Answer the question in maximum 50 words/5 to 6 lines. This question carries 05 marks. [MPPSC 2022] How has Gautam Buddha propounded the theory of ‘Madhyam Marg’ with momentariness?
अरस्तू के अनुसार सद्गुणों का महत्व परिभाषा अरस्तू के अनुसार, सद्गुण मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि वे व्यक्ति के नैतिक और व्यक्तिगत विकास में सहायक होते हैं। मुख्य बातें संतुलन: सद्गुणों से व्यक्ति अपने इच्छाओं और भावनाओं को संतुलित कर सकता है। सुख की प्राप्ति: सद्गुण व्यक्ति को सच्चे सुखRead more
अरस्तू के अनुसार सद्गुणों का महत्व
परिभाषा
अरस्तू के अनुसार, सद्गुण मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि वे व्यक्ति के नैतिक और व्यक्तिगत विकास में सहायक होते हैं।
मुख्य बातें
- संतुलन: सद्गुणों से व्यक्ति अपने इच्छाओं और भावनाओं को संतुलित कर सकता है।
- सुख की प्राप्ति: सद्गुण व्यक्ति को सच्चे सुख की ओर ले जाते हैं।
उदाहरण
- उदाहरण: दया और न्याय जैसे सद्गुण समाज में सामंजस्य बनाए रखते हैं।
- दूसरा उदाहरण: साहस के साथ कठिनाइयों का सामना करना।
इस प्रकार, सद्गुण व्यक्ति को एक बेहतर इंसान बनाते हैं।
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Gautam Buddha and the Theory of 'Madhyam Marg' What is 'Madhyam Marg'? Definition: The "Middle Path" teaches avoiding extremes in life. Connection to Momentariness Momentariness: Everything is constantly changing and impermanent. Example: A flower blooms and wilts, symbolizing life's fleeting natureRead more
Gautam Buddha and the Theory of ‘Madhyam Marg’
What is ‘Madhyam Marg’?
Connection to Momentariness
Example: A flower blooms and wilts, symbolizing life’s fleeting nature.
Key Concepts
Example: Enjoying pleasures without becoming addicted.
Example: Accepting loss without despair.
Conclusion
Buddha’s ‘Madhyam Marg’ encourages a balanced life, emphasizing that by understanding momentariness, we can find peace and avoid suffering.
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