सिक्किम भारत में प्रथम ‘जैविक राज्य’ है। जैविक राज्य के पारिस्थितिक एवं आर्थिक लाभ क्या-क्या होते हैं? (150 words) [UPSC 2018]
फेंके गए ठोस कचरे का निस्तारण करने में बाधाएँ: **1. अपर्याप्त अवसंरचना: प्रबंधन सुविधाओं की कमी: कई क्षेत्रों में कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण के लिए आवश्यक अवसंरचना का अभाव है। उदाहरण के लिए, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में अपर्याप्त कचरा प्रबंधन प्रणाली के कारण कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहRead more
फेंके गए ठोस कचरे का निस्तारण करने में बाधाएँ:
**1. अपर्याप्त अवसंरचना:
- प्रबंधन सुविधाओं की कमी: कई क्षेत्रों में कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण के लिए आवश्यक अवसंरचना का अभाव है। उदाहरण के लिए, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में अपर्याप्त कचरा प्रबंधन प्रणाली के कारण कचरे का सही तरीके से निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
**2. कचरे का मिश्रण:
- अप्रभावी पृथक्करण: स्रोत पर कचरे का सही पृथक्करण न होने से पुनर्चक्रण और उपचार की प्रक्रियाएँ कठिन हो जाती हैं। मिश्रित कचरा पुनर्चक्रण में बाधा डालता है और लैंडफिल्स पर भार बढ़ाता है।
**3. बढ़ती कचरा उत्पादन:
- तेज़ शहरीकरण: शहरीकरण और बढ़ती खपत के कारण कचरा उत्पादन की दर में वृद्धि हो रही है, जो मौजूदा प्रबंधन प्रणाली की क्षमता से अधिक है।
जहरीले अपशिष्टों को सुरक्षित रूप से हटाने के उपाय:
**1. सही उपचार विधियाँ:
- उन्नत प्रौद्योगिकियाँ: उच्च तापमान पर दहन और सुरक्षित लैंडफिलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, जयपुर में हानिकारक कचरा उपचार सुविधा उच्च तापमान पर दहन तकनीक का उपयोग करती है।
**2. कानूनी ढांचा:
- कठोर नियम: हानिकारक अपशिष्टों के प्रबंधन, भंडारण और निस्तारण पर कड़े नियम लागू करें। भारत में, 2016 के हानिकारक अपशिष्ट प्रबंधन नियम सुरक्षित निस्तारण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं।
**3. जन जागरूकता और भागीदारी:
- सार्वजनिक शिक्षा: कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण प्रथाओं के बारे में जनता को शिक्षित करना। स्वच्छ भारत मिशन जैसे पहल नागरिकों को स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
इन बाधाओं को दूर करने और प्रभावी प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने से ठोस और जहरीले कचरे के पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सकता है।
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वैश्विक समुद्र स्तर में 2100 ईस्वी तक एक मीटर की वृद्धि के प्रभाव भारत पर प्रभाव: तटीय कटाव और भूमि हानि: समुद्र स्तर की वृद्धि भारत के तटीय क्षेत्रों में कटाव को बढ़ाएगी, जिससे महत्वपूर्ण भूमि का नुकसान होगा। मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े तटीय शहरों को खासा खतरा होगा। हाल की मुंबई बाढ़ (2023) ने दिखायाRead more
वैश्विक समुद्र स्तर में 2100 ईस्वी तक एक मीटर की वृद्धि के प्रभाव
भारत पर प्रभाव:
हिन्द महासागर क्षेत्र पर प्रभाव:
हाल की पहल:
भारत ने राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC) की शुरुआत की है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करता है। मालदीव और अन्य द्वीपीय देशों ने तटीय सुरक्षा परियोजनाओं और पुनर्स्थापन योजनाओं पर काम किया है ताकि समुद्र स्तर वृद्धि के प्रभावों को कम किया जा सके।
संक्षेप में, 2100 तक एक मीटर समुद्र स्तर की वृद्धि भारत और हिन्द महासागर क्षेत्र में तटीय कटाव, बाढ़, जनसंख्या विस्थापन, और आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों को बढ़ा सकती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी अनुकूलन और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
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