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“विवेक संकट” की स्थिति से आप क्या समझते हैं? इसके साथ, समझाइए कि एक लोक सेवक इस प्रकार की स्थिति का सामना कैसे कर सकता है। (200 शब्दों में उत्तर दीजिए)
विवेक संकट का मतलब होता है ऐसी स्थिति जहाँ किसी व्यक्ति को दो सही चीजों में से एक को चुनना हो, लेकिन कोई भी फैसला लेना आसान न हो। इसमें सही और गलत के बीच नहीं, बल्कि दो "सही" कामों के बीच चुनाव करना मुश्किल होता है। लोक सेवकों को ऐसी स्थिति कईRead more
विवेक संकट का मतलब होता है ऐसी स्थिति जहाँ किसी व्यक्ति को दो सही चीजों में से एक को चुनना हो, लेकिन कोई भी फैसला लेना आसान न हो। इसमें सही और गलत के बीच नहीं, बल्कि दो “सही” कामों के बीच चुनाव करना मुश्किल होता है।
लोक सेवकों को ऐसी स्थिति कई बार देखनी पड़ती है। जैसे – नियमों के अनुसार किसी गरीब को मदद न देना, लेकिन दिल कहता है कि मदद करनी चाहिए। ऐसे में दिमाग और दिल के बीच टकराव होता है।
लोक सेवक ऐसे संकट का सामना कैसे करें:
सबसे पहले कानून और नियमों को अच्छे से समझें।
सोचें कि कौन-सा फैसला जनता के भले के लिए है।
अपने सीनियर या अनुभवी लोगों से सलाह लें।
अपने फैसले में ईमानदारी और पारदर्शिता रखें।
अगर संभव हो तो समाधान ऐसा ढूंढें जिससे नियम भी न टूटे और किसी की मदद भी हो जाए।
इस तरह लोक सेवक सोच-समझकर और सही रास्ता चुनकर विवेक संकट को हल कर सकता है।
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