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लोक सेवकों द्वारा सामना की जाने वाली नैतिक दुविधाओं की व्याख्या कीजिये। क्या अंतरात्मा उनके समाधान में सहायक होगी? विवेचना कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2018]
लोक सेवकों द्वारा सामना की जाने वाली नैतिक दुविधाएँ 1. स्वार्थ और पेशेवर दायित्व: लोक सेवक अक्सर स्वार्थ और पेशेवर दायित्व के बीच संतुलन बनाते हैं। उदाहरण के लिए, एक सरकारी अधिकारी को अपने करीबी रिश्तेदार को ठेका दिलाने का दबाव हो सकता है, जिससे उसे व्यक्तिगत निष्ठा और पेशेवर ईमानदारी के बीच चुनाव कRead more
लोक सेवकों द्वारा सामना की जाने वाली नैतिक दुविधाएँ
1. स्वार्थ और पेशेवर दायित्व: लोक सेवक अक्सर स्वार्थ और पेशेवर दायित्व के बीच संतुलन बनाते हैं। उदाहरण के लिए, एक सरकारी अधिकारी को अपने करीबी रिश्तेदार को ठेका दिलाने का दबाव हो सकता है, जिससे उसे व्यक्तिगत निष्ठा और पेशेवर ईमानदारी के बीच चुनाव करना पड़ता है।
2. भ्रष्टाचार: भ्रष्टाचार की誘惑 एक प्रमुख नैतिक दुविधा है। लोक सेवक को रिश्वत या अन्य प्रलोभनों का सामना करना पड़ सकता है। अमृतसर में कोरोना के दौरान सरकारी राशन वितरण में भ्रष्टाचार का मामला इसका एक उदाहरण है, जहाँ अधिकारियों ने गलत तरीके से लाभ उठाया।
3. सूचना का खुलासा: अधिकारियों को विसलब्लोइंग (सूचना का खुलासा) करने के लिए दवाब महसूस हो सकता है, जो उनके करियर और सुरक्षा को जोखिम में डाल सकता है। सत्येंद्र दुबे का मामला एक ज्वलंत उदाहरण है, जिन्होंने सड़क निर्माण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर किया और उनकी हत्या कर दी गई।
4. सार्वजनिक हित और नीतिगत प्रतिबंध: लोक सेवक को सार्वजनिक हित और नीतिगत प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। कोविड-19 महामारी के दौरान, अधिकारियों ने लॉकडाउन के कड़े नियमों और आर्थिक प्रभावों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की।
अंतरात्मा की भूमिका
1. नैतिक दिशा: अंतरात्मा एक आंतरिक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है, जो लोक सेवकों को नैतिक निर्णय लेने में मदद करती है। एक अधिकारी जो ईमानदारी और कर्तव्य की भावना से प्रेरित होता है, वह भ्रष्टाचार और स्वार्थ के दबाव को अस्वीकार कर सकता है।
2. नैतिक साहस: अंतरात्मा नैतिक साहस प्रदान करती है, जिससे लोक सेवक कठिन निर्णय ले सकते हैं और अनैतिक प्रथाओं के खिलाफ खड़े हो सकते हैं। फ्रांसिस हॉगन के फेसबुक का खुलासा इसका उदाहरण है, जहाँ उन्होंने सार्वजनिक भलाई के लिए व्यक्तिगत जोखिम उठाया।
3. जिम्मेदारी और पारदर्शिता: अंतरात्मा जिम्मेदारी और पारदर्शिता को सुदृढ़ करती है, जिससे लोक सेवक अपने कार्यों में नैतिक मानकों को बनाए रख सकते हैं। आईएएस अधिकारियों के लिए आचार संहिता की तरह, यह आंतरिक नैतिक कम्पास सरकारी नैतिकता की रक्षा में मदद करता है।
इस प्रकार, लोक सेवकों द्वारा सामना की जाने वाली नैतिक दुविधाएँ जटिल हो सकती हैं, लेकिन अंतरात्मा इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, नैतिकता, साहस, और जिम्मेदारी को बढ़ावा देती है।
See lessसिविल सेवा के संदर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिये। a. पारदर्शकता b. जवाबदेही c. दृढ़ विश्वास का सहास (125 Words) [UPPSC 2019]
सिविल सेवा के संदर्भ में पारदर्शकता, जवाबदेही और दृढ़ विश्वास का साहस की प्रासंगिकता a. पारदर्शकता: पारदर्शकता से सरकारी कार्यों में विश्वास और जिम्मेदारी बढ़ती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने शासन में पारदर्शी नीतियों को अपनाया है, जैसे कि "ऑल इंडिया सर्विसेज ट्रांसपेरेंसी पोर्टल"Read more
सिविल सेवा के संदर्भ में पारदर्शकता, जवाबदेही और दृढ़ विश्वास का साहस की प्रासंगिकता
a. पारदर्शकता: पारदर्शकता से सरकारी कार्यों में विश्वास और जिम्मेदारी बढ़ती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने शासन में पारदर्शी नीतियों को अपनाया है, जैसे कि “ऑल इंडिया सर्विसेज ट्रांसपेरेंसी पोर्टल” जिससे नागरिक सीधे प्रशासनिक फैसलों की निगरानी कर सकते हैं।
b. जवाबदेही: जवाबदेही सरकारी कर्मियों को उनकी कार्यप्रणाली के प्रति उत्तरदायी बनाती है। IAS अधिकारी अनूप सक्सेना, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए, ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया, जिससे व्यवस्था में सुधार हुआ।
c. दृढ़ विश्वास का साहस: दृढ़ विश्वास का साहस असामान्य परिस्थितियों में नैतिकता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। IAS अधिकारी डॉ. शाह फैसल ने सरकारी प्रणाली में सुधार के लिए त्याग किया और सामाजिक न्याय के लिए अपनी आवाज उठाई, जिससे स्पष्ट होता है कि दृढ़ विश्वास और साहस से अस्थिर परिस्थितियों में भी नैतिकता को बनाए रखा जा सकता है।
निष्कर्ष: पारदर्शकता, जवाबदेही, और दृढ़ विश्वास का साहस सिविल सेवाओं में सुधार और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। इन सिद्धांतों को अपनाने से शासन प्रणाली में विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ती है।
See lessसार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत क्या हैं? क्या वे सिविल के लिये आचार संहिता हैं? मूल्यांकन कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2019]
सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत और सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता 1. सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत, जो नोलेन कमेटी द्वारा परिभाषित किए गए थे, निम्नलिखित हैं: 1. स्वार्थहीनता (Selflessness): सार्वजनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत लाभ के बजाय केवल जनहित में कार्य करना चाहिए।Read more
सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत और सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता
1. सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत
सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत, जो नोलेन कमेटी द्वारा परिभाषित किए गए थे, निम्नलिखित हैं:
1. स्वार्थहीनता (Selflessness): सार्वजनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत लाभ के बजाय केवल जनहित में कार्य करना चाहिए। उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में भारत में विभिन्न नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जैसे कि 2021 में विभिन्न नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप।
2. ईमानदारी (Integrity): अधिकारियों को ईमानदारी से कार्य करना चाहिए और उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखना चाहिए। हाल ही में, 2023 में एक प्रमुख भारतीय अधिकारी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसने ईमानदारी के महत्व को उजागर किया।
3. वस्तुनिष्ठता (Objectivity): निर्णय merit और प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए, व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों के आधार पर नहीं। उदाहरण के लिए, सरकारी नौकरी में भर्ती के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं का होना आवश्यक है।
4. जवाबदेही (Accountability): सार्वजनिक अधिकारी अपनी कार्रवाइयों और निर्णयों के लिए उत्तरदायी होने चाहिए। भारत में कोविड-19 राहत कोष के प्रबंधन पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास इसे दर्शाते हैं।
5. खुलापन (Openness): अधिकारियों को अपने निर्णय और कार्यों के बारे में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, जो भारत में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, इसी सिद्धांत को लागू करता है।
6. ईमानदारी (Honesty): सार्वजनिक अधिकारियों को धोखाधड़ी और गलत प्रतिनिधित्व से बचना चाहिए। यह सिद्धांत उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग होता है।
7. नेतृत्व (Leadership): अधिकारियों को नैतिक व्यवहार का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए और नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। प्रभावी नेता अपने कार्यों से विश्वास और आदर्श स्थापित करते हैं।
2. आचार संहिता के रूप में मूल्यांकन
सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता: ये सिद्धांत सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता के रूप में काम करते हैं, जैसे कि भारतीय सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता और अन्य वैश्विक संहिताएं। ये सिद्धांत अधिकारियों को स्वार्थहीनता, ईमानदारी, और जवाबदेही के उच्च मानकों का पालन करने का निर्देश देते हैं।
वास्तविक अनुप्रयोग: हालांकि, इन सिद्धांतों के अनुप्रयोग में चुनौतियाँ होती हैं, जैसे कि भ्रष्टाचार और ब्यूरोक्रेटिक अड़चनें। उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में विभिन्न भ्रष्टाचार विरोधी पहल और सुधार कार्यक्रमों ने इन सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रयास किए हैं।
निष्कर्ष: सार्वजनिक जीवन के सात सिद्धांत सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता के रूप में कार्य करते हैं, जो उनके नैतिक और पेशेवर आचरण को दिशा प्रदान करते हैं। इन सिद्धांतों का सही ढंग से पालन कर के ही अच्छी शासन व्यवस्था और जनविश्वास को बढ़ावा दिया जा सकता है।
See less"केवल कानून का अनुपालन ही काफ़ी नहीं है, लोक सेवक में, अपने कर्तव्यों के प्रभावी पालन करने के लिए, नैतिक मुद्दों पर एक सुविकसित संवेदन-शक्ति का होना भी आवश्यक है।" क्या आप सहमत हैं? दो उदाहरणों की सहायता से स्पष्ट कीजिए, जहाँ (ⅰ) कृत्य नैतिकतः सही है, परंतु वैध रूप से सही नहीं है तथा (ii) कृत्य वैध रूप से सही है, परंतु नैतिकतः सही नहीं है। (150 words) [UPSC 2015]
नैतिकता और कानून का अनुपालन सहमत हूँ, क्योंकि लोक सेवकों को केवल कानून का अनुपालन करने के अलावा, नैतिक संवेदनशीलता भी बनाए रखनी चाहिए। (i) कृत्य नैतिकतः सही परंतु वैध रूप से सही नहीं: उदाहरण: फरवरी 2023 में एक सरकारी अधिकारी ने एक गरीब व्यक्ति की सहायता करने के लिए सरकारी नियमों के खिलाफ जाकर व्यक्तRead more
नैतिकता और कानून का अनुपालन
सहमत हूँ, क्योंकि लोक सेवकों को केवल कानून का अनुपालन करने के अलावा, नैतिक संवेदनशीलता भी बनाए रखनी चाहिए।
(i) कृत्य नैतिकतः सही परंतु वैध रूप से सही नहीं: उदाहरण: फरवरी 2023 में एक सरकारी अधिकारी ने एक गरीब व्यक्ति की सहायता करने के लिए सरकारी नियमों के खिलाफ जाकर व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहायता प्रदान की। यह कृत्य नैतिक दृष्टि से सही था, क्योंकि इससे जरूरतमंद की मदद हुई, लेकिन यह कानून की दृष्टि से गलत था, क्योंकि सरकारी फंड का उपयोग नियमों के अनुसार नहीं किया गया।
(ii) कृत्य वैध रूप से सही परंतु नैतिकतः सही नहीं: उदाहरण: 2024 में एक कंपनी ने स्थानीय निवासियों की भलाई के लिए एक प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन इसके लिए उन्होंने आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति नहीं ली। यहाँ कंपनी ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया, लेकिन इसने पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाला, जो नैतिक दृष्टि से गलत था।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि नैतिकता और कानून का अनुपालन दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
See lessअन्तरात्मा की आवाज' से आप क्या समझते हैं? लोक सेवकों के कर्तव्य निर्वहन में यह किस प्रकार मदद करता है? (125 Words) [UPPSC 2022]
'अंतरात्मा की आवाज' और लोक सेवकों के कर्तव्य निर्वहन में इसका महत्व अंतरात्मा की आवाज की परिभाषा: 'अंतरात्मा की आवाज' का तात्पर्य है आंतरिक नैतिक भावना जो व्यक्ति को सही और गलत के बीच भेद करने में मार्गदर्शन करती है। यह एक नैतिक जिम्मेदारी का अहसास होता है जो निर्णय-निर्माण और क्रियावली को प्रभावितRead more
‘अंतरात्मा की आवाज’ और लोक सेवकों के कर्तव्य निर्वहन में इसका महत्व
अंतरात्मा की आवाज की परिभाषा: ‘अंतरात्मा की आवाज’ का तात्पर्य है आंतरिक नैतिक भावना जो व्यक्ति को सही और गलत के बीच भेद करने में मार्गदर्शन करती है। यह एक नैतिक जिम्मेदारी का अहसास होता है जो निर्णय-निर्माण और क्रियावली को प्रभावित करता है।
लोक सेवकों के कर्तव्य निर्वहन में मदद:
निष्कर्ष: अंतरात्मा की आवाज लोक सेवकों को अपनी नैतिकता और सार्वजनिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध बनाए रखती है, जिससे अधिक प्रभावी और नैतिक शासन सुनिश्चित होता है।
See lessऐसी अवांछनीय अभिवृत्तियों को कैसे बदला जा सकता है तथा लोक सेवाओं के लिए आवश्यक समझे जाने वाले सामाजिक-नैतिक मूल्यों को आकांक्षी तथा कार्यरत लोक सेवकों में किस प्रकार संवर्धित किया जा सकता है ? (150 words) [UPSC 2016]
अवांछनीय अभिवृत्तियों को बदलने और सामाजिक-नैतिक मूल्यों को संवर्धित करने की विधियाँ 1. समग्र प्रशिक्षण और शिक्षा नैतिकता और मूल्य शिक्षा: लोक सेवकों को नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर आधारित व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। हाल ही में IAS प्रशिक्षण में "लोक प्रशासन में नैतिकता" जैसे पाठ्यक्रमRead more
अवांछनीय अभिवृत्तियों को बदलने और सामाजिक-नैतिक मूल्यों को संवर्धित करने की विधियाँ
1. समग्र प्रशिक्षण और शिक्षा
नैतिकता और मूल्य शिक्षा: लोक सेवकों को नैतिकता और सामाजिक मूल्यों पर आधारित व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए। हाल ही में IAS प्रशिक्षण में “लोक प्रशासन में नैतिकता” जैसे पाठ्यक्रम इसका अच्छा उदाहरण हैं।
2. निरंतर आत्ममूल्यांकन और जागरूकता
नियमित कार्यशालाएँ और सेमिनार: समय-समय पर कार्यशालाएँ और सेमिनार आयोजित किए जाएँ, जो सामाजिक मुद्दों और नैतिक प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे, लिंग संवेदनशीलता और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यशालाएँ।
3. सशक्त संस्थागत ढाँचा
आचार संहिता और उत्तरदायित्व: कठोर आचार संहिता लागू करें और नियमित निगरानी के माध्यम से उत्तरदायित्व सुनिश्चित करें। केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा किए गए निगरानी उदाहरण स्वरूप हैं।
4. नेतृत्व और आदर्श उदाहरण
नेतृत्व द्वारा उदाहरण: वरिष्ठ अधिकारी नैतिक व्यवहार और सार्वजनिक सेवा के मूल्यों का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें। हाल ही में, ईमानदारी और पारदर्शिता के लिए मान्यता प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों के मामले प्रभावी आदर्श हैं।
इन उपायों के माध्यम से, लोक सेवकों में आवश्यक सामाजिक-नैतिक मूल्यों को प्रभावी ढंग से संवर्धित किया जा सकता है।
See lessक्या कारण है कि निष्पक्षता और अपक्षपातीयता को लोक सेवाओं में, विशेषकर वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में, आधारभूत मूल्य समझना चाहिए ? अपने उत्तर को उदाहरणों के साथ सुस्पष्ट कीजिए । (150 words) [UPSC 2016]
लोक सेवाओं में निष्पक्षता और अपक्षपातीयता का महत्व 1. न्याय और समानता सुनिश्चित करना: व्याख्या: निष्पक्षता और अपक्षपातीयता यह सुनिश्चित करती है कि सभी नागरिकों को समान सेवाएँ और अवसर प्राप्त हों, बिना किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक पूर्वाग्रह के। उदाहरण: भारत निर्वाचन आयोग निष्पक्षता से चुनाव करवाता है,Read more
लोक सेवाओं में निष्पक्षता और अपक्षपातीयता का महत्व
1. न्याय और समानता सुनिश्चित करना:
2. जनसामान्य का विश्वास बनाए रखना:
3. शक्ति के दुरुपयोग को रोकना:
4. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना:
निष्कर्ष: निष्पक्षता और अपक्षपातीयता लोक सेवाओं में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये न्याय, विश्वास, पारदर्शिता, और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में सहायता करती हैं।
See lessसिविल सेवा के संदर्भ में निम्नलिखित की प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए: (a) पारदर्शिता (b) जवाबदेही (c) निष्पक्षता तथा न्याय (d) दृढ़ विश्वास का साहस (e) सेवा भाव (150 words) [UPSC 2017]
सिविल सेवा के संदर्भ में मूल्यों की प्रासंगिकता (a) पारदर्शिता: प्रासंगिकता: पारदर्शिता सरकारी कार्यों और निर्णयों को जनता के सामने स्पष्ट बनाती है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है और जनता का विश्वास बढ़ता है। उदाहरण: भारत में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, जिससे नागरिRead more
सिविल सेवा के संदर्भ में मूल्यों की प्रासंगिकता
(a) पारदर्शिता:
(b) जवाबदेही:
(c) निष्पक्षता तथा न्याय:
(d) दृढ़ विश्वास का साहस:
(e) सेवा भाव:
निष्कर्ष: ये मूल्य सिविल सेवा की प्रभावशीलता और नैतिकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे शासन की गुणवत्ता और सार्वजनिक विश्वास मजबूत होता है।
See lessलोक सेवकों के लिये आवश्यक बुनियादी मूल्यों को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2020]
लोक सेवकों के लिए आवश्यक बुनियादी मूल्य 1. ईमानदारी: ईमानदारी लोक सेवकों के कार्यों की सत्यता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है। यह भ्रष्टाचार और अनैतिक प्रथाओं को रोकने में महत्वपूर्ण है। हाल ही में, मुख्यमंत्रियों के लिए चलाए गए एंटी-करप्शन ड्राइव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, जो ईमRead more
लोक सेवकों के लिए आवश्यक बुनियादी मूल्य
1. ईमानदारी: ईमानदारी लोक सेवकों के कार्यों की सत्यता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है। यह भ्रष्टाचार और अनैतिक प्रथाओं को रोकने में महत्वपूर्ण है। हाल ही में, मुख्यमंत्रियों के लिए चलाए गए एंटी-करप्शन ड्राइव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, जो ईमानदारी के महत्व को दर्शाता है।
2. उत्तरदायित्व: लोक सेवकों को अपने कार्यों और निर्णयों के लिए उत्तरदायी होना चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन में, अधिकारियों ने सार्वजनिक स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की, जिससे मिशन की सफलता सुनिश्चित हो सकी।
3. निष्पक्षता: निष्पक्षता का मतलब है सभी को समान अवसर प्रदान करना और भेदभाव से बचना। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और मिशन इंद्रधनुष जैसे कार्यक्रमों में, अधिकारियों ने सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना समान सेवाएं प्रदान कीं।
4. सेवा भाव: सेवा भाव का तात्पर्य है जनता के कल्याण और सभी वर्गों के लिए योगदान करना। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और पिछड़े वर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया, जो सेवा भाव की उत्कृष्ट मिसाल है।
5. पेशेवरता: पेशेवरता में कार्य की उच्च गुणवत्ता और मानक बनाए रखना शामिल है। कोविड-19 महामारी के दौरान, स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रोफेशनल व्यवहार के साथ काम किया, जिससे संकट का प्रभाव कम हुआ और सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हुईं।
निष्कर्ष: ईमानदारी, उत्तरदायित्व, निष्पक्षता, सेवा भाव, और पेशेवरता लोक सेवकों के लिए बुनियादी मूल्य हैं जो प्रभावी प्रशासन और जनता के विश्वास को बनाए रखने में मदद करते हैं। इन मूल्यों का पालन करके, लोक सेवक समाज की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को सही तरीके से पूरा कर सकते हैं।
See lessगीता का 'अनासक्त योग' क्या है? सिविल सेवकों के लिये यह क्या संदेश देता है? व्याख्या कीजिये। (200 Words) [UPPSC 2020]
अनासक्त योग' भगवद गीता के चतुर्थ अध्याय में वर्णित एक महत्वपूर्ण योग है, जो कर्मों को बिना किसी व्यक्तिगत आशक्ति के करने की कला को दर्शाता है। इसमें क्रियाशीलता को केवल अपने कर्तव्यों के निर्वहन के रूप में देखा जाता है, बिना किसी परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत असफलता और सफलता दोनों पर समान दृष्टिकRead more
अनासक्त योग’ भगवद गीता के चतुर्थ अध्याय में वर्णित एक महत्वपूर्ण योग है, जो कर्मों को बिना किसी व्यक्तिगत आशक्ति के करने की कला को दर्शाता है। इसमें क्रियाशीलता को केवल अपने कर्तव्यों के निर्वहन के रूप में देखा जाता है, बिना किसी परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत असफलता और सफलता दोनों पर समान दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह देता है।
सिविल सेवकों के लिए संदेश:
निष्कर्ष: ‘अनासक्त योग’ सिविल सेवकों को अपनी कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण से करने की सलाह देता है, बिना परिणाम की चिंता किए। यह सिद्धांत धैर्य, संतुलन, और प्रोफेशनलिज़्म बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है, जो सरकारी कार्यों में सच्ची सेवा और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करता है।
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