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मतदान व्यबहार के चार निर्धारक कारक लिखें।
मतदान व्यवहार के निर्धारक कारक मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले चार मुख्य कारक निम्नलिखित हैं: 1. सामाजिक कारक उम्र: युवा मतदाता अधिक सक्रिय होते हैं। जाति: जातिगत पहचान का महत्व। 2. राजनीतिक कारक पार्टी पहचान: लोग अपनी पसंदीदा पार्टी के प्रति वफादार रहते हैं। 3. आर्थिक कारक आर्थिक स्थिति: उच्च आRead more
मतदान व्यवहार के निर्धारक कारक
मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले चार मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
1. सामाजिक कारक
2. राजनीतिक कारक
3. आर्थिक कारक
4. व्यक्तिगत कारक
इन कारकों के मिश्रण से मतदान व्यवहार का निर्माण होता है।
See lessनीति आयोग की गतिविधियों की दो प्रमुख श्रेणियाँ क्या हैं?
नीति आयोग की गतिविधियों की दो प्रमुख श्रेणियाँ: 1. विकास अनुषंधान और भूलमापकन कार्य: डीएचईओ की संचालन में सहायक राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट ऑफ रिफ़ॉर्म एंड एक्सेलेंस (एनआईआरईआई) प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार तथा अभियंता 2. सहायक सोचवाद: नीतियों का दायरा फ़ैलाना योग्यता के साथ सहयोग बाज़ार के सत्रजन स्तरRead more
नीति आयोग की गतिविधियों की दो प्रमुख श्रेणियाँ:
1. विकास अनुषंधान और भूलमापकन कार्य:
2. सहायक सोचवाद:
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती के कोई दो तरीके लिखिए।
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती के तरीके 1. सीधी भर्ती (Direct Recruitment) यह विभिन्न पदों के लिए सीधे रूप से भर्ती का तरीका है। इसमें प्रतियोगी परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हो सकते हैं। 2. अंदरूनी भर्ती (Internal Recruitment) कर्मचारियों के बीच पदों की भर्ती को अंदरूनी भर्ती कहा जाता है। यह अधिकारिRead more
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भर्ती के तरीके
1. सीधी भर्ती (Direct Recruitment)
2. अंदरूनी भर्ती (Internal Recruitment)
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का मूल हेतु स्पष्ट कीजिए।
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का मूल हेतु सरल भाषा में समझाइए: लक्ष्य: सामाजिक और आर्थिक न्याय, कल्याण और कृषि विकास को साधने के लिए दिशाएँ प्रदान करना। उदाहरण: उत्तराखंड में ग्रामीण विकास की दिशा में योजनाएं चलाना। महत्व: श्रमिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, सांविधानिक संहिता के लिए महत्वपूर्ण नियमोंRead more
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का मूल हेतु
सरल भाषा में समझाइए:
यह नीतियाँ समाज को सुधारने और समृद्धि के मार्ग पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
See lessभारतीय संविधान में वर्णित स्वतंत्रता के कोई चार पक्ष कौन से हैं?
भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के चार पक्ष व्यक्तिगत स्वतंत्रता हर व्यक्ति को अपने जीवन और शरीर पर नियंत्रण का अधिकार है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विचार, भाषण और लेखन की स्वतंत्रता दी गई है। धर्म की स्वतंत्रता सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। संगठन की स्वतंत्रता किसी भी संगठन या संघ का गठनRead more
भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के चार पक्ष
इन अधिकारों से नागरिकों को स्वतंत्रता और समानता का अनुभव होता है।
See lessभारतीय संविधान की प्रस्तावना के पाँच अवयव लिखिए।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के पाँच अवयव सामाजिक न्याय सभी को समानता और अवसर मिले। आर्थिक न्याय गरीबी और भेदभाव का अंत। राजनीतिक न्याय सभी को वोट देने का अधिकार। स्वतंत्रता अभिव्यक्ति और विश्वास की स्वतंत्रता। समानता सभी व्यक्तियों के लिए समान अधिकार। इन अवयवों से भारत एक सशक्त और समान समाज की दिशाRead more
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के पाँच अवयव
इन अवयवों से भारत एक सशक्त और समान समाज की दिशा में बढ़ता है।
See lessमहाकौशल क्षेत्र में असहयोग आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।
महाकौशल क्षेत्र में असहयोग आन्दोलन असहयोग आन्दोलन, जो 1920 के दशक में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ, महाकौशल क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला था। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था। आन्दोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहमति: भारतीयRead more
महाकौशल क्षेत्र में असहयोग आन्दोलन
असहयोग आन्दोलन, जो 1920 के दशक में महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ, महाकौशल क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला था। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था।
आन्दोलन का उद्देश्य
महाकौशल क्षेत्र में विशेषताएँ
निष्कर्ष
महाकौशल क्षेत्र में असहयोग आन्दोलन ने न केवल ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एकजुटता बढ़ाई, बल्कि समाज में सुधार और जागरूकता की एक नई लहर भी पैदा की। यह आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण कड़ी बना।
See less19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण से क्या अभिप्राय है ? भारतीय पुनर्जागरण के कारणों की विवेचना कीजिए।
19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण का अभिप्राय 19वीं शताब्दी का भारतीय पुनर्जागरण एक सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आंदोलन था, जिसने भारत में आधुनिकता और सुधार के विचारों को जन्म दिया। यह समय भारतीय समाज में नए विचारों और बदलावों का दौर था, जिसने शिक्षा, धर्म, और संस्कृति में एक नई जागरूकता को जन्मRead more
19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण का अभिप्राय
19वीं शताब्दी का भारतीय पुनर्जागरण एक सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आंदोलन था, जिसने भारत में आधुनिकता और सुधार के विचारों को जन्म दिया। यह समय भारतीय समाज में नए विचारों और बदलावों का दौर था, जिसने शिक्षा, धर्म, और संस्कृति में एक नई जागरूकता को जन्म दिया।
भारतीय पुनर्जागरण के कारण
1. अंग्रेज़ों का आगमन
2. धार्मिक सुधार आंदोलन
3. सामाजिक असमानता का विरोध
4. संस्कृति और साहित्य का उत्थान
निष्कर्ष
19वीं शताब्दी का भारतीय पुनर्जागरण एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकाल था, जिसने भारतीय समाज को जागरूक किया और सामाजिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया। यह एक ऐसा आंदोलन था जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी।
See less1857 के विद्रोह की प्रकृति (स्वरूप) क्या थी? क्या उसे प्रथम स्वाधीनता संग्राम कहना उचित है?
1857 के विद्रोह की प्रकृति 1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। इसे कई दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है। विद्रोह का स्वरूप सामाजिक असंतोष: अंग्रेज़ों की नीतियों ने भारतीय समाज में असंतोष फैलाया। विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग, जैसे सिपाही, किसान और ज़मींदार, अंग्रेज़ों के खिलाफ उRead more
1857 के विद्रोह की प्रकृति
1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। इसे कई दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है।
विद्रोह का स्वरूप
क्या इसे प्रथम स्वाधीनता संग्राम कहना उचित है?
निष्कर्ष
1857 का विद्रोह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है, जो सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारणों से उत्पन्न हुआ। इसे प्रथम स्वाधीनता संग्राम कहना उचित है, क्योंकि इसने भारतीय स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
See lessशिवाजी के शासन प्रबंध की विवेचना कीजिए।
शिवाजी के शासन प्रबंध की विवेचना प्रस्तावना छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन प्रबंध उनके कुशल नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने 17वीं शताब्दी में एक मजबूत राज्य की नींव रखी, जो मराठा साम्राज्य के रूप में विकसित हुआ। प्रशासनिक ढांचा 1. केंद्रित प्रशासन शिवाजी ने एक सुसंगठित प्रRead more
शिवाजी के शासन प्रबंध की विवेचना
प्रस्तावना
छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन प्रबंध उनके कुशल नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने 17वीं शताब्दी में एक मजबूत राज्य की नींव रखी, जो मराठा साम्राज्य के रूप में विकसित हुआ।
प्रशासनिक ढांचा
1. केंद्रित प्रशासन
2. स्थानीय शासन
राजस्व प्रणाली
सैन्य व्यवस्था
न्याय प्रणाली
निष्कर्ष
शिवाजी का शासन प्रबंध न केवल प्रभावशाली था, बल्कि यह एक ऐसे राज्य की नींव रखता था जहां न्याय, विकास और लोक कल्याण की प्राथमिकता थी। उनका प्रशासनिक मॉडल आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
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