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किसानों के जीवन मानकों को उन्नत करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी किस प्रकार सहायता कर सकती है? (250 words) [UPSC 2019]
जैव प्रौद्योगिकी द्वारा किसानों के जीवन मानकों में सुधार 1. उन्नत फसलों की किस्में: उद्देश्य: जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्नत फसल किस्मों का विकास कर उत्पादकता और पोषण में सुधार किया जा सकता है। हालिया उदाहरण: बीटी कपास ने कीट-प्रतिरोधी किस्में प्रदान की हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि और कीटनाशकोRead more
जैव प्रौद्योगिकी द्वारा किसानों के जीवन मानकों में सुधार
1. उन्नत फसलों की किस्में:
2. पारिस्थितिकीय तनाव से निपटने में मदद:
3. आधुनिक कृषि तकनीकों का एकीकरण:
4. पोषण संवर्धन:
5. फसल संरक्षण और बीमारियों का नियंत्रण:
6. आर्थिक लाभ और लाभप्रदता में वृद्धि:
निष्कर्ष: जैव प्रौद्योगिकी कृषि में फसल उत्पादन, पारिस्थितिकीय तनाव, पोषण, फसल संरक्षण, और आर्थिक लाभ में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके माध्यम से किसानों के जीवन मानकों में संतुलित वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार संभव हो रहा है।
See lessफार्मास्युटिकल्स कंपनियों के द्वारा आयुर्विज्ञान के पारंपरिक ज्ञान को पेटेंट कराने से भारत सरकार किस प्रकार रक्षा कर रही है? (250 words) [UPSC 2019]
भारत सरकार द्वारा पारंपरिक आयुर्विज्ञान ज्ञान की रक्षा के उपाय 1. पेटेंट कानूनों में संशोधन: संविधानिक उपाय: भारत ने पेटेंट अधिनियम, 1970 में संशोधन कर पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक वस्त्रों की रक्षा के लिए प्रावधान किए हैं। प्राकृतिक पदार्थों और पारंपरिक ज्ञान को पेटेंट की रक्षा में अधिकार नहीं मिलRead more
भारत सरकार द्वारा पारंपरिक आयुर्विज्ञान ज्ञान की रक्षा के उपाय
1. पेटेंट कानूनों में संशोधन:
2. खगोलिय डेटाबेस और दस्तावेज़ीकरण:
3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझौते:
4. आयुष मंत्रालय और अनुसंधान:
5. प्रवर्तन और निगरानी:
निष्कर्ष: भारत सरकार ने पारंपरिक आयुर्विज्ञान के ज्ञान को पेटेंटिंग से बचाने के लिए कानूनी, डॉक्यूमेंटेशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और अनुसंधान उपाय अपनाए हैं। ये कदम पारंपरिक ज्ञान की रक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर इसके प्रवर्तन और सुरक्षा को भी सक्षम बनाते हैं.
See lessखाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रक की चुनौतियों के समाधान हेतु भारत सरकार द्वारा अपनाई गई नीति को सविस्तार स्पष्ट कीजिए। (250 words) [UPSC 2019]
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान हेतु भारत सरकार द्वारा अपनाई गई नीति 1. राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति: नीति का उद्देश्य: भारत सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को संवर्धित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति (NFPP) लागू की है। इसका लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ानRead more
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान हेतु भारत सरकार द्वारा अपनाई गई नीति
1. राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति:
2. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन:
3. प्रोसेसिंग पार्क और क्लस्टर डेवलपमेंट:
4. वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी:
5. मास्टर प्लान और नीति सुधार:
6. स्मार्ट टेक्नोलॉजी और अनुसंधान:
निष्कर्ष: भारत सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करने के लिए समग्र नीति अपनाई है, जिसमें प्रोसेसिंग पार्क, वित्तीय प्रोत्साहन, नीति सुधार, और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के उपयोग शामिल हैं। ये उपाय क्षेत्र के विकास और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
See lessWhat are the reformative steps taken by the Government to make food grain distribution system more effective? (250 words) [UPSC 2019]
Reformative Steps in Food Grain Distribution System 1. Introduction of Direct Benefit Transfer (DBT): Objective: The Direct Benefit Transfer (DBT) scheme aims to ensure that subsidies and benefits reach the intended beneficiaries directly into their bank accounts, reducing leakages and corruption. RRead more
Reformative Steps in Food Grain Distribution System
1. Introduction of Direct Benefit Transfer (DBT):
2. Implementation of One Nation, One Ration Card (ONORC):
3. Technological Upgradation:
4. Strengthening of the National Food Security Act (NFSA):
5. State-Level Initiatives:
6. Food Fortification and Nutritional Support:
Conclusion: The Indian government has undertaken various reformative steps to enhance the effectiveness of the food grain distribution system. These measures aim to improve transparency, reach, and efficiency while addressing nutritional needs and ensuring that benefits reach the intended beneficiaries effectively.
See lessThe public expenditure management is a challenge to the Government of India in the context of budget making during the post-liberalization period. Clarify it.(250 words) [UPSC 2019]
Public Expenditure Management Post-Liberalization 1. Context of Post-Liberalization Period: Economic Liberalization: The post-liberalization era in India, starting in the early 1990s, brought significant economic reforms aimed at enhancing market efficiency and global competitiveness. This period saRead more
Public Expenditure Management Post-Liberalization
1. Context of Post-Liberalization Period:
2. Challenges in Public Expenditure Management:
3. Recent Examples:
4. Measures to Address Challenges:
In conclusion, managing public expenditure in the post-liberalization period requires balancing economic growth, social needs, and fiscal discipline while adapting to changing economic dynamics and ensuring effective use of resources.
See lessयह तर्क दिया जाता है कि समावेशी संवृद्धि की रणनीति का आशय एकसाथ समावेशिता और धारणीयता के उद्देश्यों को प्राप्त किया जाना है। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए। (250 words) [UPSC 2019]
समावेशी संवृद्धि की रणनीति: समावेशिता और धारणीयता का समन्वय 1. समावेशी संवृद्धि का आशय: समावेशी संवृद्धि एक ऐसी रणनीति है जिसका उद्देश्य सभी सामाजिक और आर्थिक वर्गों को विकास की धारा में शामिल करना है। इसका लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता और धारणीयता को भी सुनिश्चित करना है।Read more
समावेशी संवृद्धि की रणनीति: समावेशिता और धारणीयता का समन्वय
1. समावेशी संवृद्धि का आशय:
2. समावेशिता की दिशा:
3. धारणीयता की दिशा:
4. प्रासंगिक उदाहरण:
5. चुनौतियाँ और समाधान:
समावेशी संवृद्धि की रणनीति समाज और पर्यावरण दोनों की धारणीयता को सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी वर्गों को विकास की धारा में शामिल करने की दिशा में एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।
See lessसाइबरडोम परियोजना क्या है? स्पष्ट कीजिए कि भारत में इंटरनेट अपराधों को नियंत्रित करने में यह किस प्रकार उपयोगी हो सकता है। (150 words) [UPSC 2019]
साइबरडोम परियोजना 1. परियोजना का विवरण: साइबरडोम एक सुरक्षा समाधान है, जिसे केरल पुलिस ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध और इंटरनेट सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय और संगठित प्रयास को बढ़ावा देना है। यह परियोजना साइबर अपराधों के विश्लेषण, रिस्पांस और प्रिवेंशन के लिए एकीकृत मंच प्रदान करतीRead more
साइबरडोम परियोजना
1. परियोजना का विवरण:
2. इंटरनेट अपराधों पर प्रभाव:
3. हाल के उदाहरण:
साइबरडोम भारत में साइबर अपराध को नियंत्रित करने और सुरक्षा में सुधार लाने के लिए प्रभावी उपकरण के रूप में उभर रहा है।
See lessजम्मू और कश्मीर में 'जमात-ए-इस्लामी' पर पाबंदी लगाने से आतंकवादी संगठनों को सहायता पहुँचाने में भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं (ओ० जी० डब्ल्यू०) की भूमिका ध्यान का केंद्र बन गई है। उपप्लव (बगावत) प्रभावित क्षेत्रों में आतंकवादी संगठनों को सहायता पहुँचाने में भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं द्वारा निभाई जा रही भूमिका का परीक्षण कीजिए। भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं के प्रभाव को निष्प्रभावित करने के उपायों की चर्चा कीजिए। (150 words) [UPSC 2019]
भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं की भूमिका और प्रभाव **1. भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं (OGWs) की भूमिका: सहायता और नेटवर्किंग: जम्मू और कश्मीर में 'जमात-ए-इस्लामी' पर पाबंदी के बाद, भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं ने आतंकवादी संगठनों को संगठनात्मक सहायता और साधन प्रदान किए हैं। ये कार्यकर्ता जासूसी, संपर्क स्थापित करना, औरRead more
भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं की भूमिका और प्रभाव
**1. भूमि-उपरि कार्यकर्ताओं (OGWs) की भूमिका:
**2. प्रभाव और स्थिति:
**3. निष्प्रभावित करने के उपाय:
इन उपायों के माध्यम से OGWs के प्रभाव को कम किया जा सकता है और आतंकवाद के निग्रह में सुधार लाया जा सकता है।
See lessआपदा प्रभावों और लोगों के लिए उसके खतरे को परिभाषित करने के लिए भेद्यता एक अत्यावश्यक तत्त्व है। आपदाओं के प्रति भेद्यता का किस प्रकार और किन-किन तरीकों के साथ चरित्र-चित्रण किया जा सकता है? आपदाओं के संदर्भ में भेद्यता के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा कीजिए। (150 words) [UPSC 2019]
आपदाओं के प्रति भेद्यता का चरित्र-चित्रण 1. भेद्यता की परिभाषा: भेद्यता: आपदाओं के प्रभाव और खतरों को समझने के लिए भेद्यता एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह संवेदनशीलता और सक्षम क्षमताओं के आधार पर लोगों और समुदायों की संभावित क्षति की माप होती है। 2. भौगोलिक भेद्यता: भौगोलिक स्थिति: प्राकृतिक आपदाओं के प्रRead more
आपदाओं के प्रति भेद्यता का चरित्र-चित्रण
1. भेद्यता की परिभाषा:
2. भौगोलिक भेद्यता:
3. आर्थिक भेद्यता:
4. सामाजिक भेद्यता:
5. भौतिक भेद्यता:
6. प्राकृतिक भेद्यता:
इन विभिन्न प्रकारों से भेद्यता का विश्लेषण कर, आपदा प्रबंधन के लिए प्रभावी रणनीतियाँ और सुधारात्मक उपाय अपनाए जा सकते हैं।
See lessतटीय बालू खनन, चाहे वह वैध हो या अवैध हो, हमारे पर्यावरण के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक है। भारतीय तटों पर हो रहे बालू खनन के प्रभाव का, विशिष्ट उदाहरणों का हवाला देते हुए, विश्लेषण कीजिए। (150 words) [UPSC 2019]
तटीय बालू खनन के प्रभाव 1. पर्यावरणीय क्षति: बालू कटाव और आवास हानि: तटीय बालू खनन के कारण बालू कटाव और कोस्टल हैबिटेट की हानि होती है। केरल के कोल्लम में बालू खनन से तटीय क्षति और पर्यावरणीय असंतुलन देखा गया है। 2. मरीन जीवन पर प्रभाव: मरीन पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश: बालू खनन से मरीन पारिस्थितिकीRead more
तटीय बालू खनन के प्रभाव
1. पर्यावरणीय क्षति:
2. मरीन जीवन पर प्रभाव:
3. जल गुणवत्ता में गिरावट:
4. वैध और अवैध खनन:
5. सुधारात्मक उपाय:
इन प्रभावों से सभी तटीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और स्थायी प्रबंधन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
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