- यह लेख The Indian Express में 26 फरवरी, 2025 को प्रकाशित हुआ है।
- अमेरिका की बदलती नीतियों के कारण भारत के लिए यूरोप एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बन गया है।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों का महत्त्व
- आर्थिक संबंध:
- यूरोपीय संघ (EU) भारत का 9वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो 2023 में भारत के कुल व्यापार का 12.2% है।
- पिछले दशक में वस्तुओं का व्यापार 90% और सेवाओं का व्यापार 96% बढ़ा है।
- EU से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भारत के औद्योगिक विकास में मदद करता है।
- सुरक्षा और रक्षा सहयोग:
- EU भारत के साथ समुद्री सहयोग बढ़ा रहा है।
- दोनों पक्ष संयुक्त सैन्य अभ्यास और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
- EU की ESIWA पहल भारत के लिए सुरक्षा संबंधों को मजबूत करती है।
प्रौद्योगिकी और डिजिटल सहयोग
- भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC):
- अर्द्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
- IMEC का उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है।
रणनीतिक स्वायत्तता
- EU भारत की बहु-संरेखण नीति के साथ तालमेल स्थापित करता है।
- EU की रणनीतिक स्वायत्तता अमेरिका पर निर्भरता को कम करने की दिशा में है।
चुनौतियाँ
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता:
- यूरोपीय संघ ने भारत से कम टैरिफ की मांग की है, जो भारत की घरेलू नीतियों के खिलाफ है।
- निवेश बाधाएँ:
- भारत के व्यापार नियम काफी प्रतिबंधात्मक हैं।
- डेटा गोपनीयता:
- EU के सख्त डेटा कानून भारत के डिजिटल निर्यात को महंगा बनाते हैं।
आगे की राह
- FTA को तीव्र गति देना:
- टैरिफ विवादों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- डेटा-साझाकरण कार्यढाँचा:
- यूरोपीय यूनियन-अमेरिका स्टाइल प्राइवेसी शील्ड पर वार्ता।
- रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना:
- संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और साइबर सुरक्षा साझेदारी का विस्तार करना।
निष्कर्ष
- भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जिसमें व्यापार विवाद, नियामक बाधाएँ और भू-राजनीतिक मतभेदों को सुलझाना आवश्यक है।
- एक मजबूत भारत-यूरोपीय संघ गठबंधन वैश्विक स्थिरता को बढ़ाएगा और भारत की भूमिका को सुदृढ़ करेगा।