‘दक्कन ट्रैप’ की प्राकृतिक संसाधन-सम्भावनाओं की चर्चा कीजिए। (150 words)[UPSC 2022]
भारत में गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत: सौर ऊर्जा: विवरण: सूरज की किरणों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए सौर पैनल और सौर ताप प्रणाली का उपयोग किया जाता है। महत्व: सौर ऊर्जा अत्यधिक पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि यह नवीकरणीय है और इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। पवन ऊर्जा: विवरण: पवनRead more
भारत में गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत:
- सौर ऊर्जा:
- विवरण: सूरज की किरणों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए सौर पैनल और सौर ताप प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
- महत्व: सौर ऊर्जा अत्यधिक पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि यह नवीकरणीय है और इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता।
- पवन ऊर्जा:
- विवरण: पवन टरबाइन के माध्यम से पवन की गति को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।
- महत्व: यह भी एक नवीकरणीय स्रोत है और वायु प्रदूषण या ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता।
- बायोमास ऊर्जा:
- विवरण: वनस्पति, कृषि अवशेष, और अन्य जैविक पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
- महत्व: यह ऊर्जा स्रोत स्थानीय कचरे को उपयोग में लाकर ऊर्जा प्रदान करता है और वनों की कटाई को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- जल ऊर्जा:
- विवरण: जलाशयों में संग्रहित पानी से हाइड्रोपावर प्लांट्स द्वारा ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
- महत्व: यह ऊर्जा स्रोत स्थिर है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में कम पर्यावरणीय प्रभाव डालता है।
पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा प्रदान करने में इन स्रोतों का महत्व यह है कि ये कार्बन उत्सर्जन को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक हैं।
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प्राथमिक चट्टानें, जिन्हें आग्नेय या इग्नियस चट्टानें भी कहा जाता है, वे चट्टानें हैं जो मैग्मा या लावा के ठोस होने से बनती हैं। इनकी विशेषताएँ और प्रकार निम्नलिखित हैं: विशेषताएँ: रूप: ये चट्टानें अक्सर कणों की संरचना में होते हैं और इनके ठोस होने का समय आग्नेय प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। संघटन:Read more
प्राथमिक चट्टानें, जिन्हें आग्नेय या इग्नियस चट्टानें भी कहा जाता है, वे चट्टानें हैं जो मैग्मा या लावा के ठोस होने से बनती हैं। इनकी विशेषताएँ और प्रकार निम्नलिखित हैं:
विशेषताएँ:
प्रकार:
प्राथमिक चट्टानें पृथ्वी की सतह के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इनकी संरचना से भूगर्भीय प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है।
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