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कला एवं वास्तुकला के क्षेत्र में मुगल शासकों के योगदान का परीक्षण कीजिए। [उत्तर सीमा: 125 शब्द] [UKPSC 2023]
मुगल शासकों ने कला और वास्तुकला के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया, जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वास्तुकला: मुगलों ने सुंदर और भव्य इमारतें बनवाईं, जैसे ताजमहल, जो प्रेम का प्रतीक है। आगरा का लाल किला और फतेहपुर सीकरी उनकी वास्तुशिल्प क्षमता का प्रमाण हैं। फारसी और भारतीय शैRead more
मुगल शासकों ने कला और वास्तुकला के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया, जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस प्रकार, मुगलों का योगदान कला और वास्तुकला के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्टता और रचनात्मकता का प्रतीक है।
See lessAccording to Dr. K.R. Qanungo, Sher Shah was a constructive genius and a better nation builder than Akbar the Great. Discuss. [Answer Limit: 125 words] [UKPSC 2023]
According to Dr. K.R. Qanungo, Sher Shah Suri was a constructive genius and arguably a better nation builder than Akbar the Great due to his innovative policies and administrative reforms. Sher Shah implemented a robust administrative framework, establishing a centralized system that improved governRead more
According to Dr. K.R. Qanungo, Sher Shah Suri was a constructive genius and arguably a better nation builder than Akbar the Great due to his innovative policies and administrative reforms.
Sher Shah implemented a robust administrative framework, establishing a centralized system that improved governance. He introduced the decimal revenue system, which made tax collection more efficient and fair, benefiting the agrarian economy.
His emphasis on infrastructure development, particularly the construction of the Grand Trunk Road, facilitated trade and communication, enhancing economic prosperity.
Additionally, Sher Shah’s efforts in maintaining law and order and his focus on justice established a sense of stability.
While Akbar is often celebrated for his cultural and religious tolerance, Sher Shah’s practical and immediate reforms laid the groundwork for a unified and prosperous state, showcasing his nation-building capabilities.
See lessडॉ. के. आर. कानूनगो के अनुसार शेरशाह एक रचनात्मक प्रतिभावान एवं अकबर महान से अच्छा राष्ट्र निर्माता था। व्याख्या कीजिए । [उत्तर सीमा: 125 शब्द] [UKPSC 2023]
डॉ. के. आर. कानूनगो के अनुसार, शेरशाह सूरी एक रचनात्मक प्रतिभावान और उत्कृष्ट राष्ट्र निर्माता थे, जो अकबर महान से भी अधिक प्रभावी सिद्ध हुए। शेरशाह ने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जैसे सड़क और परिवहन का विकास। उन्होंने प्रमुख सड़कों का निर्माण किया, जिससे व्यापार और यात्रा को सुगम बनायRead more
डॉ. के. आर. कानूनगो के अनुसार, शेरशाह सूरी एक रचनात्मक प्रतिभावान और उत्कृष्ट राष्ट्र निर्माता थे, जो अकबर महान से भी अधिक प्रभावी सिद्ध हुए।
शेरशाह ने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जैसे सड़क और परिवहन का विकास। उन्होंने प्रमुख सड़कों का निर्माण किया, जिससे व्यापार और यात्रा को सुगम बनाया गया।
इसके अलावा, उन्होंने अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कर प्रणाली में सुधार किया, जिससे किसानों को राहत मिली।
शेरशाह ने कानून और व्यवस्था को स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे समाज में स्थिरता बनी।
उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक नीतियों ने एक समावेशी राष्ट्र की नींव रखी।
इस प्रकार, शेरशाह का दूरदर्शी नेतृत्व और रचनात्मक दृष्टिकोण उन्हें एक महान राष्ट्र निर्माता बनाता है।
See lessWhat were the reasons of Ibrahim Lodi's defeat in the battle of Panipat? [Answer Limit: 125 words] [UKPSC 2023]
Ibrahim Lodi's defeat in the Battle of Panipat (1526) can be attributed to several key factors: Weak Leadership: Ibrahim’s leadership faced significant challenges, leading to discontent among his troops and lack of cohesive strategy. Babar’s Military Strategy: Babar employed effective tactics, incluRead more
Ibrahim Lodi’s defeat in the Battle of Panipat (1526) can be attributed to several key factors:
These factors combined led to Ibrahim Lodi’s decisive defeat.
See lessपानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी की पराजय के क्या कारण थे ? [उत्तर सीमा: 125 शब्द] [UKPSC 2023]
पानीपत के युद्ध (1526) में इब्राहिम लोदी की पराजय के कई कारण थे: सैनिक असंतोष: इब्राहिम लोदी के अधीन सैनिकों में असंतोष और कमजोर नेतृत्व था, जिससे उनकी लड़ने की क्षमता प्रभावित हुई। बाबर की रणनीति: बाबर ने कुशल सैन्य रणनीति अपनाई, जिसमें तोपखाने का प्रभावी उपयोग और ऊँचाई पर तैनात सैनिक शामिल थे। सहयRead more
पानीपत के युद्ध (1526) में इब्राहिम लोदी की पराजय के कई कारण थे:
इन सभी कारणों ने मिलकर इब्राहिम लोदी की हार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
See less'Arthashastra' of Kautilya is definitely related to Maurya period, but what was its content? [Answer Limit: 125 words] [UKPSC 2023]
Kautilya's 'Arthashastra' is a foundational text on statecraft, economics, and political theory from the Maurya period. Its content covers a wide range of topics, including: State Administration: Guidelines for effective governance, including the roles and responsibilities of rulers and officials. ERead more
Kautilya’s ‘Arthashastra’ is a foundational text on statecraft, economics, and political theory from the Maurya period. Its content covers a wide range of topics, including:
Overall, ‘Arthashastra’ provides a pragmatic approach to ruling and managing a kingdom, focusing on both practical governance and the ethical implications of power.
See lessकौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' का सम्बन्ध मौर्य काल से अवश्य रहा, परन्तु उसका विषय क्या था ? [उत्तर सीमा: 125 शब्द] [UKPSC 2023]
कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' मौर्य काल के संदर्भ में राजनीतिक और आर्थिक सिद्धांतों का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसका मुख्य विषय राज्य प्रबंधन, प्रशासन, और अर्थव्यवस्था से संबंधित है। 'अर्थशास्त्र' में कौटिल्य ने शासन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कानून, कराधान, युद्ध, और शांति नीति का विश्लेषण किया है। यह ग्रंथRead more
कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ मौर्य काल के संदर्भ में राजनीतिक और आर्थिक सिद्धांतों का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसका मुख्य विषय राज्य प्रबंधन, प्रशासन, और अर्थव्यवस्था से संबंधित है।
‘अर्थशास्त्र’ में कौटिल्य ने शासन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कानून, कराधान, युद्ध, और शांति नीति का विश्लेषण किया है। यह ग्रंथ बताता है कि कैसे एक राजा को अपनी प्रजा और राज्य की समृद्धि के लिए कुशलता से शासन करना चाहिए।
इसके अलावा, इसमें कूटनीति, सैन्य रणनीतियाँ, और आर्थिक विकास की तकनीकें भी शामिल हैं। कौटिल्य ने राजनीतिक शक्ति को सुरक्षित रखने और विकसित करने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किया, जिससे यह ग्रंथ भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया।
See lessWhat were the causes of the downfall of Buddhism? Discuss. [Answer Limit: 125 words] [UKPSC 2023]
The downfall of Buddhism in India resulted from several factors: Loss of Royal Patronage: With the decline of powerful Buddhist kings, such as the Mauryas, support waned, leading to reduced resources for monasteries and institutions. Hindu Revival: Hinduism underwent significant reform and revitalizRead more
The downfall of Buddhism in India resulted from several factors:
These factors collectively contributed to Buddhism’s decline in its homeland.
See lessबौद्ध धर्म के पतन के क्या कारण थे ? व्याख्या कीजिए । [उत्तर सीमा: 125 शब्द] [UKPSC 2023]
बौद्ध धर्म के पतन के कई कारण रहे। सामाजिक परिवर्तन: समय के साथ, बौद्ध धर्म का समर्थन करने वाले राजाओं और सामंतों की कमी हुई। जैन धर्म और हिंदू धर्म ने पुनः लोकप्रियता प्राप्त की। धार्मिक प्रतिस्पर्धा: हिंदू धर्म ने अपने भीतर सुधार और पुनर्जागरण की प्रक्रिया अपनाई, जिससे कई बौद्ध अनुयायी हिंदू धर्म कRead more
बौद्ध धर्म के पतन के कई कारण रहे।
इन सभी कारणों ने मिलकर बौद्ध धर्म के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
See lessCompare Rigvedic and Later Vedic Period in short. [Answer Limit: 125 words] [UKPSC 2023]
The Rigvedic period (circa 1500-1200 BCE) is characterized by the composition of the Rigveda, focusing on hymns dedicated to deities, rituals, and nature. Society was primarily tribal and pastoral, with a strong emphasis on agriculture and cattle-rearing. In contrast, the Later Vedic period (circa 1Read more
The Rigvedic period (circa 1500-1200 BCE) is characterized by the composition of the Rigveda, focusing on hymns dedicated to deities, rituals, and nature. Society was primarily tribal and pastoral, with a strong emphasis on agriculture and cattle-rearing.
In contrast, the Later Vedic period (circa 1200-600 BCE) saw the emergence of other Vedas (Yajurveda, Samaveda, Atharvaveda) and the development of complex social structures, including the establishment of the varna system. Urbanization and trade flourished, and philosophical thought expanded with the rise of the Upanishads, which explored metaphysical concepts and the nature of the self.
In summary, while the Rigvedic period focused on religious and natural themes, the Later Vedic period emphasized social organization and philosophical inquiry.
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