प्रश्न का उत्तर अधिकतम 200 शब्दों में दीजिए। यह प्रश्न 11 अंक का है। [MPPSC 2023] फर्स्ट पास्ट द पोस्ट व्यवस्था’ का भारतीय संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से मुझे यह मान्यता है कि यह निष्पक्षता और निर्भीकता को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करता है, बिना किसी अंतर्निहित प्रभाव से प्रभावित होने के। चुनाव आयोग की इस स्वतंत्रता के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र में मुक्त और न्यायसंRead more
भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता
भारत के चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से मुझे यह मान्यता है कि यह निष्पक्षता और निर्भीकता को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करता है, बिना किसी अंतर्निहित प्रभाव से प्रभावित होने के। चुनाव आयोग की इस स्वतंत्रता के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र में मुक्त और न्यायसंगत चुनाव सुनिश्चित किए जाते हैं।
मार्गदर्शक सिद्धान्त
- संवैधानिक स्थिति: भारत के चुनाव आयोग की संवैधानिक स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित है। इसके लिए यह अधिकार और स्वतंत्रता का आधार है।
- निष्पक्षता: चुनाव आयोग को हर पक्ष और उम्मीदवार के लिए समान और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
- पारदर्शिता: चुनाव आयोग को अपने कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है। इससे लोगों में भरोसा बना रहता है।
हाल के उदाहरण
- VVPAT का उपयोग: चुनाव आयोग ने VVPAT मशीनों का उपयोग करके पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत किया।
- डिलीमिटेशन एक्सरसाइज: जम्मू-कश्मीर में डिलीमिटेशन एक्सरसाइज के दौरान चुनाव आयोग ने निष्पक्षता और न्यायसंगतता को मजबूत किया।
- मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का प्रवर्तन: चुनावों के दौरान, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट को सख्ती से पालन करने के माध्यम से चुनाव आयोग ने निष्पक्षता की भावना को सुनिश्चित किया।
इस प्रकार, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करना भारतीय लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था का भारतीय संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन परिचय ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ (FPTP) चुनावी व्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमें चुनावी क्षेत्र में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार जीतता है, भले ही उसे कुल मतों का बहुमत न मिले। भारत में इस व्यवस्था का उपयोग लोकसभा और कईRead more
फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था का भारतीय संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन
परिचय
‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ (FPTP) चुनावी व्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमें चुनावी क्षेत्र में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार जीतता है, भले ही उसे कुल मतों का बहुमत न मिले। भारत में इस व्यवस्था का उपयोग लोकसभा और कई राज्य विधानसभाओं के चुनावों में किया जाता है। इस व्यवस्था का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने के लिए, इसके लाभ और सीमाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
फर्स्ट पास्ट द पोस्ट व्यवस्था की विशेषताएँ
FPTP व्यवस्था की सीमाएँ
वैकल्पिक प्रणाली
निष्कर्ष
‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ व्यवस्था के भारतीय संदर्भ में एक मिश्रित प्रभाव है। जहां यह प्रणाली चुनावी प्रक्रिया को सरल और स्थिर बनाती है, वहीं इसके द्वारा प्रतिनिधित्व की कमी, रणनीतिक मतदान, और सामाजिक विभाजन की समस्याएँ भी उभरती हैं। इन सीमाओं के मद्देनजर, वैकल्पिक चुनावी प्रणालियों की चर्चा और संभावनाएँ विचारणीय हैं, जो भविष्य में अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वात्मक चुनावी परिदृश्य को प्रोत्साहित कर सकती हैं। UPSC Mains उम्मीदवारों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न चुनावी प्रणालियाँ कैसे काम करती हैं और उनके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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