास समान रूप से फैले।
निष्कर्ष:
स्मार्ट नगरों और स्मार्ट गाँवों के बीच गहरा संबंध है। स्मार्ट गाँवों की प्रभावशीलता और समृद्धि स्मार्ट नगरों के विकास के लिए अनिवार्य है, और इसके विपरीत, स्मार्ट नगरों के संसाधन और अवसर ग्रामीण क्षेत्रों को भी सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। इसलिए, ग्रामीण-नगरीय एकीकरण को प्राथमिकता देना आवश्यक है ताकि समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।