नैतिक दुविधाओं का समाधान करते समय एक लोक अधिकारी को कार्यक्षेत्र के ज्ञान के अलावा नव- परिवर्तनशीलता और उच्च क्रम की रचनात्मकता की भी आवश्यकता होती है। उपयुक्त उदाहरण सहित विवेचन कीजिए। (150 words) [UPSC 2021]
'अन्तःकरण का संकट' का अभिप्राय अन्तःकरण का संकट वह स्थिति है जहाँ किसी व्यक्ति के नैतिक मूल्य और आचार-विचार उसके कार्यों या जिम्मेदारियों से टकराते हैं। यह आंतरिक संघर्ष तब उत्पन्न होता है जब किसी की नैतिकता उसके द्वारा किए जा रहे कार्यों या बाहरी दबावों के साथ मेल नहीं खाती। सार्वजनिक अधिकार क्षेत्Read more
‘अन्तःकरण का संकट’ का अभिप्राय
अन्तःकरण का संकट वह स्थिति है जहाँ किसी व्यक्ति के नैतिक मूल्य और आचार-विचार उसके कार्यों या जिम्मेदारियों से टकराते हैं। यह आंतरिक संघर्ष तब उत्पन्न होता है जब किसी की नैतिकता उसके द्वारा किए जा रहे कार्यों या बाहरी दबावों के साथ मेल नहीं खाती।
सार्वजनिक अधिकार क्षेत्र में अभिव्यक्ति
- विवादास्पद निर्णय: जस्टिस चंद्रचूड़ ने कोरोना महामारी के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने न्यायिक निर्णयों में नैतिक विचार को प्राथमिकता दी, जिससे उनकी व्यक्तिगत आस्थाएँ और न्यायिक कर्तव्य पर एक संघर्ष का सामना करना पड़ा।
- विवादित भ्रष्ट्राचार का खुलासा: विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे मामलों में अधिकारी और न्यायाधीशों को भ्रष्टाचार के खिलाफ नैतिक निर्णय लेने में संकट का सामना करना पड़ा। इन मामलों में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें और सार्वजनिक दबाव ने अधिकारियों को उनके नैतिक कर्तव्यों पर विचार करने पर मजबूर किया।
- सार्वजनिक विरोध और न्याय: दिल्ली दंगे के दौरान, कुछ पुलिस अधिकारियों और नेताओं ने नैतिकता और जिम्मेदारी के बीच संघर्ष का सामना किया। उनके निर्णय और प्रतिक्रियाएँ उनके नैतिक मानकों और जनता की अपेक्षाओं के बीच संघर्ष को दर्शाती हैं।
निष्कर्ष
अन्तःकरण का संकट तब उत्पन्न होता है जब नैतिक मान्यताएँ और बाहरी दबाव टकराते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र में यह संकट निर्णय लेने, भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने, और सार्वजनिक मुद्दों पर नैतिक दृष्टिकोण के माध्यम से स्पष्ट होता है।
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नैतिक दुविधाओं का समाधान: नव-परिवर्तनशीलता और रचनात्मकता की भूमिका कार्यक्षेत्र का ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन नैतिक दुविधाओं का समाधान करते समय नव-परिवर्तनशीलता और रचनात्मकता की भी आवश्यकता होती है। उदाहरण 1: COVID-19 वैक्सीन वितरण COVID-19 महामारी के दौरान वैक्सीन वितरण में नैतिक दुविधाएँ उत्पन्न हRead more
नैतिक दुविधाओं का समाधान: नव-परिवर्तनशीलता और रचनात्मकता की भूमिका
कार्यक्षेत्र का ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन नैतिक दुविधाओं का समाधान करते समय नव-परिवर्तनशीलता और रचनात्मकता की भी आवश्यकता होती है।
उदाहरण 1: COVID-19 वैक्सीन वितरण
COVID-19 महामारी के दौरान वैक्सीन वितरण में नैतिक दुविधाएँ उत्पन्न हुईं। पारंपरिक वितरण प्रणालियाँ समय ले सकती थीं। नव-परिवर्तनशीलता का उदाहरण है भारत का “CoWIN” प्लेटफार्म, जिसने डेटा विश्लेषण और डिजिटल साधनों का उपयोग कर प्राथमिकता आधारित वितरण को संभव बनाया, जिससे तेजी से और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित हुआ।
उदाहरण 2: स्वच्छ भारत मिशन
स्वच्छता अभियान के तहत, कचरे को ऊर्जा में बदलने जैसे रचनात्मक समाधान अपनाए गए। पारंपरिक कचरा प्रबंधन के बजाय, “स्वच्छ भारत मिशन” ने कचरे का पुनः उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन किया, जो न केवल स्वच्छता को बेहतर बनाता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करता है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि नैतिक दुविधाओं का समाधान करने में नव-परिवर्तनशीलता और रचनात्मकता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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