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शैलकृत स्थापत्य प्रारंभिक भारतीय कला एवं इतिहास के ज्ञान के अति महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है। विवेचना कीजिए। (250 words) [UPSC 2020]
शैलकृत स्थापत्य का महत्व: प्रारंभिक भारतीय कला एवं इतिहास के स्रोत परिभाषा और महत्व: शैलकृत स्थापत्य, जिसे रॉक-कट आर्किटेक्चर भी कहा जाता है, वह स्थापत्य शैली है जिसमें चट्टानों या पथरों को काटकर या तराशकर भवन, मंदिर, और अन्य संरचनाएँ बनाई जाती हैं। यह प्रारंभिक भारतीय कला और इतिहास के महत्वपूर्ण स्Read more
शैलकृत स्थापत्य का महत्व: प्रारंभिक भारतीय कला एवं इतिहास के स्रोत
परिभाषा और महत्व: शैलकृत स्थापत्य, जिसे रॉक-कट आर्किटेक्चर भी कहा जाता है, वह स्थापत्य शैली है जिसमें चट्टानों या पथरों को काटकर या तराशकर भवन, मंदिर, और अन्य संरचनाएँ बनाई जाती हैं। यह प्रारंभिक भारतीय कला और इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करता है, क्योंकि यह न केवल स्थापत्य कला की विकास यात्रा को दर्शाता है, बल्कि समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक धारणाओं को भी उजागर करता है।
प्रारंभिक भारतीय कला और स्थापत्य के स्रोत:
हाल के उदाहरण:
निष्कर्ष:
शैलकृत स्थापत्य प्रारंभिक भारतीय कला और इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। यह केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि उस समय की सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी प्रगति को भी उजागर करता है। गुफाओं की स्थापत्य कला और उनके चित्रण भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास के विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
See lessभारतीय समाज पारम्परिक सामाजिक मूल्यों में निरंतरता कैसे बनाए रखता है ? इनमें होने वाले परिवर्तनों का विवरण दीजिए। (250 words) [UPSC 2021]
भारतीय समाज पारंपरिक सामाजिक मूल्यों में निरंतरता बनाए रखना और उनके परिवर्तनों का विवरण पारंपरिक सामाजिक मूल्यों में निरंतरता: संस्कार और परंपराएँ: भारतीय समाज में पारंपरिक संस्कार और परंपराएँ जैसे कि अतिथि देवो भवः, परिवार की केंद्रीय भूमिका, और आध्यात्मिकता को विशेष महत्व दिया जाता है। ये मूल्य पीRead more
भारतीय समाज पारंपरिक सामाजिक मूल्यों में निरंतरता बनाए रखना और उनके परिवर्तनों का विवरण
पारंपरिक सामाजिक मूल्यों में निरंतरता:
पारंपरिक मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों का विवरण:
निष्कर्ष:
भारतीय समाज पारंपरिक सामाजिक मूल्यों को निरंतर बनाए रखता है, जो संस्कार, धार्मिक आयोजनों, और संस्थागत परंपराओं के माध्यम से संभव होता है। हालांकि, आर्थिक और सामाजिक बदलाव, महिलाओं का सशक्तिकरण, तकनीकी प्रगति, और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता के चलते इन मूल्यों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे जा रहे हैं। इन परिवर्तनों के साथ संतुलन बनाए रखना और समकालीन संदर्भ में पारंपरिक मूल्यों को पुनर्निर्मित करना भारतीय समाज के लिए एक चुनौती है।
See lessक्रिप्टोकरेंसी क्या है ? वैश्विक समाज को यह कैसे प्रभावित करती है? क्या यह भारतीय समाज को भी प्रभावित कर रही है ? (250 words) [UPSC 2021]
परिभाषा और कार्यप्रणाली: क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या वर्चुअल मुद्रा है, जो क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करके सुरक्षित की जाती है। यह मुद्रा ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है, जो एक वितरित लेज़र होती है और लेन-देन की पारदर्शिता और सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। Bitcoin, Ethereum, और Ripple जैसे प्रमुख क्रिपRead more
परिभाषा और कार्यप्रणाली:
क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या वर्चुअल मुद्रा है, जो क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करके सुरक्षित की जाती है। यह मुद्रा ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है, जो एक वितरित लेज़र होती है और लेन-देन की पारदर्शिता और सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। Bitcoin, Ethereum, और Ripple जैसे प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी उदाहरण हैं।
वैश्विक समाज पर प्रभाव:
भारतीय समाज पर प्रभाव:
निष्कर्ष:
क्रिप्टोकरेंसी एक नई और क्रांतिकारी मुद्रा प्रणाली है जो वैश्विक और भारतीय समाज को आर्थिक, वित्तीय, और नियामक दृष्टिकोण से प्रभावित कर रही है। जबकि यह नवाचार और निवेश के नए अवसर प्रदान करती है, इसके साथ-साथ वित्तीय अपराधों और नियामक अनिश्चितता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं। इन प्रभावों को समझने और प्रबंधित करने के लिए वैश्विक और भारतीय नीति निर्माताओं को सतर्क और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
See lessजनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों की विवेचना करते हुए भारत में इन्हें प्राप्त करने के उपायों पर विस्तृत प्रकाश डालिए । (250 words) [UPSC 2021]
जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों और भारत में इसके प्राप्त करने के उपाय जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों: जनसंख्या वृद्धि को समझना: जनसंख्या शिक्षा का एक मुख्य उद्देश्य है जनसंख्या वृद्धि की दर और इसके प्रभावों को समझाना। यह शिक्षा व्यक्तियों को यह समझने में मदद करती है कि जनसंख्या वृद्धि आर्Read more
जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों और भारत में इसके प्राप्त करने के उपाय
जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों:
भारत में जनसंख्या शिक्षा प्राप्त करने के उपाय:
निष्कर्ष:
जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि की समझ, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन में सुधार, और सतत विकास को प्रोत्साहित करना हैं। भारत में, इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षा कार्यक्रम, विद्यालय पाठ्यक्रम, मीडिया अभियानों, स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, और स्थानीय संगठनों के प्रयास किए जा रहे हैं। इन उपायों की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास और सुधार की आवश्यकता है।
See lessभारत के प्रमुख शहरों में आई.टी. उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं ? (250 words) [UPSC 2021]
भारत के प्रमुख शहरों में आई.टी. उद्योगों के विकास के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव आर्थिक विकास और रोजगार सृजन: आर्थिक वृद्धि: आई.टी. उद्योगों के विकास ने भारत के प्रमुख शहरों में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है। बेंगलुरु, हैदराबाद, और पुणे जैसे शहरों में आई.टी. सेक्टर ने बड़े पैमाने पर निवेश और आय को आकर्षिRead more
भारत के प्रमुख शहरों में आई.टी. उद्योगों के विकास के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
आर्थिक विकास और रोजगार सृजन:
शहरीकरण और जीवनशैली में परिवर्तन:
सामाजिक असमानता और चुनौती:
शिक्षा और कौशल विकास:
निष्कर्ष:
आई.टी. उद्योगों का विकास भारत के प्रमुख शहरों में महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव डालता है। यह आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, और जीवनशैली में सुधार लाता है, लेकिन सामाजिक असमानता और शहरीकरण की चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। इन प्रभावों को संतुलित करने के लिए सतत और समावेशी विकास की रणनीतियाँ अपनाना आवश्यक है।
See lessविश्व में खनिज तेल के असमान वितरण के बहुआयामी प्रभावों की विवेचना कीजिए । (250 words) [UPSC 2021]
विश्व में खनिज तेल के असमान वितरण के बहुआयामी प्रभाव आर्थिक असमानताएँ: आय में विषमताएँ: खनिज तेल के असमान वितरण ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक विषमताएँ पैदा की हैं। मध्य पूर्व, जैसे कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, में खनिज तेल की प्रचुरता ने इन देशों को अत्यधिक समृद्ध बनाया, जबकि अफ्रीका और दRead more
विश्व में खनिज तेल के असमान वितरण के बहुआयामी प्रभाव
आर्थिक असमानताएँ:
राजनीतिक और सामरिक प्रभाव:
पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव:
ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा:
निष्कर्ष:
खनिज तेल का असमान वितरण वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक, पर्यावरणीय, और सामाजिक परिदृश्यों पर व्यापक प्रभाव डालता है। यह आर्थिक विषमताओं, राजनीतिक संघर्षों, और पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देता है, साथ ही ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में नवाचार की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
See lessआर्कटिक की बर्फ़ और अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना किस तरह अलग-अलग ढंग से पृथ्वी पर मौसम के स्वरूप और मनुष्य की गतिविधियों पर प्रभाव डालते हैं? स्पष्ट कीजिए । (250 words) [UPSC 2021]
आर्कटिक की बर्फ़ और अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना: पृथ्वी पर मौसम के स्वरूप और मनुष्य की गतिविधियों पर प्रभाव आर्कटिक की बर्फ़ का पिघलना: मौसम के स्वरूप में परिवर्तन: आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ़ का पिघलना पृथ्वी की ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करता है। आर्कटिक की बर्फ़ की सतह पर सूर्य की ऊर्जा का पराRead more
आर्कटिक की बर्फ़ और अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना: पृथ्वी पर मौसम के स्वरूप और मनुष्य की गतिविधियों पर प्रभाव
आर्कटिक की बर्फ़ का पिघलना:
अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना:
निष्कर्ष:
आर्कटिक की बर्फ़ और अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना पृथ्वी के मौसम स्वरूप और मनुष्यों की गतिविधियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव डालता है। आर्कटिक का पिघलना ऊर्जा संतुलन और समुद्री स्तर को प्रभावित करता है, जबकि अंटार्कटिक के ग्लेशियरों का पिघलना वैश्विक समुद्री स्तर में वृद्धि और मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। इन दोनों क्षेत्रों में पिघलन के प्रभाव को समझना और उनका प्रबंधन करना पर्यावरणीय स्थिरता और मानव सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
See less"दोनों विश्व युद्धों के बीच लोकतंत्रीय राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई।" इस कथन का मूल्यांकन कीजिए। (250 words) [UPSC 2021]
दोनों विश्व युद्धों के बीच लोकतंत्रीय राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता: महामंदी (Great Depression): 1929 में शुरू हुई महामंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को गहरा झटका दिया, जिससे लोकतांत्रिक देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई। अमेरिका और यूरोप में बेरोजगारी और सामाजिRead more
दोनों विश्व युद्धों के बीच लोकतंत्रीय राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती
आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता:
तानाशाही और फासीवाद का उदय:
लोकतंत्र के प्रति अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ:
निष्कर्ष:
दोनों विश्व युद्धों के बीच, लोकतंत्र की प्रणाली ने कई गंभीर चुनौतियाँ झेलीं, जैसे कि आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता, और तानाशाही का उदय। इन चुनौतियों के बावजूद, युद्ध के बाद के वर्षों में लोकतांत्रिक देशों ने लोकतंत्र को पुनर्निर्मित और मजबूत करने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाए। इन प्रयासों ने लोकतांत्रिक प्रणाली को स्थिर और व्यापक रूप से स्वीकार्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
See lessनरमपंथियों की भूमिका ने किस सीमा तक व्यापक स्वतंत्रता आन्दोलन का आधार तैयार किया ? टिप्पणी कीजिए । (250 words) [UPSC 2021]
नरमपंथियों की भूमिका और व्यापक स्वतंत्रता आन्दोलन का आधार नरमपंथियों का उद्देश्य और दृष्टिकोण: संविधानिक सुधार और समन्वय: नरमपंथियों, जिनमें गाँधी, नेहरू, और पटेल जैसे नेता शामिल थे, ने भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन को संवैधानिक सुधारों के माध्यम से गति दी। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के साथ बातचीत और सुधारRead more
नरमपंथियों की भूमिका और व्यापक स्वतंत्रता आन्दोलन का आधार
नरमपंथियों का उद्देश्य और दृष्टिकोण:
विस्तार और प्रभाव:
विरोध और विफलताएँ:
निष्कर्ष:
नरमपंथियों ने भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के आधार को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन उनके दृष्टिकोण की सीमाएँ और क्रांतिकारी प्रतिक्रिया ने इस आन्दोलन को कई मोर्चों पर प्रभावित किया। उनके दृष्टिकोण ने एक संवैधानिक आधार प्रदान किया, जो बाद में क्रांतिकारी और कठोर संघर्ष के साथ मिलकर एक स्वतंत्र भारत के निर्माण की दिशा में योगदान दिया।
See lessभारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया में 'गिग इकोनॉमी' की भूमिका का परीक्षण कीजिए । (150 words)[UPSC 2021]
भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण में 'गिग इकोनॉमी' की भूमिका आर्थिक स्वतंत्रता और रोजगार के अवसर: स्वतंत्र रोजगार: गिग इकोनॉमी ने महिलाओं को पारंपरिक नौकरियों से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर प्रदान किया है। उदाहरण के लिए, फ्रीलांसिंग, वेब डेवलपमेंट, और ग्राफिक डिजाइनिंग जैसी सेवाओं में महिRead more
भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण में ‘गिग इकोनॉमी’ की भूमिका
आर्थिक स्वतंत्रता और रोजगार के अवसर:
सामाजिक और वित्तीय सशक्तिकरण:
सुरक्षा और कानूनी मुद्दे:
इस प्रकार, गिग इकोनॉमी ने भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन इसके साथ-साथ कई चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें समर्पित नीतियों और समर्थन से संबोधित करने की आवश्यकता है।
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