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पंचायती राज संस्थानों (PRIs) को आपदाओं से निपटने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, यह बताइए कि पंचायती राज मंत्रालय की आपदा प्रबंधन योजना इन चुनौतियों को दूर करने में किस प्रकार सहायक हो सकती है। (250 शब्दों में उत्तर दीजिए)
पंचायती राज संस्थानों (PRIs) को आपदाओं से निपटने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: सीमित संसाधन: आपदा राहत कार्यों के लिए बजट और सामग्री की कमी। प्रशिक्षण की कमी: PRIs के पास आपदा प्रबंधन का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होता। समन्वय का अभाव: राज्य और केंद्र के साथ समन्वय की कमी के कारण राहत कार्योRead more
पंचायती राज संस्थानों (PRIs) को आपदाओं से निपटने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
पंचायती राज मंत्रालय की आपदा प्रबंधन योजना
पंचायती राज मंत्रालय की आपदा प्रबंधन योजना इन समस्याओं को हल करने में मदद करती है:
निष्कर्ष
इस योजना से PRIs को अधिक सक्षम बनाया जाता है, जिससे आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
See lessनियोजित विकास स्वतंत्रता के बाद भारत में किए गए महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों में से एक था। इस संदर्भ में, चर्चा कीजिए कि द्वितीय पंचवर्षीय योजना को मील का पत्थर क्यों माना जाता है। (200 words)
द्वितीय पंचवर्षीय योजना का महत्त्व द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) भारत के नियोजित विकास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है, जो भारत की औद्योगिक नीति और आर्थिक दिशा को आकार देने में सहायक साबित हुई। औद्योगिकीकरण की दिशा में कदम द्वितीय पंचवर्षीय योजना ने भारी उद्योगों, जैसे BHEL और SAILRead more
द्वितीय पंचवर्षीय योजना का महत्त्व
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) भारत के नियोजित विकास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है, जो भारत की औद्योगिक नीति और आर्थिक दिशा को आकार देने में सहायक साबित हुई।
औद्योगिकीकरण की दिशा में कदम
बुनियादी ढांचे का निर्माण
निष्कर्ष
द्वितीय पंचवर्षीय योजना ने भारत के औद्योगिकीकरण, आत्मनिर्भरता और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में आधार बने हुए हैं।
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