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दो मुद्दे लिखिए जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के क्षेत्राधिकार से बाहर के मुद्दे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, NHRC के कुछ स्पष्ट क्षेत्राधिकार की सीमाएँ हैं। यहाँ दो प्रमुख मुद्दे दिए गए हैं जो NHRC के क्षेत्राधिकार से बाहर हRead more
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के क्षेत्राधिकार से बाहर के मुद्दे
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, NHRC के कुछ स्पष्ट क्षेत्राधिकार की सीमाएँ हैं। यहाँ दो प्रमुख मुद्दे दिए गए हैं जो NHRC के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं:
1. विधिक मामलों और अदालती प्रकरण
NHRC उन मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जो न्यायालय में विचाराधीन हैं। अगर कोई मामला अदालती प्रक्रियाओं के तहत चल रहा है, तो NHRC उस मामले में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
2. नीति कार्यान्वयन और सरकारी योजनाएँ
NHRC का कार्यक्षेत्र सरकारी नीतियों और योजनाओं के कार्यान्वयन पर निगरानी रखना नहीं है। NHRC सिफारिशें कर सकता है और मानवाधिकार उल्लंघनों के उपाय सुझा सकता है, लेकिन वह सीधे तौर पर इन सिफारिशों के कार्यान्वयन को लागू नहीं कर सकता।
निष्कर्ष
NHRC के क्षेत्राधिकार की स्पष्ट सीमाएँ हैं, जिसमें अदालती मामलों में हस्तक्षेप और सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी शामिल नहीं है। NHRC का मुख्य कार्य मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी करना, सिफारिशें करना, और सुधारात्मक उपाय सुझाना है।
See lessWrite down the two issues which are out of jurisdiction of National Human Rights Commission.
Issues Out of Jurisdiction of National Human Rights Commission (NHRC) The National Human Rights Commission (NHRC) of India plays a crucial role in the protection and promotion of human rights. However, there are specific issues and areas that fall outside its jurisdiction. Understanding these limitaRead more
Issues Out of Jurisdiction of National Human Rights Commission (NHRC)
The National Human Rights Commission (NHRC) of India plays a crucial role in the protection and promotion of human rights. However, there are specific issues and areas that fall outside its jurisdiction. Understanding these limitations is essential for both the effective functioning of the NHRC and the proper redressal of human rights grievances. Below are two significant issues that are out of the NHRC’s jurisdiction:
1. Judicial Matters and Subjudice Cases
The NHRC does not have jurisdiction over issues that are currently under adjudication in courts of law. This means that if a matter is subjudice, or actively being considered by a court, the NHRC cannot intervene or issue directives related to that case.
2. Issues Related to Policy Implementation
The NHRC’s mandate does not extend to overseeing or implementing government policies and schemes. While the NHRC can recommend improvements and suggest measures to address human rights violations, it does not have the authority to enforce or implement these recommendations directly.
Conclusion
Understanding the jurisdictional limits of the NHRC is crucial for effective redressal of human rights issues. The NHRC is not empowered to intervene in matters already being judicially adjudicated or to enforce policies directly. Its role is to monitor, recommend, and suggest measures to safeguard human rights, while the implementation and judicial matters fall outside its purview.
See lessनीति आयोग के सात स्तम्भों का उल्लेख कीजिए।
नीति आयोग के सात स्तम्भ नीति आयोग, जिसे भारत सरकार ने 2015 में स्थापित किया था, का उद्देश्य देश के विकास को प्रोत्साहित करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त रणनीतिक ढांचा प्रदान करना है। इसके कामकाज को सात प्रमुख स्तम्भों के चारों ओर व्यवस्थित किया गया है। ये सात स्तम्भ निम्नलिखित हैRead more
नीति आयोग के सात स्तम्भ
नीति आयोग, जिसे भारत सरकार ने 2015 में स्थापित किया था, का उद्देश्य देश के विकास को प्रोत्साहित करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त रणनीतिक ढांचा प्रदान करना है। इसके कामकाज को सात प्रमुख स्तम्भों के चारों ओर व्यवस्थित किया गया है। ये सात स्तम्भ निम्नलिखित हैं:
1. साझा दृष्टिकोण विकसित करना
नीति आयोग का पहला स्तम्भ राष्ट्रीय विकास के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना है। इसका मतलब है कि सभी हिस्सों के साथ मिलकर एक समग्र विकास योजना बनाना।
2. सहकारी संघवाद को प्रोत्साहित करना
नीति आयोग संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। यह राज्यों के बीच विचारों और संसाधनों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है।
3. रणनीतिक नीतियाँ डिजाइन और लागू करना
यह स्तम्भ महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के लिए रणनीतिक नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करता है।
4. नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना
नीति आयोग नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है, जिससे एक उद्यमशीलता की संस्कृति का विकास हो सके।
5. सतत विकास को प्रोत्साहित करना
यह स्तम्भ पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक आयामों को नीति योजना और कार्यान्वयन में शामिल करता है।
6. संस्थानों और शासन को सुदृढ़ करना
नीति आयोग सार्वजनिक संस्थानों की दक्षता और प्रभावशीलता को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करता है।
7. क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास
नीति आयोग क्षमता निर्माण और मानव संसाधन के विकास को प्रोत्साहित करता है ताकि नीतियों और कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष
नीति आयोग के सात स्तम्भ—साझा दृष्टिकोण विकसित करना, सहकारी संघवाद को प्रोत्साहित करना, रणनीतिक नीतियाँ डिजाइन और लागू करना, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, सतत विकास को प्रोत्साहित करना, संस्थानों और शासन को सुदृढ़ करना, और क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास—भारत के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये स्तम्भ भारत की विकास यात्रा को दिशा देने और एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए आधार प्रदान करते हैं।
See lessMention the seven pillars of NITI Aayog.
The Seven Pillars of NITI Aayog NITI Aayog, the National Institution for Transforming India, was established to foster cooperative federalism and promote economic development through innovative policies and strategies. Its framework is built around seven key pillars that guide its functioning and obRead more
The Seven Pillars of NITI Aayog
NITI Aayog, the National Institution for Transforming India, was established to foster cooperative federalism and promote economic development through innovative policies and strategies. Its framework is built around seven key pillars that guide its functioning and objectives. Here is a detailed description of these seven pillars, including recent examples to illustrate their relevance:
1. Evolving a Shared Vision for National Development
NITI Aayog works towards creating a common vision for the country’s development through collaborative approaches. This involves setting long-term and short-term goals that align with national priorities.
2. Fostering Cooperative Federalism
NITI Aayog promotes cooperative federalism by encouraging collaboration between the central and state governments. It facilitates the exchange of ideas and resources to address regional disparities and implement policies effectively.
3. Designing and Implementing Strategic Policies
This pillar focuses on formulating and executing strategic policies that address critical issues and drive sustainable development. NITI Aayog plays a crucial role in policy innovation and implementation.
4. Promoting Innovation and Entrepreneurship
Encouraging innovation and entrepreneurship is central to NITI Aayog’s agenda. It supports initiatives that foster a culture of innovation and provide an enabling environment for startups.
5. Encouraging Sustainable Development
NITI Aayog emphasizes sustainable development by integrating environmental, social, and economic dimensions into policy planning and implementation.
6. Strengthening Institutions and Governance
Strengthening institutions and improving governance mechanisms are key objectives of NITI Aayog. It seeks to enhance the efficiency and effectiveness of public institutions.
7. Facilitating Capacity Building and Human Resource Development
NITI Aayog focuses on capacity building and developing human resources to ensure effective implementation of policies and programs.
Conclusion
The seven pillars of NITI Aayog—evolving a shared vision, fostering cooperative federalism, designing and implementing strategic policies, promoting innovation and entrepreneurship, encouraging sustainable development, strengthening institutions and governance, and facilitating capacity building—are fundamental to its role in shaping India’s development trajectory. Through these pillars, NITI Aayog aims to drive inclusive growth, enhance governance, and build a resilient and dynamic economy.
See lessनागरिक समाज के दायरे में क्या शामिल है?
नागरिक समाज के दायरे में शामिल तत्व नागरिक समाज (Civil Society) उन संगठनों, समूहों और संस्थाओं का एक विस्तृत नेटवर्क है जो सरकार और बाजार से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न पहलुओं को सुधारना, अधिकारों की रक्षा करना, और सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करना है। नागरिकRead more
नागरिक समाज के दायरे में शामिल तत्व
नागरिक समाज (Civil Society) उन संगठनों, समूहों और संस्थाओं का एक विस्तृत नेटवर्क है जो सरकार और बाजार से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न पहलुओं को सुधारना, अधिकारों की रक्षा करना, और सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करना है। नागरिक समाज के दायरे में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं:
1. गैर-सरकारी संगठन (NGOs)
गैर-सरकारी संगठन, जो सरकार से स्वतंत्र होते हैं, समाज के विभिन्न मुद्दों पर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, अक्षय पात्र फाउंडेशन भोजन और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, जबकि सेवा इंटरनेशनल आपदा राहत और सामुदायिक विकास में सक्रिय है।
2. सामुदायिक संगठनों (CBOs)
सामुदायिक संगठन स्थानीय स्तर पर काम करते हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान निकालते हैं। हाल ही का उदाहरण है विवेकानंद युथ फाउंडेशन, जो गरीब बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।
3. वकालत और सक्रियतावादी समूह
ये समूह विशेष मुद्दों पर जन जागरूकता बढ़ाते हैं और सरकार की नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। उदाहरण स्वरूप, “स्वच्छ भारत अभियान” ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
4. पेशेवर संघ और श्रम संघ
पेशेवर संघ और श्रम संघ विभिन्न पेशेवर समूहों या श्रमिक वर्गों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करते हैं। हाल ही में, भारतीय श्रम संघ (INTUC) ने श्रमिकों के अधिकारों और न्यायपूर्ण वेतन की मांग की है।
5. धार्मिक और आस्थापंथ आधारित संगठन
ये संगठन धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वासों के आधार पर सामाजिक सेवाएं, मानवीय सहायता, और सामुदायिक समर्थन प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आपदा के समय राहत कार्य किए हैं और सामाजिक सेवाएं प्रदान की हैं।
6. सामाजिक और सांस्कृतिक क्लब
ये क्लब सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामाजिक मेलजोल, और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। उदाहरण के लिए, रोटरी क्लब ने विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सेवा प्रदान की है, जैसे पोलियो उन्मूलन।
7. थिंक टैंक और शोध संस्थान
थिंक टैंक और शोध संस्थान नीति अनुशंसाओं का निर्माण करते हैं, शोध करते हैं, और विशेषज्ञ राय प्रदान करते हैं। उदाहरण के तौर पर, भारतीय सार्वजनिक नीति अनुसंधान संस्थान (CPR) नीति निर्माण और बहस में योगदान करता है।
8. मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता
मीडिया, विशेष रूप से स्वतंत्र पत्रकारिता, जनसंख्या को सूचित करने, सत्ता को जवाबदेह ठहराने, और सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाल ही में, “द वायर” ने सरकारी और कॉर्पोरेट शक्तियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग की है।
निष्कर्ष
नागरिक समाज का दायरा व्यापक है और इसमें विभिन्न प्रकार के संगठन और गतिविधियाँ शामिल हैं जो समाज की बेहतरी, अधिकारों की रक्षा, और सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करती हैं। इन तत्वों के माध्यम से, नागरिक समाज समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
See lessWhat is included in the ambit of civil society?
Understanding the Ambit of Civil Society Civil society refers to the realm of voluntary associations, organizations, and institutions that operate independently from the government and the market. It plays a crucial role in advocating for rights, providing services, and shaping public discourse. HerRead more
Understanding the Ambit of Civil Society
Civil society refers to the realm of voluntary associations, organizations, and institutions that operate independently from the government and the market. It plays a crucial role in advocating for rights, providing services, and shaping public discourse. Here is a detailed examination of what is included in the ambit of civil society, supported by recent examples:
1. Non-Governmental Organizations (NGOs)
NGOs are a cornerstone of civil society. They work on a wide range of issues including human rights, environmental protection, and social justice. For example, organizations like Oxfam and Amnesty International actively campaign against poverty and human rights abuses, respectively. These NGOs mobilize resources, raise awareness, and influence policy at both national and international levels.
2. Community-Based Organizations (CBOs)
CBOs operate at the grassroots level and focus on local issues. They are often involved in activities such as community development, health care, and education. A recent example is the Pratham organization in India, which works towards improving the quality of education and literacy rates in underserved communities.
3. Advocacy and Activist Groups
These groups seek to influence public opinion and government policies on specific issues. They often engage in lobbying, public demonstrations, and awareness campaigns. For instance, the Fridays for Future movement, spearheaded by climate activist Greta Thunberg, has brought global attention to climate change and urged governments to take stronger actions against environmental degradation.
4. Professional Associations and Trade Unions
Professional associations and trade unions represent the interests of specific professions or worker groups. They play a role in advocating for fair labor practices, professional standards, and workers’ rights. A recent example is the Indian National Trade Union Congress (INTUC), which has been actively involved in advocating for workers’ rights and fair wages amidst various labor reforms in India.
5. Religious and Faith-Based Organizations
These organizations provide social services, humanitarian aid, and community support based on their religious or spiritual beliefs. For example, the Sikh humanitarian organization Khalsa Aid has been involved in disaster relief efforts and refugee support in crisis-affected regions like Syria and Ukraine.
6. Social and Cultural Clubs
These clubs engage in activities that promote cultural exchange, social bonding, and community engagement. They can be involved in arts, sports, and various community-building activities. A notable example is the Rotary Club, which conducts numerous service projects globally, focusing on issues such as polio eradication and clean water access.
7. Think Tanks and Research Institutions
Think tanks and research institutions contribute to civil society by generating policy recommendations, conducting research, and providing expert opinions on a range of issues. An example is the Centre for Policy Research (CPR) in India, which conducts research on public policy and contributes to policy formulation and debate.
8. Media and Independent Journalism
The media, including independent journalism, plays a critical role in civil society by informing the public, holding power to account, and facilitating public discourse. Recent examples include investigative journalism outlets like The Wire in India, which have reported on issues such as corruption and government accountability.
Conclusion
The ambit of civil society is broad and encompasses various forms of organization and activity aimed at improving societal conditions, advocating for rights, and enhancing public discourse. From NGOs and community organizations to media and think tanks, each component plays a vital role in shaping a vibrant, participatory society.
See lessस्वतन्त्रता के पश्चात भारत में कितने प्रकार की दलीय व्यवस्था देखी गयी है?
स्वतंत्रता के पश्चात भारत में दलीय व्यवस्था ने विभिन्न चरणों में परिवर्तन देखा है। यहाँ पर प्रमुख दलीय व्यवस्थाओं की सूची दी गई है: 1. एक-पार्टी प्रधिनिधि प्रणाली (One-Party Dominance System) विवरण: स्वतंत्रता के बाद पहले कुछ दशकों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने एक प्रमुख भूमिका निभाई। इस अवधRead more
स्वतंत्रता के पश्चात भारत में दलीय व्यवस्था ने विभिन्न चरणों में परिवर्तन देखा है। यहाँ पर प्रमुख दलीय व्यवस्थाओं की सूची दी गई है:
1. एक-पार्टी प्रधिनिधि प्रणाली (One-Party Dominance System)
विवरण: स्वतंत्रता के बाद पहले कुछ दशकों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने एक प्रमुख भूमिका निभाई। इस अवधि में कांग्रेस का एकाधिकार सा बन गया था और पार्टी की वर्चस्वता के चलते अन्य राजनीतिक दलों की भूमिका सीमित रही।
उदाहरण:
2. बहु-पार्टी प्रणाली (Multi-Party System)
विवरण: 1970 के दशक से भारत में बहु-पार्टी प्रणाली का उदय हुआ। इस समय विभिन्न क्षेत्रीय दलों ने महत्व प्राप्त किया और भारतीय राजनीति में विविधता आ गई।
उदाहरण:
3. कोलिशन राजनीति और विभाजन (Coalition Politics and Fragmentation)
विवरण: 1990 के दशक से लेकर वर्तमान तक भारत में कोलिशन राजनीति का एक नया दौर शुरू हुआ। इस अवधि में कई दलों के बीच गठबंधन की आवश्यकता पड़ी, और केंद्रीय राजनीति में विभिन्न गठबंधन सरकारें बनीं।
उदाहरण:
4. द्विदलीय प्रणाली की ओर प्रवृत्ति (Trend Towards Bipartisan System)
विवरण: हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर एक द्विदलीय प्रणाली की प्रवृत्ति देखी गई है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) प्रमुख दल बन गए हैं, हालांकि क्षेत्रीय दलों का प्रभाव राज्य स्तर पर बना हुआ है।
उदाहरण:
इन विभिन्न दलीय व्यवस्थाओं ने भारतीय राजनीति की जटिलता और विविधता को दर्शाया है और देश की राजनीतिक स्थिति की गहराई को समझने में मदद की है।
See lessHow many types of Party System have been witnessed in India since independence?
In the context of the UPSC Mains examination, understanding the evolution of India's party system is crucial. Since independence, India has witnessed several types of party systems, each marked by distinct political dynamics. Here’s a detailed examination with recent examples: 1. One-Party DominanceRead more
In the context of the UPSC Mains examination, understanding the evolution of India’s party system is crucial. Since independence, India has witnessed several types of party systems, each marked by distinct political dynamics. Here’s a detailed examination with recent examples:
1. One-Party Dominance System
Description: In the early decades post-independence, India experienced a one-party dominance system, predominantly led by the Indian National Congress (INC). During this period, the INC had a commanding presence across most states, establishing a near-hegemony in Indian politics.
Recent Example:
2. Multi-Party System with Dominance of Regional Parties
Description: From the 1970s onwards, India transitioned into a multi-party system. This period saw the rise of regional parties gaining significant influence, thereby reducing the dominance of the national parties. The political landscape became more diverse, with regional parties playing pivotal roles in various states.
Recent Example:
3. Coalition Politics and Fragmentation
Description: From the early 1990s to the present, India has witnessed a significant shift towards coalition politics. This period is characterized by the fragmentation of the political landscape into various regional and national parties that often need to come together to form coalition governments.
Recent Example:
4. Emergence of a Bipartisan System
Description: In recent years, there has been a trend towards a more bipolar system at the national level, where two major parties, primarily the BJP and the Congress, dominate the political arena, though coalition politics still plays a crucial role.
Recent Example:
In summary, India’s party system has evolved from a one-party dominance model to a complex multi-party system characterized by coalition politics and regional party influence. Each phase reflects changing political dynamics and the growing diversity of India’s political landscape.
See lessन्यायिक समीक्षा के तीन महत्व क्या हैं?
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी प्राधिकरण और कानून संविधान के अनुसार हों। इसके तीन प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं: संविधान की रक्षा: न्यायिक समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य संविधान की रक्षा करना है। जब भी किसी कानून, आदेश, या सरकारीRead more
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी प्राधिकरण और कानून संविधान के अनुसार हों। इसके तीन प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
What are the three importances of Judicial Review?
Importance of Judicial Review Introduction Judicial Review is a fundamental principle of the constitutional framework in democracies. It empowers the judiciary to review and, if necessary, invalidate actions of the legislative and executive branches that are inconsistent with the Constitution. ThisRead more
Importance of Judicial Review
Introduction
Judicial Review is a fundamental principle of the constitutional framework in democracies. It empowers the judiciary to review and, if necessary, invalidate actions of the legislative and executive branches that are inconsistent with the Constitution. This mechanism ensures the supremacy of the Constitution and protects individual rights and freedoms.
1. Ensures Constitutional Supremacy
2. Protects Fundamental Rights
3. Maintains Balance of Power
Conclusion
Judicial Review is essential for upholding constitutional supremacy, protecting fundamental rights, and maintaining the balance of power among government branches. Recent examples from India illustrate the judiciary’s role in ensuring that laws and executive actions adhere to constitutional principles and protect individual liberties.
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