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भारत सेवक मंडल क्या है ?
भारत सेवक मंडल: एक परिचय क्या है भारत सेवक मंडल? स्थापना: 1915 में गोपाल कृष्ण गोखले के अनुयायियों द्वारा स्थापित। उद्देश्य सामाजिक सुधार लक्ष्य: भारतीय समाज में सुधार लाना। उदाहरण: शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना। राष्ट्रीय एकता समर्पण: देश की स्वतंत्रता और एकता के लिए कारRead more
भारत सेवक मंडल: एक परिचय
क्या है भारत सेवक मंडल?
उद्देश्य
उदाहरण: शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
उदाहरण: स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाना।
निष्कर्ष
भारत सेवक मंडल ने भारतीय संस्कृति और समाज को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो आज भी महत्वपूर्ण है।
See lessसंन्यासी विद्रोह पर टिप्पणी लिखिए।
संन्यासी विद्रोह: एक टिप्पणी विद्रोह का परिचय समय: यह विद्रोह 1770 से 1800 के बीच हुआ। भागीदार: संन्यासी (तपस्वी साधु) और स्थानीय किसान। प्रमुख कारण आर्थिक संकट कृषि संकट: बड़ी बाढ़ और सूखे ने किसानों को प्रभावित किया। उदाहरण: 1770 का बंगाल अकाल। ब्रिटिश नीतियाँ भारी कर: किसानों पर बढ़ता कर बोझ। उदाRead more
संन्यासी विद्रोह: एक टिप्पणी
विद्रोह का परिचय
प्रमुख कारण
उदाहरण: 1770 का बंगाल अकाल।
उदाहरण: करों के कारण किसानों में असंतोष।
मुख्य घटनाएँ
उदाहरण: उन्होंने ब्रिटिश आपूर्ति लाइनों पर हमले किए।
निष्कर्ष
संन्यासी विद्रोह ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ किसानों और साधुओं की नाराज़गी को दर्शाया, जो भविष्य में स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।
See lessसालबाई की सन्धि पर टिप्पणी लिखिए।
सालबाई की सन्धि: एक टिप्पणी सन्धि का परिचय तारीख: यह सन्धि 1782 में हस्ताक्षरित हुई थी। पार्टीज़: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच। प्रमुख बिंदु शांति समझौता उद्देश्य: पहली आंग्ल-माराठा युद्ध को समाप्त करना। उदाहरण: दोनों पक्षों ने युद्धविराम का निर्णय लिया। क्षेत्रीय परिवर्तन आउटRead more
सालबाई की सन्धि: एक टिप्पणी
सन्धि का परिचय
प्रमुख बिंदु
उदाहरण: दोनों पक्षों ने युद्धविराम का निर्णय लिया।
उदाहरण: सालसेट और बासsein द्वीपों पर ब्रिटिश नियंत्रण।
निष्कर्ष
सालबाई की सन्धि ने मराठा शक्ति के कमजोर होने और ब्रिटिश प्रभुत्व के बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
See less"दीवाने कोही" क्या है? विवेचना कीजिए।
दीवाने कोही: एक विवेचना क्या है दीवाने कोही? परिभाषा: दीवाने कोही एक महत्वपूर्ण कृषि विभाग था, जिसे मुग़ल साम्राज्य में भूमि प्रबंधन और सिंचाई के लिए स्थापित किया गया था। प्रमुख विशेषताएँ कृषि सुधार उद्देश्य: खेती की प्रक्रियाओं में सुधार करना। उदाहरण: नई सिंचाई तकनीकों को लागू करना। भूमि प्रबंधन काRead more
दीवाने कोही: एक विवेचना
क्या है दीवाने कोही?
प्रमुख विशेषताएँ
उदाहरण: नई सिंचाई तकनीकों को लागू करना।
उदाहरण: किसानों के साथ सही कर प्रणाली बनाना।
निष्कर्ष
दीवाने कोही ने मुग़ल साम्राज्य में कृषि और भूमि प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला।
See lessभारतीय संस्कृति में "तीन भागों" की विवेचना कीजिए।
भारतीय संस्कृति के "तीन भागों" की विवेचना 1. संस्कृति विवरण: यह विचारों, मान्यताओं और परंपराओं का समूह है। उदाहरण: त्योहारों का आयोजन जैसे दीपावली और होली। 2. सामाजिक संरचना विवरण: समाज में रिश्तों और जातियों का संगठन। उदाहरण: परिवार की भूमिका और सामाजिक जिम्मेदारियाँ। 3. धार्मिक परंपराएँ विवरण: विभRead more
भारतीय संस्कृति के “तीन भागों” की विवेचना
1. संस्कृति
उदाहरण: त्योहारों का आयोजन जैसे दीपावली और होली।
2. सामाजिक संरचना
उदाहरण: परिवार की भूमिका और सामाजिक जिम्मेदारियाँ।
3. धार्मिक परंपराएँ
उदाहरण: हिन्दू, मुस्लिम, सिख, और ईसाई धर्म के रीति-रिवाज।
निष्कर्ष
भारतीय संस्कृति इन तीन भागों से मिलकर बनती है, जो इसे विविधता और एकता का अद्भुत उदाहरण बनाते हैं।
See lessबृहत् स्नानागार पर टिप्पणी लिखिए।
बृहत्पनानागार: एक परिचय क्या है बृहत्पनानागार? परिभाषा: बृहत्पनानागार एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है, जो संस्कृत में लिखा गया है। मुख्य विशेषताएँ विज्ञान और ज्ञान विषय: यह ग्रंथ ज्योतिष, गणित, और खगोल विज्ञान से संबंधित ज्ञान प्रदान करता है। उदाहरण: ग्रहों की गति और समय की गणना के तरीके। ऐतिहासिक महत्वRead more
बृहत्पनानागार: एक परिचय
क्या है बृहत्पनानागार?
मुख्य विशेषताएँ
उदाहरण: ग्रहों की गति और समय की गणना के तरीके।
उदाहरण: इससे प्राप्त ज्ञान आज भी अध्ययन किया जाता है।
निष्कर्ष
बृहत्पनानागार भारतीय ज्ञान की अमूल्य धरोहर है, जो विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
See lessक्या भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है? चर्चा कीजिए।
क्या भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है? परिचय भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है, जो न केवल भारत बल्कि विश्व के कई देशों में व्याप्त है। यह राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास को बाधित करता है। लेकिन क्या भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है? इस पर चर्चा करते हैं। कारण 1. संस्थानिक कमियाँ कई सरकारी संस्थाएं भ्रष्टाचाRead more
क्या भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है?
परिचय
भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है, जो न केवल भारत बल्कि विश्व के कई देशों में व्याप्त है। यह राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास को बाधित करता है। लेकिन क्या भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है? इस पर चर्चा करते हैं।
कारण
1. संस्थानिक कमियाँ
उदाहरण: लाइसेंस और परमिट प्राप्त करने में रिश्वत की आवश्यकता।
2. सामाजिक मानसिकता
उदाहरण: लोग अक्सर सोचते हैं कि बिना रिश्वत दिए काम नहीं होगा।
संभावनाएँ
1. शिक्षा और जागरूकता
उदाहरण: स्कूलों में नैतिक शिक्षा शामिल करना।
2. तकनीकी उपाय
उदाहरण: ई-गवर्नेंस से रिश्वतखोरी की संभावना कम होती है।
3. कानूनी प्रावधान
उदाहरण: भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों का सख्ती से लागू होना।
निष्कर्ष
भ्रष्टाचार मुक्त भारत संभव है, लेकिन इसके लिए एक समग्र प्रयास की आवश्यकता है। शिक्षा, तकनीकी नवाचार और सख्त कानूनों का पालन महत्वपूर्ण है। यदि हम सभी मिलकर काम करें, तो एक दिन भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना सच हो सकता है।
See lessभारत में सिविल सेवकों के लिएद्ध आचार संहिता पर टिप्पणी कीजिए।
भारत में सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता परिचय भारत में सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता एक नियमावली है, जो उन्हें नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए मार्गदर्शन करती है। यह संहिता प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देती है। मुख्य बिंदु 1. नैतिकता और ईमानदारी सिविल सेवकRead more
भारत में सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता
परिचय
भारत में सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता एक नियमावली है, जो उन्हें नैतिकता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए मार्गदर्शन करती है। यह संहिता प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा देती है।
मुख्य बिंदु
1. नैतिकता और ईमानदारी
उदाहरण: सरकारी योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखना।
2. जवाबदेही
उदाहरण: यदि किसी अधिकारी की कार्रवाई में भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है।
3. निष्पक्षता
उदाहरण: किसी विशेष समूह के प्रति पक्षपाती व्यवहार न करना।
4. गोपनीयता
उदाहरण: सरकारी योजनाओं की गोपनीयता बनाए रखना।
प्रासंगिकता
आचार संहिता सिविल सेवकों को नैतिकता का पालन करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने में मदद करती है। यह जनता का विश्वास भी बढ़ाती है कि सरकारी सेवक अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत में सिविल सेवकों के लिए आचार संहिता एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। इसे अपनाने से सिविल सेवक एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और समाज में बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
See lessवैयक्तिक भिन्नता की अवधारणा का वर्णन कीजिए तथा प्रकृति व पोषण विवाद पर प्रकाश डालिए।
वैयक्तिक भिन्नता की अवधारणा परिचय वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ है कि हर व्यक्ति में अद्वितीय विशेषताएँ होती हैं, जैसे कि सोचने का तरीका, भावनाएँ और व्यवहार। यह भिन्नता कई कारकों के कारण होती है, जिनमें जैविक, मानसिक और सामाजिक कारक शामिल हैं। प्रकृति बनाम पोषण विवाद प्रकृति (Nature) व्याख्या: प्रकृति काRead more
वैयक्तिक भिन्नता की अवधारणा
परिचय
वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ है कि हर व्यक्ति में अद्वितीय विशेषताएँ होती हैं, जैसे कि सोचने का तरीका, भावनाएँ और व्यवहार। यह भिन्नता कई कारकों के कारण होती है, जिनमें जैविक, मानसिक और सामाजिक कारक शामिल हैं।
प्रकृति बनाम पोषण विवाद
प्रकृति (Nature)
प्रकृति का तात्पर्य है कि व्यक्ति की विशेषताएँ और व्यवहार उसके अनुवांशिक गुणों से निर्धारित होते हैं।
उदाहरण: एक परिवार में सभी सदस्य संगीत में प्रतिभाशाली होते हैं, यह उनके अनुवांशिक गुणों का परिणाम हो सकता है।
पोषण (Nurture)
पोषण का अर्थ है कि व्यक्ति का विकास उसके वातावरण और अनुभवों पर निर्भर करता है।
उदाहरण: अगर एक बच्चा सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल में बड़ा होता है, तो वह आत्मविश्वासी बन सकता है।
उदाहरण
एक व्यक्ति में सामाजिक कौशल और नेतृत्व क्षमता का होना उसके पारिवारिक माहौल और शिक्षा पर निर्भर करता है, जबकि उसकी बुद्धिमत्ता और शारीरिक गुण अनुवांशिकता से प्रभावित हो सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रकृति और पोषण का विवाद यह बताता है कि वैयक्तिक भिन्नता दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से बनती है। न केवल अनुवांशिक गुण, बल्कि वातावरण भी व्यक्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम दोनों पहलुओं को समझें और उनके संतुलन को पहचानें।
See lessस्वामी विवेकानन्द के प्रसिद्ध शिकागो व्याख्यान और आज के समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।
स्वामी विवेकानन्द का शिकागो व्याख्यान व्याख्यान का सारांश स्वामी विवेकानन्द ने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके उद्घाटन भाषण में उन्होंने धर्म, मानवता और आपसी समझ की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "आपका धर्म आपको नफरत नहीं सिखाता," जो आज भी अत्यंत महत्वपRead more
स्वामी विवेकानन्द का शिकागो व्याख्यान
व्याख्यान का सारांश
स्वामी विवेकानन्द ने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके उद्घाटन भाषण में उन्होंने धर्म, मानवता और आपसी समझ की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आपका धर्म आपको नफरत नहीं सिखाता,” जो आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रमुख बिंदु
विवेकानन्द ने धर्म को मानवता की सेवा का माध्यम बताया। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति सम्मान की बात की।
उदाहरण: वेदांत के सिद्धांतों का उपयोग कर उन्होंने बताया कि सभी धर्म एक ही सत्य के विभिन्न मार्ग हैं।
उन्होंने सभी मानव जाति के बीच समानता का संदेश दिया। यह बात आज भी सामाजिक एकता की आवश्यकता को दर्शाती है।
उदाहरण: विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों के बीच संवाद को बढ़ावा देना।
आज की प्रासंगिकता
आज के समय में जब धर्म, जाति और राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव बढ़ रहा है, विवेकानन्द का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उनके विचार हमें सिखाते हैं कि:
हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
विवेकानन्द ने बताया कि व्यक्तिगत विकास के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है।
निष्कर्ष
स्वामी विवेकानन्द का शिकागो व्याख्यान न केवल उनके समय के लिए, बल्कि आज के वैश्विक समाज के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत है। उनका संदेश आज भी सभी के लिए एकता और सहिष्णुता का मार्ग प्रशस्त करता है।
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