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प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत अंतरर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखने में राष्ट्र संघ (लीग ऑफ़ नेशन्स) की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत नरसंघ (League of Nations) का गठन 1920 में किया गया था, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखना और संघर्षों को सुलझाना था। इसके कार्यों और प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन इस प्रकार किया जा सकता है: सफलताएँ: सहयोग और वार्ता: राष्ट्र संघ ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय विRead more
प्रथम विश्व युद्ध के उपरांत नरसंघ (League of Nations) का गठन 1920 में किया गया था, जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखना और संघर्षों को सुलझाना था। इसके कार्यों और प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन इस प्रकार किया जा सकता है:
संक्षेप में, राष्ट्र संघ ने कुछ सकारात्मक कदम उठाए, लेकिन इसके संरचनात्मक और कार्यान्वयन में कमियों के कारण यह अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका। इसके अनुभवों से सीख लेकर बाद में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई, जो अधिक प्रभावी और संरचनात्मक रूप से सशक्त संगठन साबित हुआ।
See lessउन कारणों को सूचीबद्ध कीजिए, जिन्होंने स्थायी बंदोबस्त प्रणाली की शुरुआत को प्रेरित किया। साथ ही, इसके परिणामों की विवेचना कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (Permanent Settlement) की शुरुआत को प्रेरित करने वाले कारण निम्नलिखित थे: स्थिर राजस्व प्रणाली की आवश्यकता: ईस्ट इंडिया कंपनी को एक स्थिर और पूर्वानुमानित राजस्व प्रणाली की आवश्यकता थी ताकि वह प्रशासनिक और सैन्य खर्चों को स्थिर रूप से पूरा कर सके। स्थायित्व और स्थिरता: भूमि रRead more
स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (Permanent Settlement) की शुरुआत को प्रेरित करने वाले कारण निम्नलिखित थे:
परिणाम:
इन कारणों और परिणामों ने स्थायी बंदोबस्त प्रणाली की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।
See lessछठी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास भारत में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के उद्भव और प्रसार के लिए उत्तरदायी कारकों को सूचीबद्ध कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास भारत में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के उद्भव और प्रसार के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी थे: सामाजिक असंतोष: उस समय की जाति व्यवस्था और ब्राह्मणों की प्रधानता से उत्पन्न सामाजिक असंतोष ने नए धार्मिक और दार्शनिक आंदोलनों को प्रेरित किया। बौद्ध और जैन धर्म ने जाति व्यवस्था औRead more
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास भारत में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के उद्भव और प्रसार के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी थे:
इन कारकों ने बौद्ध और जैन धर्म को महत्वपूर्ण धार्मिक आंदोलनों के रूप में स्थापित किया और भारतीय धार्मिक और दार्शनिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाला।
See lessगुटनिरपेक्ष आंदोलन का संक्षिप्त विवरण देते हुए, वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता का परीक्षण कीजिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement, NAM) की स्थापना 1961 में बंडुंग सम्मेलन के दौरान की गई थी, जिसमें भारत, युगोस्लाविया, मिस्र, इंडोनेशिया, और घाना जैसे देशों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शीत युद्ध की स्थितियों में, न तो अमेरिका और न ही सोवियत संघ के गुट में शामिलRead more
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement, NAM) की स्थापना 1961 में बंडुंग सम्मेलन के दौरान की गई थी, जिसमें भारत, युगोस्लाविया, मिस्र, इंडोनेशिया, और घाना जैसे देशों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शीत युद्ध की स्थितियों में, न तो अमेरिका और न ही सोवियत संघ के गुट में शामिल होकर स्वतंत्र और निष्पक्ष विदेश नीति बनाए रखना था। गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने स्वतंत्रता, समानता, और सामरिक और आर्थिक सहयोग पर जोर दिया, और विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
वर्तमान समय में प्रासंगिकता:
हालांकि, NAM को वर्तमान विश्व व्यवस्था में कुछ चुनौतियाँ का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और स्वतंत्र नीति के सिद्धांतों को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
See lessचर्चा कीजिए कि औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में क्यों शुरू हुई और इसके प्रभावों पर प्रकाश डालिए।(उत्तर 200 शब्दों में दें)
औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में शुरू होने के कई प्रमुख कारण थे: संसाधन उपलब्धता: इंग्लैंड के पास कोयला और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन थे, जो औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक थे। सुधरी हुई कृषि: कृषि में तकनीकी सुधारों ने कृषि उत्पादन बढ़ाया और श्रमिकों की आपूर्ति में सुधार किया, जRead more
औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में शुरू होने के कई प्रमुख कारण थे:
प्रभाव:
औद्योगिक क्रांति ने वैश्विक आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं में गहरा प्रभाव डाला, जो आधुनिक औद्योगिक समाज की नींव रखी।
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