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थायरॉइड ग्रन्थि की संरचना, उसके हार्मोन तथा संबंधित विकारों का वर्णन कीजिए।
थायरॉइड ग्रन्थि की संरचना, हार्मोन और संबंधित विकार थायरॉइड ग्रन्थि की संरचना स्थान: थायरॉइड ग्रन्थि गले के सामने, वायुमार्ग के दोनों ओर स्थित होती है। आकार: यह तितली के आकार की होती है और दो लोबों में बंटी होती है। संरचना: इसमें फोलिकुली होते हैं, जो थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करते हैं। थायरॉइड हारRead more
थायरॉइड ग्रन्थि की संरचना, हार्मोन और संबंधित विकार
थायरॉइड ग्रन्थि की संरचना
थायरॉइड हार्मोन
थायरॉइड ग्रन्थि मुख्यतः दो प्रमुख हार्मोन का उत्पादन करती है:
संबंधित विकार
थायरॉइड ग्रन्थि से संबंधित कुछ प्रमुख विकार निम्नलिखित हैं:
निष्कर्ष
थायरॉइड ग्रन्थि का सही कार्य शरीर के समुचित मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है। इसके विकारों का समय पर उपचार जरूरी है, ताकि शरीर के संतुलन को बनाए रखा जा सके।
See lesspH स्केल को विस्तार से समझाइए ।
pH स्केल को विस्तार से समझाइए pH स्केल एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण है, जो किसी पदार्थ की अम्लता या क्षारीयता को मापता है। यह विशेष रूप से रसायन विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान में उपयोगी है। pH का अर्थ pH का मतलब "पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन" है। यह बताता है कि किसी समाधान में हाइड्रोजन आयनों (H⁺) की सांद्Read more
pH स्केल को विस्तार से समझाइए
pH स्केल एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण है, जो किसी पदार्थ की अम्लता या क्षारीयता को मापता है। यह विशेष रूप से रसायन विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान में उपयोगी है।
pH का अर्थ
pH स्केल की रेंज
उदाहरण
pH का महत्व
pH मापन के तरीके
निष्कर्ष
pH स्केल हमारे जीवन में कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इसके सही ज्ञान से हम स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं।
See lessसक्रियता श्रेणी क्या है? समझाइए।
सक्रियता श्रेणी क्या है? सक्रियता श्रेणी एक प्रणाली है, जो विभिन्न जीवों की सक्रियता को वर्गीकृत करती है। मुख्य बिंदु सक्रियता के प्रकार: निष्क्रिय जीव: जैसे कछुए, जो धीमी गति से चलते हैं। सक्रिय जीव: जैसे गिलहरी, जो तेज़ी से दौड़ते हैं। उद्देश्य: जीवों के व्यवहार और पर्यावरण में उनकी भूमिका को समझनRead more
सक्रियता श्रेणी क्या है?
सक्रियता श्रेणी एक प्रणाली है, जो विभिन्न जीवों की सक्रियता को वर्गीकृत करती है।
मुख्य बिंदु
उदाहरण
इस प्रकार, सक्रियता श्रेणी जीवों की गतिविधियों को समझने में मदद करती है।
See lessगुरुनानक से गुरु गोविन्दसिंह तक मुगल-सिक्ख सम्बन्धों पर प्रकाश डालिए ।
गुरुनानक से गुरु गोविंद सिंह तक मुगल-सिक्ख संबंध प्रारंभिक संबंध (गुरुनानक का युग) गुरुनानक (1469-1539): सिक्ख धर्म के संस्थापक। मुगलों से संपर्क: उनके समय में बाबर और हुमायूं के शासन के दौरान उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता का संदेश दिया। उदाहरण: गुरुनानक ने सभी धर्मों का सम्मान किया और भक्ति का मार्ग अRead more
गुरुनानक से गुरु गोविंद सिंह तक मुगल-सिक्ख संबंध
प्रारंभिक संबंध (गुरुनानक का युग)
मध्य काल (गुरु अर्जुन और गुरु तेग बहादुर)
गुरु अर्जुन देव (1563-1606)
गुरु तेग बहादुर (1621-1675)
गुरु गोविंद सिंह का युग
निष्कर्ष
गुरुनानक से गुरु गोविंद सिंह तक के काल में मुगलों और सिक्खों के संबंध धार्मिक सहिष्णुता से शुरू होकर संघर्ष और प्रतिरोध की दिशा में बढ़े। यह समय सिक्खों के लिए एक पहचान और संघर्ष का युग बन गया।
See lessअशोक के "धम्म" की विवेचना कीजिए।
अशोक के "धम्म" की विवेचना परिचय मौर्य सम्राट अशोक का शासनकाल 268 से 232 ईसा पूर्व तक था। उन्होंने "धम्म" को अपने शासन का मूल सिद्धांत बनाया। "धम्म" का अर्थ है धर्म, नैतिकता और मानवता का पालन। धम्म के प्रमुख तत्व 1. नैतिकता और आचार सच्चाई और अहिंसा: अशोक ने सत्य और अहिंसा को प्राथमिकता दी। उदाहरण: युRead more
अशोक के “धम्म” की विवेचना
परिचय
मौर्य सम्राट अशोक का शासनकाल 268 से 232 ईसा पूर्व तक था। उन्होंने “धम्म” को अपने शासन का मूल सिद्धांत बनाया। “धम्म” का अर्थ है धर्म, नैतिकता और मानवता का पालन।
धम्म के प्रमुख तत्व
1. नैतिकता और आचार
उदाहरण: युद्ध के बाद, कलिंग युद्ध के परिणामस्वरूप अशोक ने हिंसा के बजाय शांति का मार्ग अपनाया।
2. सामाजिक कल्याण
उदाहरण: अशोक ने अस्पताल, जलाशय और सड़कों का निर्माण किया।
3. धार्मिक सहिष्णुता
उदाहरण: उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ अन्य धर्मों को भी समान महत्व दिया।
4. सार्वजनिक प्रसार
उदाहरण: सारनाथ में स्थित अशोक के स्तंभ पर लिखे धम्म के सिद्धांत।
निष्कर्ष
अशोक का “धम्म” केवल एक राजनीतिक सिद्धांत नहीं था, बल्कि यह मानवता, नैतिकता और सामाजिक कल्याण का एक व्यापक दृष्टिकोण था। उनके द्वारा स्थापित धम्म ने भारतीय संस्कृति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला, जो आज भी प्रासंगिक है।
See lessप्राग्वैदिककालीन राजनीतिक संगठन की विवेचना कीजिए।
प्राग्वैदिककालीन राजनीतिक संगठन की विवेचना परिचय प्राग्वैदिक काल का समय लगभग 1500 से 600 ईसा पूर्व का है, जिसमें वेदों का विकास हुआ। इस समय की राजनीतिक संरचना काफी महत्वपूर्ण थी और इसे कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। राजनीतिक संगठन 1. जन और जनपद जन: यह एक समूह या समुदाय को दर्शाता था। उदाहरण: आर्यRead more
प्राग्वैदिककालीन राजनीतिक संगठन की विवेचना
परिचय
प्राग्वैदिक काल का समय लगभग 1500 से 600 ईसा पूर्व का है, जिसमें वेदों का विकास हुआ। इस समय की राजनीतिक संरचना काफी महत्वपूर्ण थी और इसे कई हिस्सों में बांटा जा सकता है।
राजनीतिक संगठन
1. जन और जनपद
उदाहरण: आर्य लोग एक जन के रूप में रहते थे।
उदाहरण: इन जनपदों के आधार पर छोटे-छोटे राज्य बनते थे।
2. राजा और सभा
उदाहरण: राजा को युद्ध के समय सामरिक नेतृत्व देना होता था।
उदाहरण: विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करने के लिए राजा सभा का आयोजन करता था।
3. अर्थव्यवस्था और समाज
उदाहरण: कृषि पर निर्भरता ने जनपदों को आर्थिक रूप से मजबूत किया।
निष्कर्ष
प्राग्वैदिककालीन राजनीतिक संगठन ने भारतीय सभ्यता की नींव रखी। राजा, सभा और जनपदों के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक ढांचे ने इस काल में स्थिरता और विकास को बढ़ावा दिया। यह संगठनात्मक ढांचा भविष्य की राजनीतिक प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
See lessमहाराज रघुराज सिंह के विषय में आप क्या जानते हैं?
महाराज रघुराज सिंह: एक परिचय कौन थे महाराज रघुराज सिंह? राज्य: वह मध्य प्रदेश के मराठा साम्राज्य के प्रमुख थे। काल: उनका शासन 19वीं शताब्दी में हुआ। प्रमुख योगदान सामाजिक सुधार कार्य: उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा दिया। उदाहरण: स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण। कला और संस्कृति का संरकRead more
महाराज रघुराज सिंह: एक परिचय
कौन थे महाराज रघुराज सिंह?
प्रमुख योगदान
उदाहरण: स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण।
उदाहरण: स्थानीय कलाकारों को सम्मानित करना।
निष्कर्ष
महाराज रघुराज सिंह को उनके शासनकाल के दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए याद किया जाता है।
See lessमन्दसौर की सन्धि की विवेचना कीजिए।
मन्दसौर की सन्धि: एक विवेचना सन्धि का परिचय तारीख: यह सन्धि 28 दिसंबर 1818 को हुई। पार्टीज़: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच। मुख्य बिंदु शांति समझौता उद्देश्य: पहली आंग्ल-माराठा युद्ध को समाप्त करना। उदाहरण: युद्धविराम की घोषणा। क्षेत्रीय वितरण परिणाम: मराठों ने कई क्षेत्रों कोRead more
मन्दसौर की सन्धि: एक विवेचना
सन्धि का परिचय
मुख्य बिंदु
उदाहरण: युद्धविराम की घोषणा।
उदाहरण: सूरत और गुड़गाँव का नियंत्रण।
निष्कर्ष
मन्दसौर की सन्धि ने मराठा शक्ति को कमजोर किया और ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
See lessचित्रकूट' के विषय में आप क्या जानते हैं?
चित्रकूट: एक परिचय स्थान और महत्व स्थान: चित्रकूट मध्य प्रदेश में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। धार्मिक महत्व: यह रामायण में वर्णित स्थान है, जहाँ भगवान राम, सीता, और लक्ष्मण ने वनवास बिताया था। प्रमुख आकर्षण कठिनाई की गुफाएँ दृश्य: यहाँ की गुफाएँ धार्मिक यात्रियों को आकर्षित करती हैं। उदाहरण: जनRead more
चित्रकूट: एक परिचय
स्थान और महत्व
प्रमुख आकर्षण
उदाहरण: जनकीनाथ गुफा।
उदाहरण: श्रद्धालु यहाँ पूजा अर्चना करते हैं।
निष्कर्ष
चित्रकूट एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
See lessराजा बख्तावर सिंह के विषय में आप क्या जानते हैं?
राजा बख्तावर सिंह: एक परिचय कौन थे राजा बख्तावर सिंह? राज्य: वह मध्यप्रदेश के एक प्रमुख राजा थे। राजनैतिक काल: उनका शासन 18वीं शताब्दी में था। प्रमुख योगदान सैन्य नेतृत्व कौशल: युद्ध में उनकी रणनीतियों के लिए प्रसिद्ध थे। उदाहरण: उन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए कई लड़ाइयाँ लड़ीं। संस्कृति का संरRead more
राजा बख्तावर सिंह: एक परिचय
कौन थे राजा बख्तावर सिंह?
प्रमुख योगदान
उदाहरण: उन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए कई लड़ाइयाँ लड़ीं।
उदाहरण: उनके शासन में कई मंदिरों और महलों का निर्माण हुआ।
निष्कर्ष
राजा बख्तावर सिंह को उनके साहस और नेतृत्व के लिए याद किया जाता है, जिन्होंने अपने राज्य की रक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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