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How many Sangh Rajyas are mentioned in Kautilya's Arthashastra?
Kautilya's Arthashastra mentions 16 Sangh Rajyas, or confederacies, highlighting the political organization and alliances in ancient Indian society.
Kautilya’s Arthashastra mentions 16 Sangh Rajyas, or confederacies, highlighting the political organization and alliances in ancient Indian society.
See lessसौदायिक एवं असौदायिक से क्या तात्पर्य है?
सौदायिक अच्छे कर्मों को दर्शाता है, जबकि असौदायिक गलत और अनैतिक कर्मों को संदर्भित करता है। दोनों नैतिकता को प्रभावित करते हैं।
सौदायिक अच्छे कर्मों को दर्शाता है, जबकि असौदायिक गलत और अनैतिक कर्मों को संदर्भित करता है। दोनों नैतिकता को प्रभावित करते हैं।
See lessWhat are Saudayika and Asaudayika?
Saudayika refers to virtuous actions aligned with Dharma, while Asaudayika encompasses actions contrary to moral principles. Both influence ethical behavior.
Saudayika refers to virtuous actions aligned with Dharma, while Asaudayika encompasses actions contrary to moral principles. Both influence ethical behavior.
See lessभारत जैसे लोकतांत्रिक देश के संदर्भ में संविधान के महत्व की व्याख्या करें। (150 words)
संविधान किसी भी लोकतांत्रिक देश की नींव होता है, और भारत का संविधान इस संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। यह देश के मूलभूत अधिकारों, कर्तव्यों और इसके राजनीतिक ढांचे का निर्धारण करता है। भारतीय संविधान, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। यह संविधान नागरिकों को समानता, स्Read more
संविधान किसी भी लोकतांत्रिक देश की नींव होता है, और भारत का संविधान इस संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। यह देश के मूलभूत अधिकारों, कर्तव्यों और इसके राजनीतिक ढांचे का निर्धारण करता है। भारतीय संविधान, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
यह संविधान नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, और न्याय का अधिकार देता है। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है। संविधान के माध्यम से न्यायपालिका, कार्यपालिका, और विधायिका के बीच संतुलन स्थापित किया गया है, जिससे किसी एक शक्ति का अत्यधिक प्रभाव नहीं बढ़ता।
संविधान के महत्व का एक और उदाहरण है, अनुच्छेद 32 जो नागरिकों को सर्वोच्च न्यायालय में अपनी स्वतंत्रता के उल्लंघन के खिलाफ याचिका दायर करने का अधिकार देता है। इस प्रकार, संविधान भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थिर और सशक्त बनाता है।
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