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मनोवृत्ति को परिभाषित कीजिए ।
मनोवृत्ति की परिभाषा मनोवृत्ति एक व्यक्ति की सोच, भावना और व्यवहार का मिश्रण है, जो किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को दर्शाता है। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है। उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति की मनोवृत्ति सकारात्मक हो, तो वह चुनौतियों को अवसर के रूप में देखता है।
मनोवृत्ति की परिभाषा
मनोवृत्ति एक व्यक्ति की सोच, भावना और व्यवहार का मिश्रण है, जो किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को दर्शाता है। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है।
- उदाहरण: यदि किसी व्यक्ति की मनोवृत्ति सकारात्मक हो, तो वह चुनौतियों को अवसर के रूप में देखता है।
See lessभारत में गरीबी रेखा से सम्बन्धित विभिन्न मत क्या हैं? क्या यूनिवर्सल बेसिक इन्कम (सार्वभौमिक बुनियादी आय) की अवधारणा उपयुक्त है?
भारत में गरीबी रेखा और यूनिवर्सल बेसिक इन्कम: विभिन्न मत और उपयुक्तता 1. गरीबी रेखा पर विभिन्न दृष्टिकोण: भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण कई मानदंडों पर आधारित है, जैसे आय, स्वास्थ्य, और जीवन स्तर। सुरेश तेंदुलकर समिति के अनुसार, गरीबी रेखा निर्धारण के लिए न्यूनतम आय को 7,620 रुपये सालाना (2011-12)Read more
भारत में गरीबी रेखा और यूनिवर्सल बेसिक इन्कम: विभिन्न मत और उपयुक्तता
1. गरीबी रेखा पर विभिन्न दृष्टिकोण:
भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण कई मानदंडों पर आधारित है, जैसे आय, स्वास्थ्य, और जीवन स्तर।
2. यूनिवर्सल बेसिक इन्कम (UBI) की अवधारणा:
UBI एक ऐसी प्रणाली है जिसमें सरकार प्रत्येक नागरिक को नियमित, बिना शर्त नकद भुगतान करती है। यह गरीबी को कम करने और आर्थिक समानता को बढ़ाने का उद्देश्य रखता है।
निष्कर्ष:
यूबीआई एक सशक्त विचार हो सकता है, लेकिन भारत जैसे देश में इसके कार्यान्वयन के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और समुचित ढांचे की आवश्यकता है। कोविड-19 जैसे संकटों के दौरान, यह अवधारणा और भी प्रासंगिक हो सकती है, लेकिन इसकी आर्थिक लागत और प्रभावों पर गहन विचार की आवश्यकता है।
See lessभारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान प्रवृत्तियों एवं चुनौतियों पर कोविड-19 के प्रभाव पर एक निबन्ध लिखिए ।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव परिचय कोविड-19 महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरे आघात पहुँचाया। महामारी के कारण देश में रोजगार की कमी, व्यापारिक गतिविधियों में ठहराव और आय में गिरावट आई। प्रवृत्तियाँ मंदी की शुरुआत: कोविड-19 महामारी से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही थी। मRead more
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 का प्रभाव
परिचय
कोविड-19 महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरे आघात पहुँचाया। महामारी के कारण देश में रोजगार की कमी, व्यापारिक गतिविधियों में ठहराव और आय में गिरावट आई।
प्रवृत्तियाँ
चुनौतियाँ
निष्कर्ष
See lessकोविड-19 ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अनेक क्षेत्रों में प्रभावित किया। हालांकि, महामारी के बाद सुधार की दिशा में कुछ कदम उठाए गए हैं, जैसे सरकारी निवेश और डिजिटल सेवा क्षेत्र में वृद्धि। लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में अभी समय लगेगा।
राष्ट्रीय आय लेखांकन की विभिन्न अवधारणाओं को विस्तार से समझाइए और हरित लेखांकन पर एक टिप्पणी लिखिए ।
राष्ट्रीय आय लेखांकन की अवधारणाएँ राष्ट्रीय आय लेखांकन देश की आर्थिक गतिविधियों को मापने का तरीका है, और इसके तहत कई प्रमुख अवधारणाएँ हैं: 1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) यह एक देश के भीतर समस्त उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है। उदाहरण: यदि एक देश ने कारें, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पाद बनRead more
राष्ट्रीय आय लेखांकन की अवधारणाएँ
राष्ट्रीय आय लेखांकन देश की आर्थिक गतिविधियों को मापने का तरीका है, और इसके तहत कई प्रमुख अवधारणाएँ हैं:
1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP)
3. निट राष्ट्रीय उत्पाद (NNP)
4. व्यक्तिगत आय (PI)
5. निवेश योग्य आय (DI)
- यह वह आय है जो करों के भुगतान के बाद व्यक्ति के पास बचती है और वह इसे खर्च या बचत कर सकता है।
See lessभारतीय बैंकिंग पद्धति की समस्याओं एवं सरोकारों की विस्तार से व्याख्या कीजिए ।
भारतीय बैंकिंग पद्धति की समस्याएँ एवं सरोकार भारतीय बैंकिंग पद्धति वर्तमान में कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इनमें से कुछ प्रमुख समस्याएँ और उनके कारणों की व्याख्या निम्नलिखित है: 1. नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) भारतीय बैंकों में NPA का उच्च स्तर है, जिससे बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रहRead more
भारतीय बैंकिंग पद्धति की समस्याएँ एवं सरोकार
भारतीय बैंकिंग पद्धति वर्तमान में कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इनमें से कुछ प्रमुख समस्याएँ और उनके कारणों की व्याख्या निम्नलिखित है:
1. नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA)
2. प्रबंधन और निगरानी की कमी
3. कम क्रेडिट वितरण
4. नियमों की जटिलता
समाधान की दिशा
इस प्रकार, भारतीय बैंकिंग पद्धति को वित्तीय और तकनीकी सुधार की आवश्यकता है ताकि इसे अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
See lessआर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि का अर्थ एवं भेद स्पष्ट कीजिए। आर्थिक विकास की गुणात्मक अवधारणा को मानव विकास सूचकांक की सहायता से कैसे व्यक्त किया जाता है ?
अर्थ और भेद आर्थिक वृद्धि: आर्थिक वृद्धि का मतलब है किसी देश की आय या उत्पादन में वृद्धि। यह एक संख्यात्मक और मात्रात्मक प्रक्रिया है, जो वस्त्रों और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि को दर्शाती है। यह आमतौर पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) द्वारा मापी जाती है और अल्पकालिक होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी देश नRead more
अर्थ और भेद
आर्थिक वृद्धि:
आर्थिक वृद्धि का मतलब है किसी देश की आय या उत्पादन में वृद्धि। यह एक संख्यात्मक और मात्रात्मक प्रक्रिया है, जो वस्त्रों और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि को दर्शाती है। यह आमतौर पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) द्वारा मापी जाती है और अल्पकालिक होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी देश ने पिछले वर्ष की तुलना में 5% अधिक वस्तुएं उत्पादित की हैं, तो उसकी आर्थिक वृद्धि हुई है।
आर्थिक विकास:
आर्थिक विकास का मतलब है किसी देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार। यह एक दीर्घकालिक, गुणात्मक प्रक्रिया है, जिसमें न केवल आय में वृद्धि होती है, बल्कि जीवन स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में भी सुधार होता है।
मानव विकास सूचकांक (HDI) और आर्थिक विकास
मानव विकास सूचकांक (HDI) का उपयोग आर्थिक विकास की गुणात्मक अवधारणा को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह तीन मुख्य मापदंडों पर आधारित होता है:
HDI इन तीनों मापदंडों को जोड़कर किसी देश के समग्र मानव विकास को दर्शाता है, जो केवल आर्थिक वृद्धि से परे है। यह गुणवत्ता को मापने में मदद करता है, जैसे कि एक देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ है।
See lessतथ्यों एवं आंकड़ों के साथ मध्य प्रदेश में धीमी औद्योगीकरण की विस्तार से चर्चा कीजिए ।
मध्य प्रदेश में धीमी औद्योगिकीकरण की चर्चा कारण: आपूर्ति और पूंजी की कमी: मध्य प्रदेश में पूंजी का अभाव औद्योगिकीकरण की गति धीमी करने वाला प्रमुख कारण है। राज्य में निवेश की कमी और खराब पूंजी निर्माण दर ने विकास को प्रभावित किया है। संरचनात्मक मुद्दे: प्रदेश में उपयुक्त परिवहन सुविधाओं की कमी, जैसेRead more
मध्य प्रदेश में धीमी औद्योगिकीकरण की चर्चा
कारण:
मध्य प्रदेश में पूंजी का अभाव औद्योगिकीकरण की गति धीमी करने वाला प्रमुख कारण है। राज्य में निवेश की कमी और खराब पूंजी निर्माण दर ने विकास को प्रभावित किया है।
प्रदेश में उपयुक्त परिवहन सुविधाओं की कमी, जैसे सड़क और रेल नेटवर्क की कमी, उद्योगों के विस्तार को रोकती है। इसके अलावा, खराब बुनियादी ढांचा उद्योगों के विकास में बाधा डालता है।
राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे औद्योगिकीकरण के लिए आवश्यक विविधता नहीं हो पाती।
मध्य प्रदेश में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जो उद्योगों के विकास में निवेश की कमी का कारण बनता है।
निष्कर्ष:
See lessमध्य प्रदेश में धीमी औद्योगिकीकरण मुख्य रूप से पूंजी की कमी, खराब बुनियादी ढांचा और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण हो रहा है। इसे तेज़ी से सुधारने के लिए, राज्य को निवेश और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
भारत में बफर स्टॉक नीति का परीक्षण कीजिए ।
भारत में बफर स्टॉक नीति परिचय बफर स्टॉक नीति का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और अनाज की कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करना है। यह नीति 1969-74 में पहली बार लागू की गई थी। लक्ष्य किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य देना अकाल या अनाज की कमी के समय में आपूर्ति बनाए रखना बफर स्टॉक की विशेषताएँ खादRead more
भारत में बफर स्टॉक नीति
परिचय
बफर स्टॉक नीति का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और अनाज की कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करना है। यह नीति 1969-74 में पहली बार लागू की गई थी।
लक्ष्य
बफर स्टॉक की विशेषताएँ
सुधार की आवश्यकता
- बफर स्टॉक की क्षमता और वितरण प्रक्रिया को सुधारने की जरूरत
- स्टॉक के नुकसान और विक्रय नीति को प्रभावी बनाना
See lessखाद्य सब्सिडी से आप क्या समझते हैं? भारत में खाद्य सब्सिडी के घटकों को समझाइए ।
खाद्य सब्सिडी क्या है? खाद्य सब्सिडी वह सहायता है, जो सरकार गरीबों को सस्ते दामों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए देती है। यह उद्देश्य है, आवश्यक खाद्य पदार्थों को हर नागरिक तक पहुंचाना। भारत में खाद्य सब्सिडी के घटक: खरीद और वितरण: खाद्य निगम द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीदी जातRead more
खाद्य सब्सिडी क्या है?
खाद्य सब्सिडी वह सहायता है, जो सरकार गरीबों को सस्ते दामों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए देती है। यह उद्देश्य है, आवश्यक खाद्य पदार्थों को हर नागरिक तक पहुंचाना।
भारत में खाद्य सब्सिडी के घटक:
खाद्य सब्सिडी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करती है।
See lessभारत में सहकारिता आंदोलन की कमज़ोरियों का उल्लेख कीजिए ।
भारत में सहकारिता आंदोलन की कमज़ोरियाँ 1. संरचनात्मक और प्रचालनात्मक कमज़ोरियाँ कई सहकारी संस्थाएँ मजबूत संगठनात्मक ढांचे की कमी से जूझती हैं, जिसके कारण प्रबंधन कमजोर होता है। उदाहरण: निर्णय लेने की प्रक्रिया में कमी के कारण सदस्यों की आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पातीं। 2. राजनीतिक हस्तक्षेप सरकार का अRead more
भारत में सहकारिता आंदोलन की कमज़ोरियाँ
1. संरचनात्मक और प्रचालनात्मक कमज़ोरियाँ
2. राजनीतिक हस्तक्षेप
3. पूंजी निर्माण की कमी
4. खराब शासन
5. सीमित बाजार पहुंच
ये कमज़ोरियाँ भारत में सहकारिता आंदोलन की प्रभावशीलता को बाधित करती हैं।
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