Answer the question in maximum 200 words. This question carries 11 marks. [MPPSC 2020] What is VSEPR theory? Discuss the shapes of CH4, NH3 and H₂O molecules on the basis of this theory.
लौह चुम्बकीय, अनु चुम्बकीय तथा प्रति चुम्बकीय पदार्थों के गुणों की विस्तार से तुलना 1. लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Materials) गुण: चुम्बकीय गुण: लौह चुम्बकीय पदार्थ मजबूत चुम्बकीय गुण रखते हैं। ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में खुद भी चुम्बकीय हो जाते हैं। चुम्बकीय क्षेत्र में आकर्षण: ये पRead more
लौह चुम्बकीय, अनु चुम्बकीय तथा प्रति चुम्बकीय पदार्थों के गुणों की विस्तार से तुलना
1. लौह चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Materials)
गुण:
- चुम्बकीय गुण: लौह चुम्बकीय पदार्थ मजबूत चुम्बकीय गुण रखते हैं। ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में खुद भी चुम्बकीय हो जाते हैं।
- चुम्बकीय क्षेत्र में आकर्षण: ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में आकर्षित होते हैं और यह गुण स्थायी रूप से बन सकते हैं।
- उदाहरण: लौह (Iron), निकल (Nickel), कोबाल्ट (Cobalt)।
विशेषताएँ:
- ये पदार्थ स्थायी चुंबक (permanent magnet) बना सकते हैं।
- चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव में इनकी चुंबकीय ध्रुवता (magnetic polarity) स्थायी रूप से बदल जाती है।
2. अनु चुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Materials)
गुण:
- चुम्बकीय गुण: अनु चुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकीय गुण होते हैं, लेकिन वे बहुत कमजोर होते हैं। इन पदार्थों का चुंबकीय क्षेत्र में आकर्षण बहुत हल्का होता है।
- चुम्बकीय क्षेत्र में कमजोर आकर्षण: इन पदार्थों में बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव में चुम्बकीय गुण विकसित होते हैं, लेकिन यह अस्थायी होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र हटने पर समाप्त हो जाते हैं।
- उदाहरण: ऐल्युमिनियम (Aluminium), पेरोक्साइड (Magnesium), लिथियम (Lithium)।
विशेषताएँ:
- ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में थोड़ा-सा आकर्षित होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव बहुत कमजोर होता है।
- अस्थायी चुम्बकीय गुणों के कारण ये केवल चुंबकीय क्षेत्र में आकर्षित होते हैं।
3. प्रति चुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Materials)
गुण:
- चुम्बकीय गुण: प्रति चुम्बकीय पदार्थों में चुंबकीय गुण होते हैं, लेकिन यह गुण बहुत कमजोर होते हैं। ये पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र से दूर भागते हैं।
- चुम्बकीय क्षेत्र में विकर्षण: इन पदार्थों में चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव में एक हल्का-सा विकर्षण (repulsion) होता है।
- उदाहरण: बismuth (बिस्मथ), ताम्बा (Copper), पानी (Water)।
विशेषताएँ:
- ये पदार्थ बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर की दिशा में विक्षिप्त होते हैं।
- ये कभी भी स्थायी चुम्बक नहीं बन सकते।
निष्कर्ष
- लौह चुम्बकीय पदार्थ सबसे मजबूत चुम्बकीय गुण रखते हैं और स्थायी चुंबक बन सकते हैं।
- अनु चुम्बकीय पदार्थों में कम आकर्षण होता है और यह प्रभाव अस्थायी होता है।
- प्रति चुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र से विकर्षित होते हैं और इनमें कोई स्थायी चुंबकीय गुण नहीं होता।
इस प्रकार, इन तीनों प्रकार के पदार्थों के गुण एक-दूसरे से अलग होते हैं, और इनकी विशेषताएँ उनके चुम्बकीय क्षेत्र में प्रतिक्रिया करने के तरीके पर निर्भर करती हैं।
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What is VSEPR Theory? The VSEPR (Valence Shell Electron Pair Repulsion) Theory is a model used to predict the shape of molecules based on the repulsion between electron pairs in the valence shell of atoms. According to this theory, electron pairs (both bonding and lone pairs) will arrange themselvesRead more
What is VSEPR Theory?
The VSEPR (Valence Shell Electron Pair Repulsion) Theory is a model used to predict the shape of molecules based on the repulsion between electron pairs in the valence shell of atoms. According to this theory, electron pairs (both bonding and lone pairs) will arrange themselves as far apart as possible to minimize repulsion, resulting in specific molecular shapes.
Shapes of Molecules: CH₄, NH₃, and H₂O
1. CH₄ (Methane)
2. NH₃ (Ammonia)
3. H₂O (Water)
Summary
- CH₄: Tetrahedral shape.
- NH₃: Trigonal pyramidal shape.
- H₂O: Bent shape. These shapes are determined by the number of bonding and lone electron pairs in each molecule according to the VSEPR theory.
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