दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में सुरक्षा खतरों के स्वरूप और उनकी बारंबारता में वृद्धि के मद्देनजर, इस क्षेत्र में लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के संबंध में भारत द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्दों में उत्तर दीजिए)
'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी, जिसे भारत ने 2014 में शुरू किया, सुदूर पूर्व एशिया के प्रति अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को पुनः परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का उद्देश्य भारत और सुदूर पूर्व एशियाई देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक, और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है। सुदूर पूर्व, जिसमें म्यांमाRead more
‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी, जिसे भारत ने 2014 में शुरू किया, सुदूर पूर्व एशिया के प्रति अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को पुनः परिभाषित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का उद्देश्य भारत और सुदूर पूर्व एशियाई देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक, और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है। सुदूर पूर्व, जिसमें म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, और अन्य देशों शामिल हैं, भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी का एक प्रमुख भाग है।
भारत के सुदूर पूर्व क्षेत्र के प्रति महत्व:
- आर्थिक अवसर: सुदूर पूर्व एशिया तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है, और इसमें व्यापार, निवेश, और बुनियादी ढांचे के विकास के बड़े अवसर मौजूद हैं। भारत ने इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, व्यापारिक संपर्कों को सुधारने, और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
- सामरिक हित: भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी का एक भाग क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन को बनाए रखना भी है। चीन की बढ़ती उपस्थिति और प्रभाव को चुनौती देने के लिए, भारत ने सुदूर पूर्व में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को बढ़ाने का प्रयास किया है।
- सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध: भारत और सुदूर पूर्व एशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं, जो क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने में सहायक हैं।
विद्यमान बाधाएँ:
- भौगोलिक दूरी: भारत और सुदूर पूर्व एशिया के बीच भौगोलिक दूरी और सीमित कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे के विकास को प्रभावित करती है, जो व्यापार और संपर्क में बाधक हो सकती है।
- आंतरिक और क्षेत्रीय संघर्ष: सुदूर पूर्व एशिया में आंतरिक संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे, भारत के निवेश और सुरक्षा साझेदारी को चुनौती दे सकते हैं।
- चीन की प्रतिस्पर्धा: चीन की बढ़ती उपस्थिति और प्रभाव, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के विकास में, भारत की रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं के साथ टकराव उत्पन्न कर सकता है।
इन बाधाओं को पार करने और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को साकार करने के लिए, भारत को सुदूर पूर्व एशिया के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार मजबूत करना होगा। ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी के तहत की गई पहलें, इस क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने और उसकी समग्र रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक होंगी।
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दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) शामिल हैं जैसे मालदीव, सेशेल्स, और मॉरीशस, सुरक्षा और पर्यावरणीय खतरों का सामना कर रहा है। इन द्वीपीय देशों को समुद्री अपराध, जलवायु परिवर्तन, और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत, एक प्Read more
दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें लघु द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) शामिल हैं जैसे मालदीव, सेशेल्स, और मॉरीशस, सुरक्षा और पर्यावरणीय खतरों का सामना कर रहा है। इन द्वीपीय देशों को समुद्री अपराध, जलवायु परिवर्तन, और समुद्री संसाधनों के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत, एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में, इन देशों के साथ सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत की भूमिका:
इन प्रयासों के माध्यम से, भारत ने दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा मिला है।
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