प्रश्न का उत्तर अधिकतम 15 से 20 शब्दों में दीजिए। यह प्रश्न 03 अंक का है। [MPPSC 2022] जनगणना 2011 के अनुसार, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या कितनी है?
'मेक इन इंडिया' पहल का परिचय 'मेक इन इंडिया' पहल की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है। मुख्य उद्देश्य उद्योगिक विकास: इस पहल के तहत सरकार का लक्ष्य 2025 तक विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में 25% योगदान सुRead more
‘मेक इन इंडिया’ पहल का परिचय
‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
मुख्य उद्देश्य
- उद्योगिक विकास:
इस पहल के तहत सरकार का लक्ष्य 2025 तक विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में 25% योगदान सुनिश्चित करना है। - रोजगार सृजन:
‘मेक इन इंडिया’ से लगभग 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है, खासकर युवाओं के लिए। - विदेशी निवेश को आकर्षित करना:
इस पहल के माध्यम से भारत ने 2022-23 में लगभग 84 बिलियन डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित किया।
प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान
- ऑटोमोबाइल:
भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बनने की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है। - इलेक्ट्रॉनिक्स:
सरकार ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा दिया है।
निष्कर्ष
‘मेक इन इंडिया’ पहल ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके सफल कार्यान्वयन से भारत वैश्विक बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।
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जनगणना 2011 के अनुसार, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या लगभग 1.53 करोड़ थी, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 21.1% है। यह महत्वपूर्ण आंकड़ा दर्शाता है कि tribal समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आवश्यकताओं को समझना कितना आवश्यक है। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों में विभिन्नRead more
जनगणना 2011 के अनुसार, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या लगभग 1.53 करोड़ थी, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 21.1% है। यह महत्वपूर्ण आंकड़ा दर्शाता है कि tribal समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आवश्यकताओं को समझना कितना आवश्यक है। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों में विभिन्न समूह शामिल हैं, जिनकी अपनी विशेष परंपराएँ और जीवनशैली हैं। इन समुदायों के योगदान और चुनौतियों को पहचानना आवश्यक है, ताकि उनकी जीवन स्थिति में सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नीतियाँ लागू की जा सकें, जिससे राज्य में समावेशी विकास हो सके।
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