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लेनिन की नव आर्थिक नीति 1921 ने स्वतंत्रता के शीघ्र पश्चात् भारत द्वारा अपनाई गई नीतियों को प्रभावित किया था । मूल्यांकन कीजिए । (150 words) [UPSC 2014]
लेनिन की नव आर्थिक नीति (1921) और स्वतंत्रता के बाद भारत की नीतियों पर इसका प्रभाव नव आर्थिक नीति (NEP) 1921 का अवलोकन लेनिन की नव आर्थिक नीति (NEP) 1921 ने सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए राज्य नियंत्रण और सीमित बाजार तंत्र का संयोजन पेश किया। इसमें छोटे व्यवसायों की निजी स्वामित्वRead more
लेनिन की नव आर्थिक नीति (1921) और स्वतंत्रता के बाद भारत की नीतियों पर इसका प्रभाव
नव आर्थिक नीति (NEP) 1921 का अवलोकन
लेनिन की नव आर्थिक नीति (NEP) 1921 ने सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए राज्य नियंत्रण और सीमित बाजार तंत्र का संयोजन पेश किया। इसमें छोटे व्यवसायों की निजी स्वामित्व की अनुमति दी गई और कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया, जिससे आर्थिक स्थिरता और साम्यवादी संक्रमण को सुगम बनाया गया।
भारत की स्वतंत्रता के बाद की नीतियों पर प्रभाव
भारत ने स्वतंत्रता के बाद कुछ नीतिगत तत्व अपनाए जो NEP के सिद्धांतों से प्रेरित थे:
हाल के उदाहरण
भारत की 1991 की आर्थिक उदारीकरण नीतियाँ और इसके बाद के सुधार, NEP की राज्य नियंत्रण और बाजार तंत्र के संयोजन की दिशा में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
See lessलेनिन की नव आर्थिक नीति ने भारत की प्रारंभिक स्वतंत्रता के बाद की आर्थिक रणनीतियों को प्रभावित किया, जिसमें राज्य हस्तक्षेप और बाजार तंत्र का संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया।
The New Economic Policy 1921 of Lenin had influenced the policies adopted by India soon after independence. Evaluate. (150 words) [UPSC 2014]
Influence of Lenin’s New Economic Policy (1921) on Post-Independence Indian Policies Overview of the New Economic Policy (NEP) 1921 Lenin's New Economic Policy (NEP) of 1921 was a strategic shift from war communism towards a mixed economy, combining state control with limited market mechanisms to reRead more
Influence of Lenin’s New Economic Policy (1921) on Post-Independence Indian Policies
Overview of the New Economic Policy (NEP) 1921
Lenin’s New Economic Policy (NEP) of 1921 was a strategic shift from war communism towards a mixed economy, combining state control with limited market mechanisms to revive the Soviet economy. It allowed private ownership of small businesses and encouraged agricultural production, aiming to stabilize the economy and ensure a smoother transition to socialism.
Impact on India’s Post-Independence Policies
After India gained independence in 1947, the Indian government adopted several economic policies influenced by the NEP’s principles, albeit in a modified form:
Recent Examples
India’s economic liberalization policies of 1991 and subsequent reforms echo the NEP’s balance between state control and market dynamics, reflecting a pragmatic approach to economic management.
Conclusion
See lessLenin’s NEP influenced India’s economic policies by advocating a balanced approach between state intervention and market mechanisms, shaping India’s early post-independence economic strategies.
इंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूहों में हज़ारों द्वीपों के विरचन की व्याख्या कीजिए । (150 words) [UPSC 2014]
इंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूहों में द्वीपों का गठन टेक्टोनिक प्लेट गतिविधि इंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूह टेक्टोनिक प्लेट गतिविधियों के कारण बने हैं। ये क्षेत्र कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन स्थल पर स्थित हैं, जैसे पैसिफिक प्लेट, इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट, और यूरेशियन प्लेट। इन प्लेटों कीRead more
इंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूहों में द्वीपों का गठन
टेक्टोनिक प्लेट गतिविधि
इंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूह टेक्टोनिक प्लेट गतिविधियों के कारण बने हैं। ये क्षेत्र कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन स्थल पर स्थित हैं, जैसे पैसिफिक प्लेट, इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट, और यूरेशियन प्लेट। इन प्लेटों की गति और टकराव के परिणामस्वरूप द्वीपों का निर्माण होता है।
ज्वालामुखीय गतिविधि
ज्वालामुखीय गतिविधि द्वीप निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इंडोनेशियाई द्वीपसमूह में, सुमात्रा और जावा जैसे द्वीप रिंग ऑफ फायर के ज्वालामुखीय विस्फोटों के कारण बने हैं, जहां पैसिफिक प्लेट इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के नीचे जाती है। फिलिपीनी द्वीपसमूह में, लुज़ोन और मिंडानाओ जैसे द्वीप ज्वालामुखीय विस्फोटों और टेक्टोनिक उथल-पुथल से बने हैं।
हाल के उदाहरण
1883 में क्राकातुआ के विस्फोट ने इंडोनेशिया में द्वीपों का परिदृश्य बदल दिया। फिलिपींस में ताल ज्वालामुखी का गठन नए भू-आकृतियों को जन्म दे रहा है।
निष्कर्ष
See lessइंडोनेशियाई और फिलिपीनी द्वीपसमूहों में हज़ारों द्वीप टेक्टोनिक गतिविधियों और ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण बने हैं, जो इन भौगोलिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों की विशेषता हैं।
Explain the formation of thousands of islands in Indonesian and Philippines archipelagos. (150 words) [UPSC 2014]
Formation of Islands in Indonesian and Philippines Archipelagos Tectonic Plate Activity The Indonesian and Philippine archipelagos are formed due to tectonic plate activity. These regions lie at the convergence of several major tectonic plates, including the Pacific Plate, Indo-Australian Plate, andRead more
Formation of Islands in Indonesian and Philippines Archipelagos
Tectonic Plate Activity
The Indonesian and Philippine archipelagos are formed due to tectonic plate activity. These regions lie at the convergence of several major tectonic plates, including the Pacific Plate, Indo-Australian Plate, and the Eurasian Plate. The movement and interaction of these plates lead to volcanic activity and the formation of islands.
Volcanic Activity
Volcanic activity plays a significant role in island formation. In the Indonesian Archipelago, islands like Sumatra and Java are formed from volcanic eruptions along the Ring of Fire, where the Pacific Plate subducts beneath the Indo-Australian Plate. Similarly, in the Philippines, islands like Luzon and Mindanao are created through volcanic eruptions and tectonic uplift.
Recent Examples
The eruption of Krakatoa in 1883, which caused a massive volcanic explosion, significantly reshaped the Indonesian islands. In the Philippines, the formation of Taal Volcano has led to the creation of several new landforms in the region.
Conclusion
See lessThe thousands of islands in the Indonesian and Philippine archipelagos are primarily the result of complex tectonic interactions and volcanic activity in these seismically active regions.
क्या कारण है कि संसार का वलित पर्वत (फोल्डेड माउन्टेन) तंत्र महाद्वीपों के सीमांतों के साथ-साथ अवस्थित है ? वलित पर्वतों के वैश्विक वितरण और भूकंपों एवं ज्वालामुखियों के बीच साहचर्य को उजागर कीजिए । (150 words) [UPSC 2014]
वलित पर्वत तंत्र का महाद्वीपीय सीमांतों पर अवस्थित होना महाद्वीपीय सीमांतों पर स्थिति वलित पर्वत तंत्र महाद्वीपों के सीमांतों पर स्थित होते हैं क्योंकि ये स्थान टेक्टोनिक प्लेट सीमाओं पर होते हैं। जब दो टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक दूसरे के ऊपर जाती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर दबाव बनता हRead more
वलित पर्वत तंत्र का महाद्वीपीय सीमांतों पर अवस्थित होना
महाद्वीपीय सीमांतों पर स्थिति
वलित पर्वत तंत्र महाद्वीपों के सीमांतों पर स्थित होते हैं क्योंकि ये स्थान टेक्टोनिक प्लेट सीमाओं पर होते हैं। जब दो टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक दूसरे के ऊपर जाती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर दबाव बनता है, जिससे वलन (folding) और पर्वत निर्माण होता है। उदाहरणस्वरूप, हिमालय महाद्वीपीय प्लेटों के टकराने का परिणाम है।
भूकंपों और ज्वालामुखियों के साथ साहचर्य
वलित पर्वत तंत्र भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियों से गहरे जुड़े हुए हैं। टेक्टोनिक सीमाओं पर अत्यधिक भूगर्भीय गतिविधि होती है, जिससे भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। हाल के उदाहरणों में, नेपाल में 2015 का भूकंप और चिली का 2010 का भूकंप शामिल हैं, जो कि हिमालय और एंडीज जैसे वलित पर्वतों के निकट हुआ। इसके अतिरिक्त, जापान में ज्वालामुखी गतिविधि, जैसे कि कुमामोटो ज्वालामुखी, इस साहचर्य को दर्शाती है।
निष्कर्ष
See lessवलित पर्वत तंत्र महाद्वीपीय सीमांतों पर स्थित होते हैं क्योंकि ये स्थान टेक्टोनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होते हैं, जिससे भूकंप और ज्वालामुखियों की घटनाएँ सामान्य होती हैं।
Why are the world’s fold mountain systems located along the margins of continents? Bring out the association between the global distribution of fold mountains and the earthquakes and volcanoes. (150 words) [UPSC 2014]
Fold Mountain Systems and Their Global Distribution Location Along Continental Margins The world's fold mountain systems are primarily located along the margins of continents due to tectonic plate boundaries. These mountains form where tectonic plates converge, causing the Earth's crust to fold andRead more
Fold Mountain Systems and Their Global Distribution
Location Along Continental Margins
The world’s fold mountain systems are primarily located along the margins of continents due to tectonic plate boundaries. These mountains form where tectonic plates converge, causing the Earth’s crust to fold and create mountain ranges. For example, the Himalayas result from the collision between the Indian Plate and the Eurasian Plate.
Association with Earthquakes and Volcanoes
Fold mountain systems are closely associated with earthquakes and volcanoes due to their proximity to tectonic boundaries. The intense geological activity at these boundaries leads to frequent seismic events. For instance, the Ring of Fire, encircling the Pacific Ocean, is a major area of fold mountains, such as the Andes, and is known for high volcanic activity and earthquakes.
Recent Examples
See lessThe Nepal Earthquake of 2015, which caused widespread devastation, occurred along the boundary where the Indian Plate meets the Eurasian Plate, a key region for fold mountains like the Himalayas. Similarly, the Chile Earthquake of 2010 and the volcanic activity in Japan demonstrate the link between fold mountains and tectonic activity.
प्रशासन में सत्यनिष्ठा का दार्शनिक आधार क्या है? आलोचनात्मक विवेचना कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2018]
प्रशासन में सत्यनिष्ठा का दार्शनिक आधार परिचय: सत्यनिष्ठा प्रशासन में उच्च नैतिक मानकों, पारदर्शिता, और ईमानदारी को दर्शाती है। इसका दार्शनिक आधार जनता के कल्याण की सेवा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा में निहित है। **1. नैतिक आधार: सत्यनिष्ठा नैतिक दार्शनिकता पर आधारित होती है, जिसमें ईमानदारी,Read more
प्रशासन में सत्यनिष्ठा का दार्शनिक आधार
परिचय: सत्यनिष्ठा प्रशासन में उच्च नैतिक मानकों, पारदर्शिता, और ईमानदारी को दर्शाती है। इसका दार्शनिक आधार जनता के कल्याण की सेवा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा में निहित है।
**1. नैतिक आधार: सत्यनिष्ठा नैतिक दार्शनिकता पर आधारित होती है, जिसमें ईमानदारी, न्याय, और जवाबदेही पर जोर दिया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक अधिकारी उच्च नैतिक मानकों का पालन करें। RTI अधिनियम (2005) इसका एक उदाहरण है, जो पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
**2. लोकतांत्रिक मूल्य: सत्यनिष्ठा लोकतांत्रिक सिद्धांतों जैसे समानता और न्याय को बनाए रखती है, जिससे सभी नागरिकों को समान रूप से देखा जाए और सत्ता का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाए। नीरव मोदी-PNB घोटाला ने सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की समस्याओं को उजागर किया।
आलोचनात्मक विवेचना: हालांकि सत्यनिष्ठा प्रशासन के लिए आवश्यक है, लेकिन संविधानिक भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। प्रभावी प्रवर्तन तंत्र और संस्थागत सुधार आवश्यक हैं ताकि सत्यनिष्ठा को सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष: प्रशासन में सत्यनिष्ठा का दार्शनिक आधार नैतिक सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है, जो सार्वजनिक प्रशासन की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
See lessWhat is the philosophical basis of probity in the governance? Discuss critically. (125 Words) [UPPSC 2018]
Philosophical Basis of Probity in Governance Introduction: Probity in governance refers to the adherence to high ethical standards, transparency, and integrity in public administration. Its philosophical basis lies in ensuring that governance serves the public good and upholds democratic principles.Read more
Philosophical Basis of Probity in Governance
Introduction: Probity in governance refers to the adherence to high ethical standards, transparency, and integrity in public administration. Its philosophical basis lies in ensuring that governance serves the public good and upholds democratic principles.
**1. Ethical Foundations: Probity is rooted in moral philosophy, emphasizing honesty, fairness, and accountability. It ensures that public officials act with integrity, maintaining public trust. For example, the RTI Act (2005) in India promotes transparency and accountability in governance.
**2. Democratic Values: Probity upholds democratic principles such as equality and justice, ensuring that all citizens are treated fairly and that power is exercised responsibly. The Nirav Modi-PNB fraud case highlights the need for probity to prevent misuse of power and corruption.
Critical Discussion: While probity is essential for good governance, challenges include systemic corruption and bureaucratic inefficiency. Effective enforcement mechanisms and institutional reforms are necessary to uphold probity and ensure that governance serves the public interest effectively.
Conclusion: The philosophical basis of probity in governance is rooted in ethical principles and democratic values, crucial for maintaining trust and effectiveness in public administration.
See lessसरकारी एवं निजी संस्थाओं में नैतिक सरोकरों को परिभाषित कीजिये। (125 Words) [UPPSC 2018]
सरकारी एवं निजी संस्थाओं में नैतिक सरोकरों की परिभाषा परिचय: सरकारी और निजी संस्थाओं में नैतिक सरोकरें वे मुद्दे हैं जो निष्पक्षता, पारदर्शिता, और ईमानदारी से संबंधित हैं और इनका प्रभाव संस्थाओं की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता पर पड़ता है। **1. सरकारी संस्थाएँ: भ्रष्टाचार: रिश्वत और संगठित पक्षपात जनतRead more
सरकारी एवं निजी संस्थाओं में नैतिक सरोकरों की परिभाषा
परिचय: सरकारी और निजी संस्थाओं में नैतिक सरोकरें वे मुद्दे हैं जो निष्पक्षता, पारदर्शिता, और ईमानदारी से संबंधित हैं और इनका प्रभाव संस्थाओं की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता पर पड़ता है।
**1. सरकारी संस्थाएँ:
**2. निजी संस्थाएँ:
निष्कर्ष: सरकारी और निजी दोनों संस्थाओं में नैतिक सरोकरें पारदर्शिता, जवाबदेही, और ईमानदारी से संबंधित हैं, जो विश्वास और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
See lessDefine the ethical concerns in Government and Private Institutions. (125 Words) [UPPSC 2018]
Ethical Concerns in Government and Private Institutions Introduction: Ethical concerns in government and private institutions pertain to principles of fairness, transparency, and integrity in operations and decision-making. **1. Government Institutions: Corruption: Bribery and favoritism undermine pRead more
Ethical Concerns in Government and Private Institutions
Introduction: Ethical concerns in government and private institutions pertain to principles of fairness, transparency, and integrity in operations and decision-making.
**1. Government Institutions:
**2. Private Institutions:
Conclusion: Ethical concerns in both sectors involve transparency, accountability, and integrity, crucial for maintaining trust and effectiveness.
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