Lost your password? Please enter your email address. You will receive a link and will create a new password via email.
Please briefly explain why you feel this question should be reported.
Please briefly explain why you feel this answer should be reported.
Please briefly explain why you feel this user should be reported.
By giving the basis of your classification, divide Uttarakhand Himalaya in to macro physiographic regions and illustrate geomorphic characterstics of each region. [Answer Limit: 250 words] [UKPSC 2012]
The Uttarakhand Himalaya can be divided into macro physiographic regions based on elevation, topography, and geological features. The classification includes: 1. High Mountain Region Geomorphic Characteristics: This region includes the highest peaks, such as Nanda Devi and Kamet, with elevations excRead more
The Uttarakhand Himalaya can be divided into macro physiographic regions based on elevation, topography, and geological features. The classification includes:
1. High Mountain Region
2. Sub-Montane Region
3. River Valleys
4. Plateau Region
These regions collectively represent the diverse geomorphic characteristics of the Uttarakhand Himalaya, contributing to its ecological and cultural significance.
See lessवर्गीकरण का आधार देते हुए, उत्तराखण्ड हिमालय को बृहत भौतिक प्रदेशों में विभाजित कीजिये एवं प्रत्येक प्रदेश के भू-आकृतिक लक्षणों को स्पष्ट कीजिये। [उत्तर सीमा: 250 शब्द] [UKPSC 2012]
उत्तराखण्ड हिमालय को बृहत भौतिक प्रदेशों में निम्नलिखित वर्गीकरण के आधार पर विभाजित किया जा सकता है: 1. उच्च पर्वतीय प्रदेश (High Mountain Region): भू-आकृतिक लक्षण: इस प्रदेश में मुख्यतः हिमालय की ऊँची चोटियाँ, जैसे कि नंदा देवी और केदारनाथ, शामिल हैं। यहाँ की ऊँचाई 3000 मीटर से अधिक है। गहरी घाटियाRead more
उत्तराखण्ड हिमालय को बृहत भौतिक प्रदेशों में निम्नलिखित वर्गीकरण के आधार पर विभाजित किया जा सकता है:
1. उच्च पर्वतीय प्रदेश (High Mountain Region):
See lessभू-आकृतिक लक्षण: इस प्रदेश में मुख्यतः हिमालय की ऊँची चोटियाँ, जैसे कि नंदा देवी और केदारनाथ, शामिल हैं। यहाँ की ऊँचाई 3000 मीटर से अधिक है। गहरी घाटियाँ और खड़ी ढलानें इस क्षेत्र की पहचान हैं। ग्लेशियरों, बर्फीली धाराओं और उच्च पठारी क्षेत्रों का प्रचलन है।
2. पार्वतीय मैदान (Mountain Foothills):
भू-आकृतिक लक्षण: इस क्षेत्र में पर्वतों के तलहटी के निकट स्थित मैदान होते हैं। यहाँ की ऊँचाई 600 से 1500 मीटर के बीच होती है। यह क्षेत्र नदी घाटियों, ढलानों और छोटे पहाड़ी क्षेत्रों से भरा है। यहां की मिट्टी उपजाऊ होती है, जो कृषि के लिए अनुकूल है।
3. नदी घाटियाँ (River Valleys):
भू-आकृतिक लक्षण: प्रमुख नदियों, जैसे कि गंगा, यमुना और भागीरथी, द्वारा निर्मित घाटियाँ। इन घाटियों में गहरी खाइयाँ और विस्तृत तटीय क्षेत्र होते हैं। यह क्षेत्र कृषि और बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण है।
4. पठारी क्षेत्र (Plateau Region):
भू-आकृतिक लक्षण: उत्तराखण्ड के कुछ हिस्सों में विस्तृत पठार मौजूद हैं, जैसे कि नैनीताल और अल्मोड़ा। ये क्षेत्र औसत ऊँचाई पर होते हैं और घने जंगलों और जलस्रोतों से भरे होते हैं।
इन भौतिक प्रदेशों की विशिष्ट भू-आकृतिक विशेषताएँ न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाती हैं, बल्कि पर्यावरणीय विविधता और कृषि विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Throw light on the localization, growth and production of Cotton-Textile Industry in India. [Answer Limit: 250 words] [UKPSC 2012]
The cotton-textile industry in India is one of the oldest and most significant sectors, characterized by its localization, growth, and production dynamics. Localization: The industry primarily developed in regions conducive to cotton cultivation and proximity to water sources. Key centers include: GRead more
The cotton-textile industry in India is one of the oldest and most significant sectors, characterized by its localization, growth, and production dynamics.
Localization:
The industry primarily developed in regions conducive to cotton cultivation and proximity to water sources. Key centers include:
These regions benefited from favorable climatic conditions for cotton farming and a historical presence of weaving communities.
Growth:
The growth of the cotton-textile industry has been influenced by several factors:
Production:
The cotton-textile industry in India produces a wide range of products, including yarn, fabrics, and finished garments. It is not only vital for domestic consumption but also plays a crucial role in exports, contributing significantly to the country’s economy.
In summary, the localization, growth, and production of the cotton-textile industry reflect its importance in India’s industrial landscape, providing employment and fostering economic development while facing challenges like competition and sustainability.
See lessभारत में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीकरण, विकास एवं उत्पादन पर प्रकाश डालिये। [उत्तर सीमा: 250 शब्द] [UKPSC 2012]
भारत में सूती वस्त्र उद्योग एक प्राचीन और महत्वपूर्ण उद्योग है, जिसका स्थानीकरण, विकास और उत्पादन कई कारकों से प्रभावित हुआ है। स्थानीकरण: भारत में सूती वस्त्र उद्योग का स्थानीकरण मुख्यतः गंगा और यमुना घाटियों के आसपास हुआ, जहां कपास की खेती पारंपरिक रूप से की जाती थी। ब्रिटिश शासन के दौरान, इस उद्यRead more
भारत में सूती वस्त्र उद्योग एक प्राचीन और महत्वपूर्ण उद्योग है, जिसका स्थानीकरण, विकास और उत्पादन कई कारकों से प्रभावित हुआ है।
स्थानीकरण:
भारत में सूती वस्त्र उद्योग का स्थानीकरण मुख्यतः गंगा और यमुना घाटियों के आसपास हुआ, जहां कपास की खेती पारंपरिक रूप से की जाती थी। ब्रिटिश शासन के दौरान, इस उद्योग को औपनिवेशिक नीतियों के तहत संगठित किया गया। प्रमुख केंद्र जैसे अहमदाबाद, मुंबई, कोलकाता और सूरत ने उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विकास:
सूती वस्त्र उद्योग का विकास कई कारणों से हुआ है:
कपास की उपलब्धता: भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, जिससे कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति होती है।
कौशल श्रम: इस क्षेत्र में कारीगरों और श्रमिकों का एक बड़ा समूह उपलब्ध है, जो उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार करने में सक्षम है।
तकनीकी प्रगति: 20वीं सदी के मध्य में मशीनों और प्रौद्योगिकी में सुधार ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई।
उत्पादन:
भारत में सूती वस्त्र उद्योग का उत्पादन विभिन्न प्रकार के वस्त्रों में होता है, जैसे सूती कपड़े, साड़ी, टॉप्स, और अन्य परिधान। भारत का सूती वस्त्र उद्योग निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी है।
हालांकि, इस उद्योग को चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है, जैसे कि पानी की कमी, बिजली की समस्या और आधुनिक तकनीक का अभाव। लेकिन सही नीतियों और निवेश के माध्यम से इसे और विकसित किया जा सकता है।
इस प्रकार, सूती वस्त्र उद्योग भारत की आर्थिक संरचना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
See lessIndian farmer gambles with the monsoon.' Explain this statement. [Answer Limit: 250 words] [UKPSC 2012]
The statement "Indian farmer gambles with the monsoon" reflects the precarious dependence of Indian agriculture on the seasonal rainfall patterns, particularly the monsoon. This reliance creates significant risks for farmers due to several factors: Weather Dependence: Approximately 60% of India’s agRead more
The statement “Indian farmer gambles with the monsoon” reflects the precarious dependence of Indian agriculture on the seasonal rainfall patterns, particularly the monsoon. This reliance creates significant risks for farmers due to several factors:
In summary, Indian farmers’ dependence on the monsoon illustrates a high-stakes gamble, where the outcomes of their decisions directly influence their economic stability and livelihoods. Addressing these challenges requires improved agricultural practices, better irrigation facilities, and climate-resilient crops to mitigate the risks associated with monsoon variability.
See less'भारत के कृषक मानसून से जुआ खेलते हैं।' इस कथन का परीक्षण कीजिये। [उत्तर सीमा: 250 शब्द] [UKPSC 2012]
"भारत के कृषक मानसून से जुआ खेलते हैं" इस कथन का परीक्षण कई दृष्टिकोणों से किया जा सकता है। भारत की कृषि मुख्यतः मानसून पर निर्भर है, और इस मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए एक बड़ा जोखिम है। जलवायु पर निर्भरता: भारतीय कृषि का लगभग 60% क्षेत्र बारिश पर निर्भर करता है। यदि मानसून समय पर या पर्याप्त मRead more
“भारत के कृषक मानसून से जुआ खेलते हैं” इस कथन का परीक्षण कई दृष्टिकोणों से किया जा सकता है।
भारत की कृषि मुख्यतः मानसून पर निर्भर है, और इस मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए एक बड़ा जोखिम है।
जलवायु पर निर्भरता: भारतीय कृषि का लगभग 60% क्षेत्र बारिश पर निर्भर करता है। यदि मानसून समय पर या पर्याप्त मात्रा में नहीं आता है, तो फसल उत्पादन प्रभावित होता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
फसल चयन और जोखिम: किसान अक्सर उन फसलों का चयन करते हैं जो मानसून की स्थिति के अनुसार हों। अगर मानसून की भविष्यवाणी गलत होती है, तो यह निर्णय अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है, जिससे फसलें खराब हो सकती हैं।
आर्थिक असुरक्षा: वर्षा की अनियमितता के कारण किसान कर्ज में डूब जाते हैं। कई किसान ऋण लेकर अधिक उत्पादन करने की कोशिश करते हैं, लेकिन असफलता की स्थिति में उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
संवेदनशीलता और अनिश्चितता: खेती में जलवायु परिवर्तन और मौसमी पैटर्न के बदलाव भी किसानों की स्थिति को और अधिक असुरक्षित बनाते हैं।
इस प्रकार, यह कथन सही प्रतीत होता है कि भारतीय कृषक मानसून के साथ एक प्रकार का जुआ खेलते हैं। मानसून की अनिश्चितता उनके जीवन और आजीविका पर गहरा प्रभाव डालती है, जिससे उन्हें लगातार जोखिमों का सामना करना पड़ता है। किसानों की यह स्थिति इस बात का संकेत है कि कृषि में समुचित प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता है।
See less'India is a rich country inhabited by the poors." Explain. [Answer Limit: 250 words] [UKPSC 2012]
India is often described as a rich country due to its vast natural resources, cultural heritage, and significant economic potential. However, a considerable portion of its population lives in poverty. This paradox can be explained through several factors: Economic Inequality: Despite impressive econRead more
India is often described as a rich country due to its vast natural resources, cultural heritage, and significant economic potential. However, a considerable portion of its population lives in poverty. This paradox can be explained through several factors:
In summary, while India possesses immense wealth and resources, systemic issues such as inequality, lack of education, and political challenges contribute to the persistence of poverty among its citizens. This contradiction highlights the need for inclusive policies and sustainable development to uplift the marginalized sections of society.
See lessभारत धनी देश है, किन्तु यहाँ के निवासी निर्धन हैं।' व्याख्या कीजिये। [उत्तर सीमा: 250 शब्द] [UKPSC 2012]
भारत एक समृद्ध देश है, जिसमें अपार प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक धरोहर और विविधता है। फिर भी, यहां की अधिकांश जनसंख्या आर्थिक रूप से निर्धन है। इस विषमता के कई कारण हैं: आर्थिक असमानता: भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, इसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक नहीं पहुंचा है। अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बRead more
भारत एक समृद्ध देश है, जिसमें अपार प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक धरोहर और विविधता है। फिर भी, यहां की अधिकांश जनसंख्या आर्थिक रूप से निर्धन है। इस विषमता के कई कारण हैं:
आर्थिक असमानता: भारत की आर्थिक वृद्धि के बावजूद, इसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक नहीं पहुंचा है। अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ती जा रही है।
श्रम बाजार की स्थिति: बहुत से लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जहां आय कम और सुरक्षा की कमी होती है। उचित रोजगार के अवसरों का अभाव भी एक कारण है।
शिक्षा और कौशल विकास: शिक्षा का स्तर और व्यावसायिक प्रशिक्षण की कमी से लोगों को अच्छी नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल नहीं मिल पाता। इससे बेरोजगारी और निर्धनता बढ़ती है।
कृषि पर निर्भरता: भारत की बड़ी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, लेकिन खेती की स्थिति कमजोर है। सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ किसानों को प्रभावित करती हैं, जिससे उनकी आय कम होती है।
जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव डालती है, जिससे रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की कमी होती है।
राजनीतिक और सामाजिक कारक: भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता भी विकास में बाधा डालती है, जिससे गरीबों का उत्थान मुश्किल हो जाता है।
इस प्रकार, भारत की समृद्धि के बावजूद, आर्थिक असमानता और सामाजिक चुनौतियों के कारण यहां के निवासी निर्धनता का सामना कर रहे हैं।
See lessDescribe how does the Carbon cycle work. How is the working of the Carbon Cycle affected by deforestation? [Answer Limit: 250 words] [UKPSC 2012]
The carbon cycle is a natural process that describes the movement of carbon among the Earth's atmosphere, oceans, soil, and living organisms. It operates through several key processes: Photosynthesis: Plants absorb carbon dioxide (CO₂) from the atmosphere and convert it into organic matter (glucose)Read more
The carbon cycle is a natural process that describes the movement of carbon among the Earth’s atmosphere, oceans, soil, and living organisms. It operates through several key processes:
Impact of Deforestation on the Carbon Cycle:
Deforestation significantly disrupts the carbon cycle in several ways:
Overall, deforestation accelerates climate change by increasing atmospheric CO₂ levels, thereby disrupting the natural balance of the carbon cycle.
See lessEvaluate the effectiveness of government initiatives in promoting rainwater harvesting across different regions.
Government initiatives to promote rainwater harvesting (RWH) in India have seen varying degrees of effectiveness across different regions. Here’s an evaluation of these initiatives: 1. Policy Framework and Awareness National and State Policies: The Indian government has implemented policies like theRead more
Government initiatives to promote rainwater harvesting (RWH) in India have seen varying degrees of effectiveness across different regions. Here’s an evaluation of these initiatives:
1. Policy Framework and Awareness
2. Infrastructure Development
3. Regional Variability
4. Community Involvement
5. Monitoring and Evaluation
6. Integration with Other Water Management Practices
7. Barriers to Adoption
8. Future Directions
Conclusion
Overall, government initiatives in promoting rainwater harvesting have shown effectiveness, particularly in water-scarce regions, but challenges remain, especially in urban areas and for broader adoption. A more integrated approach, focusing on community involvement, robust monitoring, and financial support, can further enhance the impact of these initiatives and contribute to sustainable water resource management across India.
See less