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राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 (FRBMA) के उद्देश्य क्या हैं? इसकी प्रमुख विशेषताओं को सूचीबद्ध कीजिए। (200 शब्द)
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 (FRBMA) का मुख्य उद्देश्य भारत में राजकोषीय अनुशासन स्थापित करना है। इसका लक्ष्य राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना, और सार्वजनिक ऋण को प्रबंधित करना है। इस अधिनियम के माध्यम से सरकार की वित्तीय नीतियों में पारदर्शिता और जवाRead more
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 (FRBMA) का मुख्य उद्देश्य भारत में राजकोषीय अनुशासन स्थापित करना है। इसका लक्ष्य राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना, और सार्वजनिक ऋण को प्रबंधित करना है। इस अधिनियम के माध्यम से सरकार की वित्तीय नीतियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
FRBMA के प्रमुख उद्देश्य:
FRBMA की प्रमुख विशेषताएँ:
FRBMA के कार्यान्वयन के बाद, भारत ने राजकोषीय घाटे में कमी देखी है। उदाहरण के लिए, 2007-08 में राजकोषीय घाटा GDP के 2.7% तक कम हो गया था। हालांकि, COVID-19 महामारी के दौरान, 2020 में यह बढ़कर 9.17% हो गया, लेकिन 2023-24 में इसे 5.8% तक लाने का प्रयास किया गया।
इस प्रकार, FRBMA ने भारत में वित्तीय स्थिरता और अनुशासन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
See lessभारत के आर्थिक रूपांतरण में निर्यात-आधारित विकास मॉडल के महत्व पर चर्चा करें। सतत आर्थिक विकास हासिल करने के लिए इस मॉडल को अपनाने में भारत के लिए प्रमुख चुनौतियाँ और अवसर क्या हैं?” (200 शब्द)
निर्यात-आधारित विकास मॉडल का महत्व निर्यात-आधारित विकास मॉडल (ELG) भारत के आर्थिक रूपांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है, जिससे उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन में वृद्धि हुई है। भारत का निर्यात 2022-23 में $447.46 बRead more
निर्यात-आधारित विकास मॉडल का महत्व
निर्यात-आधारित विकास मॉडल (ELG) भारत के आर्थिक रूपांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है, जिससे उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन में वृद्धि हुई है। भारत का निर्यात 2022-23 में $447.46 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो इसकी वैश्विक आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
अवसर
इस प्रकार, निर्यात-आधारित विकास मॉडल भारत को सतत और समावेशी आर्थिक विकास में सहायक हो सकता है।
See lessविश्व में अर्धचालक की गंभीर कमी के दौर में भारत के लिए इस क्षेत्र में प्रगति करने का एक महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न हुआ है। इस संदर्भ में, भारत में चिप डिजाइन उद्योग को किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इस पर चर्चा कीजिए और इस क्षेत्र में सुधार हेतु संभावित कदमों का उल्लेख कीजिए। (200 शब्द)
विश्व में अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) की गंभीर कमी के इस दौर में, भारत के पास इस क्षेत्र में प्रगति करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, भारतीय चिप डिज़ाइन उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है: मुख्य चुनौतियाँ: फैब क्षमताओं की कमी: भारत में चिप डिज़ाइन की अच्छी प्रतिभा है, लेकिन यहाँ चिप निRead more
विश्व में अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) की गंभीर कमी के इस दौर में, भारत के पास इस क्षेत्र में प्रगति करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, भारतीय चिप डिज़ाइन उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
मुख्य चुनौतियाँ:
सुधार हेतु संभावित कदम:
इन उपायों के माध्यम से, भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
See lessभारत में प्रवासी श्रमिकों के सामने सामाजिक सुरक्षा लाभों और समान कार्य स्थितियों तक पहुँच के संबंध में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें। समावेशी विकास के लिए भारत की आकांक्षा के संदर्भ में उनके कल्याण को बढ़ाने के लिए क्या उपाय लागू किए जा सकते हैं? (200 शब्द)
भारत में प्रवासी श्रमिकों की चुनौतियाँ सामाजिक सुरक्षा की कमी: प्रवासी श्रमिक अक्सर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। खराब कार्य स्थितियाँ: उन्हें कम वेतन, लंबे कार्य घंटे और असुरक्षित वातावरण का सामना करना पड़ता है। कोविड-19 का प्रभाव: महामारीRead more
भारत में प्रवासी श्रमिकों की चुनौतियाँ
कल्याण हेतु उपाय
निष्कर्ष
See lessइन प्रयासों से प्रवासी श्रमिकों के जीवन में सुधार होगा और समावेशी विकास की दिशा में भारत की प्रगति तेज होगी।
“भारत के नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण में प्रमुख चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करें, भंडारण और ग्रिड बुनियादी ढांचे की सीमाओं पर ध्यान केंद्रित करें। एक टिकाऊ और न्यायसंगत ऊर्जा भविष्य सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएँ।”
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण कई प्रमुख चुनौतियों और अवसरों से भरा हुआ है, विशेष रूप से भंडारण और ग्रिड बुनियादी ढांचे में सुधार के संदर्भ में। प्रमुख चुनौतियाँ भंडारण समस्याएँ: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सौर और पवन ऊर्जा अस्थिर होते हैं। इनकी उत्पादन दर में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे ऊर्जा भंडRead more
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण कई प्रमुख चुनौतियों और अवसरों से भरा हुआ है, विशेष रूप से भंडारण और ग्रिड बुनियादी ढांचे में सुधार के संदर्भ में।
प्रमुख चुनौतियाँ
अवसर
उपाय
सार्वजनिक ऋण से आपकी क्या समझ है? उच्च सार्वजनिक ऋण को क्यों चिंता का कारण माना जाता है? कृपया भारत के संदर्भ में इसे विस्तार से समझाइए। (200 words)
सार्वजनिक ऋण वह धनराशि है, जो सरकारें अपने खर्चों की पूर्ति हेतु उधार लेती हैं। यह आंतरिक (देश के भीतर) और बाह्य (विदेशी स्रोतों से) दोनों प्रकार का हो सकता है। उच्च सार्वजनिक ऋण चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि इससे सरकार की वित्तीय स्थिरता प्रभावित होती है। बढ़ते ऋण के साथ ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ताRead more
सार्वजनिक ऋण वह धनराशि है, जो सरकारें अपने खर्चों की पूर्ति हेतु उधार लेती हैं। यह आंतरिक (देश के भीतर) और बाह्य (विदेशी स्रोतों से) दोनों प्रकार का हो सकता है। उच्च सार्वजनिक ऋण चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि इससे सरकार की वित्तीय स्थिरता प्रभावित होती है। बढ़ते ऋण के साथ ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ता है, जिससे विकासात्मक कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो जाते हैं।
भारत के संदर्भ में, सार्वजनिक ऋण का उच्च स्तर कई चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। बढ़ते ऋण के कारण सरकार को अपने बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ता है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश सीमित हो जाता है। इसके अतिरिक्त, उच्च ऋण स्तर के चलते सरकार को नए ऋण लेने में कठिनाई हो सकती है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में वित्तीय लचीलापन कम हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियाँ भी उच्च सार्वजनिक ऋण को नकारात्मक रूप से देखती हैं, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है।
इसलिए, भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने सार्वजनिक ऋण को नियंत्रित रखते हुए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखे, ताकि आर्थिक विकास सुगम हो और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
See less1917 की रूसी क्रांति को प्रेरित करने वाले कारक कौन-से थे और इसके परिणामों की विस्तार से चर्चा कीजिए?(उत्तर 200 शब्दों में दें)
1917 की रूसी क्रांति के प्रमुख कारण थे: राजनीतिक असंतोष: ज़ार निकोलस II की निरंकुश शासन प्रणाली और राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी से जनता में असंतोष बढ़ा। आर्थिक कठिनाइयाँ: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा, जिससे खाद्य और आवश्यक वस्तुओं की कमी हुई। सामाजिक असमानता: किसानोRead more
1917 की रूसी क्रांति के प्रमुख कारण थे:
इन कारकों के परिणामस्वरूप:
इन परिवर्तनों ने रूस और विश्व इतिहास की दिशा को मौलिक रूप से बदल दिया।
See lessआप द्वीपसमूह से क्या समझते हैं? इनके निर्माण में योगदान करने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं को उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए। (उत्तर 150 शब्दों में दें)
द्वीपसमूह की परिभाषा द्वीपसमूह कई द्वीपों का समूह होता है जो एक निश्चित भू-भाग के आसपास स्थित होते हैं। ये समुद्र या किसी अन्य जलधारा में स्थित होते हैं और हर द्वीप अलग-अलग आकार और प्रकार का हो सकता है। द्वीपों के निर्माण की प्रक्रियाएँ द्वीपों का निर्माण कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है: ज्वRead more
द्वीपसमूह की परिभाषा
द्वीपसमूह कई द्वीपों का समूह होता है जो एक निश्चित भू-भाग के आसपास स्थित होते हैं। ये समुद्र या किसी अन्य जलधारा में स्थित होते हैं और हर द्वीप अलग-अलग आकार और प्रकार का हो सकता है।
द्वीपों के निर्माण की प्रक्रियाएँ
द्वीपों का निर्माण कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है:
इस प्रकार, द्वीपसमूहों का निर्माण प्रकृति की जटिल प्रक्रियाओं से होता है, जो समुद्र के भीतर और ऊपर दोनों जगहों पर प्रभाव डालती हैं।
See lessभारतीय संदर्भ में रासायनिक आपदा को स्पष्ट करते हुए, इसके कारण उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें। साथ ही, ऐसी आपदाओं के शमन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालें और इन चुनौतियों के समाधान के उपायों पर चर्चा करें। (200 शब्दों में उत्तर दें)
भारत में रासायनिक आपदाएँ उन घटनाओं को संदर्भित करती हैं, जिनमें खतरनाक रसायनों का अनियंत्रित रिसाव या उत्सर्जन होता है, जिससे मानव जीवन, पर्यावरण और संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुँचता है। ऐसी आपदाओं के प्रमुख उदाहरणों में 1984 की भोपाल गैस त्रासदी शामिल है, जिसमें मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से हजारRead more
भारत में रासायनिक आपदाएँ उन घटनाओं को संदर्भित करती हैं, जिनमें खतरनाक रसायनों का अनियंत्रित रिसाव या उत्सर्जन होता है, जिससे मानव जीवन, पर्यावरण और संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुँचता है। ऐसी आपदाओं के प्रमुख उदाहरणों में 1984 की भोपाल गैस त्रासदी शामिल है, जिसमें मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से हजारों लोगों की मृत्यु हुई थी।
रासायनिक आपदाओं के कारण उत्पन्न समस्याएँ:
शमन में आने वाली चुनौतियाँ:
चुनौतियों के समाधान के उपाय:
इन उपायों के माध्यम से रासायनिक आपदाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है और उनके प्रभावी प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।
See lessभारत के निचले इलाकों में आकस्मिक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। भारत में बार-बार होने वाली आकस्मिक बाढ़ के कारणों की विवेचना कीजिए और साथ ही उनके प्रभावों पर भी प्रकाश डालिए। (200 शब्दों में उत्तर दें)
आकस्मिक बाढ़: कारण और प्रभाव कारण: अत्यधिक वर्षा: मॉनसून के दौरान अचानक भारी बारिश बाढ़ का मुख्य कारण है। ग्लेशियर का पिघलना: हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट (GLOF) बाढ़ को जन्म देता है। भूस्खलन और बांध टूटना: पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन या कृत्रिम बांधों के टूटने से भी बाढ़ आती है। शहरीRead more
आकस्मिक बाढ़: कारण और प्रभाव
कारण:
प्रभाव:
समस्या के समाधान हेतु बेहतर जल प्रबंधन, चेतावनी प्रणाली, और टिकाऊ शहरी विकास अनिवार्य हैं।
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