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क्या 'साधन' साध्य को प्रमाणित करता है? टिप्पणी कीजिए ।
क्या 'साधन' साध्य को प्रमाणित करता है? यह प्रश्न नैतिकता का एक महत्वपूर्ण विषय है। साधनों का औचित्य सिद्ध करने के लिए दो दृष्टिकोण प्रमुख हैं। 1. उपयोगितावादी दृष्टिकोण उपयोगितावादी दृष्टिकोण के अनुसार, यदि साध्य का परिणाम समाज के लिए कल्याणकारी है, तो साधन सही हो सकते हैं। उदाहरण: किसी संकट में झूठRead more
क्या ‘साधन’ साध्य को प्रमाणित करता है?
यह प्रश्न नैतिकता का एक महत्वपूर्ण विषय है। साधनों का औचित्य सिद्ध करने के लिए दो दृष्टिकोण प्रमुख हैं।
1. उपयोगितावादी दृष्टिकोण
2. कर्तव्य आधारित दृष्टिकोण
3. समन्वय का महत्त्व
लोक प्रशासन के बारे में कौटिल्य के विचारों की चर्चा कीजिए ।
कौटिल्य के लोक प्रशासन पर विचार कौटिल्य, जिन्हें चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है, ने "अर्थशास्त्र" में शासन और प्रशासन के सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके विचार प्रशासनिक कार्यों, नीति निर्धारण, और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित थे। मुख्य विचार प्रशासन की आवश्यकता: कौटिल्य ने एक सुव्यवस्थित प्रशासन को समाजRead more
कौटिल्य के लोक प्रशासन पर विचार
कौटिल्य, जिन्हें चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है, ने “अर्थशास्त्र” में शासन और प्रशासन के सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके विचार प्रशासनिक कार्यों, नीति निर्धारण, और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित थे।
मुख्य विचार
प्रशासनिक सिद्धांत
कौटिल्य के सिद्धांत वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए भी उपयोगी हैं।
See lessविवेकानंद के 'सार्वभौमिक धर्म' की प्रमुख विशेषताएँ बताइए ।
विवेकानंद के 'सार्वभौमिक धर्म' की प्रमुख विशेषताएँ विवेकानंद का सार्वभौमिक धर्म सभी धर्मों की अच्छाइयों को अपनाकर, मानवता के कल्याण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। 1. विविधता में एकता विवेकानंद ने सभी धर्मों को एक ही सत्य के विभिन्न रूप कहा। वे मानते थे कि हर धर्म एक ही सत्य तक पहुँचने के अलग-अलगRead more
विवेकानंद के ‘सार्वभौमिक धर्म’ की प्रमुख विशेषताएँ
विवेकानंद का सार्वभौमिक धर्म सभी धर्मों की अच्छाइयों को अपनाकर, मानवता के कल्याण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
1. विविधता में एकता
विवेकानंद ने सभी धर्मों को एक ही सत्य के विभिन्न रूप कहा। वे मानते थे कि हर धर्म एक ही सत्य तक पहुँचने के अलग-अलग रास्ते हैं।
2. सहिष्णुता और समावेशिता
उनके सार्वभौमिक धर्म का मूल मंत्र सहिष्णुता और समावेशिता है। वे धर्म परिवर्तन की जगह सम्मान और संवाद पर जोर देते थे।
3. व्यवहारिक अध्यात्म
उनका मानना था कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए; उसे समाज की भलाई में भी उपयोग करना चाहिए। उदाहरण: गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा।
4. व्यक्तिगत सशक्तिकरण
विवेकानंद ने हर व्यक्ति में आत्म-विश्वास और आत्म-ज्ञान का महत्व बताया।
उनका यह दृष्टिकोण सभी धर्मों के बीच एकता और सहअस्तित्व को प्रोत्साहित करता है।
See lessक्या बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकते हैं ? टिप्पणी कीजिए ।
क्या बुद्ध का 'अष्टांगिक मार्ग' लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकता है? बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग लोक सेवकों के लिए नैतिकता और दायित्वपूर्ण कार्यों का एक सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह मार्ग लोक सेवा में शांति, ईमानदारी और सेवा भावना को बढ़ावा देता है। 1. सम्यक दृष्टि लोक सेवक नीतियों मेंRead more
क्या बुद्ध का ‘अष्टांगिक मार्ग’ लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकता है?
बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग लोक सेवकों के लिए नैतिकता और दायित्वपूर्ण कार्यों का एक सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह मार्ग लोक सेवा में शांति, ईमानदारी और सेवा भावना को बढ़ावा देता है।
1. सम्यक दृष्टि
लोक सेवक नीतियों में निष्पक्षता रखें और लाभ-हानि से ऊपर उठकर कार्य करें।
2. सम्यक संकल्प
लोक सेवकों को सेवा भावना और सामाजिक न्याय का संकल्प लेना चाहिए। उदाहरण: निर्णयों में जनता का हित सर्वोपरि रखना।
3. सम्यक वाणी
संचार में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखें। इससे जनता का विश्वास बढ़ता है।
4. सम्यक कर्म
कार्यों में अनुशासन और निष्पक्षता होनी चाहिए, जिससे किसी का अहित न हो।
इस प्रकार, अष्टांगिक मार्ग लोक सेवकों को नैतिकता के उच्चतम आदर्शों पर आधारित सेवा प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है।
See lessक्या बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकते हैं ? टिप्पणी कीजिए ।
क्या बुद्ध का 'अष्टांगिक मार्ग' लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकता है? बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग लोक सेवकों के लिए एक आदर्श नैतिक मार्गदर्शक बन सकता है, क्योंकि यह सेवा, सहानुभूति और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देता है। 1. सम्यक वाणी लोक सेवकों को सत्य और सकारात्मक संवाद अपनाना चाहिए। उदाहरण के लिए,Read more
क्या बुद्ध का ‘अष्टांगिक मार्ग’ लोक सेवकों के लिए नैतिक मार्गदर्शक हो सकता है?
बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग लोक सेवकों के लिए एक आदर्श नैतिक मार्गदर्शक बन सकता है, क्योंकि यह सेवा, सहानुभूति और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देता है।
1. सम्यक वाणी
लोक सेवकों को सत्य और सकारात्मक संवाद अपनाना चाहिए। उदाहरण के लिए, वे पारदर्शिता बनाए रख सकते हैं, जिससे जनविश्वास बढ़ता है।
2. सम्यक कर्म
सही कर्म का मतलब है किसी को हानि पहुँचाए बिना कार्य करना। लोक सेवक किसी समुदाय विशेष के अधिकारों की रक्षा करके इसे अमल में ला सकते हैं।
3. सम्यक आजीविका
लोक सेवकों को न्याय और समानता पर आधारित कार्यों का चुनाव करना चाहिए। उदाहरण के लिए, वे ऐसी सेवाओं में काम कर सकते हैं जो समाज के लिए लाभकारी हों।
अष्टांगिक मार्ग नैतिकता को प्राथमिकता देने में सहायक होता है, जो जनता की विश्वासनीयता बनाए रखने में मदद करता है।
See lessलोक सेवकों के लिए 'आचरण संहिता' का महत्त्व बताइए ।
लोक सेवकों के लिए 'आचरण संहिता' का महत्त्व आचरण संहिता लोक सेवकों को उनके कार्यों में नैतिकता, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व बनाए रखने में सहायक होती है। मुख्य बिंदु सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता बढ़ाना आचरण संहिता लोक सेवकों को ईमानदारी से कार्य करने को प्रेरित करती है। उदाहरण: रिश्वत या उपहार लेने पर प्रतRead more
लोक सेवकों के लिए ‘आचरण संहिता’ का महत्त्व
आचरण संहिता लोक सेवकों को उनके कार्यों में नैतिकता, निष्पक्षता और उत्तरदायित्व बनाए रखने में सहायक होती है।
मुख्य बिंदु
आचरण संहिता का पालन जनता का विश्वास बनाए रखने और सुशासन को मजबूत करने में सहायक होता है।
See lessएक लोक सेवक के लिए 'सहिष्णुता' तथा 'कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति' जैसे गुण क्यों आवश्यक होते हैं ?
लोक सेवक में सहिष्णुता और कमजोर वर्गों के प्रति सहानुभूति का महत्व सहिष्णुता सहिष्णुता से लोक सेवक विभिन्न विचारों और संस्कृतियों को समझने में सक्षम होते हैं। इससे समाज में शांति और समन्वय बनाए रखना आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब किसी समुदाय में विवाद होता है, तो सहिष्णुता से युक्त अधिकारी समस्यRead more
लोक सेवक में सहिष्णुता और कमजोर वर्गों के प्रति सहानुभूति का महत्व
इन गुणों से एक लोक सेवक न केवल जनसेवा को प्रभावी ढंग से निभा सकता है, बल्कि समाज में विश्वास और सकारात्मकता भी स्थापित कर सकता है।
See lessएक लोक सेवक में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता एवं समर्पण क्यों आवश्यक होते हैं ?
लोक सेवक में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और समर्पण का महत्व सत्यनिष्ठा लोक सेवक में सत्यनिष्ठा से जनता का विश्वास बढ़ता है और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। उदाहरण के लिए, यदि एक अधिकारी सरकारी धन का सही उपयोग करता है, तो इससे संसाधन जनता के हित में ही खर्च होते हैं। निष्पक्षता निष्पक्षता से सभी नागरिकों कोRead more
लोक सेवक में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और समर्पण का महत्व
इन मूल्यों से जनता का विश्वास और सरकार की विश्वसनीयता बढ़ती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
See lessसंवेगात्मक बुद्धि के प्रमुख घटकों की चर्चा कीजिए ।
संवेगात्मक बुद्धि के प्रमुख घटक संवेगात्मक बुद्धि (EQ) के प्रमुख घटक व्यक्ति की भावनाओं को समझने, नियंत्रित करने और संबंध सुधारने में सहायक होते हैं: स्वयं की पहचान अपनी भावनाओं को पहचानना और उनका प्रभाव समझना। उदाहरण: गुस्सा आने पर ठंडे दिमाग से सोचना। स्वयं-नियमन अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना। उदाRead more
संवेगात्मक बुद्धि के प्रमुख घटक
संवेगात्मक बुद्धि (EQ) के प्रमुख घटक व्यक्ति की भावनाओं को समझने, नियंत्रित करने और संबंध सुधारने में सहायक होते हैं:
ये घटक हमारे जीवन और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक संबंध स्थापित करने में सहायक होते हैं।
See lessअभिक्षमता से आप क्या समझते हैं ? विभिन्न अभिक्षमता परीक्षणों की चर्चा कीजिए ।
अभिक्षमता क्या है? अभिक्षमता का अर्थ किसी व्यक्ति की सोचने, समझने, समस्या हल करने और ज्ञान का उपयोग करने की क्षमता से है। यह मापता है कि कोई व्यक्ति कितनी जल्दी और कुशलता से नई जानकारी सीख सकता है और उसे उपयोग में ला सकता है। अभिक्षमता परीक्षणों के प्रकार अभिक्षमता को परखने के लिए कई प्रकार के परीक्Read more
अभिक्षमता क्या है?
अभिक्षमता का अर्थ किसी व्यक्ति की सोचने, समझने, समस्या हल करने और ज्ञान का उपयोग करने की क्षमता से है। यह मापता है कि कोई व्यक्ति कितनी जल्दी और कुशलता से नई जानकारी सीख सकता है और उसे उपयोग में ला सकता है।
अभिक्षमता परीक्षणों के प्रकार
अभिक्षमता को परखने के लिए कई प्रकार के परीक्षण किए जाते हैं:
ये परीक्षण व्यक्ति के जीवन में उनकी सीखने और समझने की क्षमता का एक महत्वपूर्ण मापदंड हैं।
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