Roadmap for Answer Writing Introduction Briefly introduce the significance of agriculture in India. State the paradox of a large workforce contributing minimally to GDP. Challenges Hindering Agricultural Productivity Land Fragmentation: Explain the impact of small landholdings on productivity. Dependence on Monsoon: Discuss vulnerabilities due to low ...
मॉडल उत्तर परिचय भारत का कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो 46.1% कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है और सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हालाँकि, इस क्षेत्र में उत्पादकता में गिरावट आई है, जो किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। प्रमुख चुनौतियाँ भूमि विखंडन: बढ़ती जनसंख्यRead more
मॉडल उत्तर
परिचय
भारत का कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो 46.1% कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है और सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हालाँकि, इस क्षेत्र में उत्पादकता में गिरावट आई है, जो किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
प्रमुख चुनौतियाँ
- भूमि विखंडन: बढ़ती जनसंख्या और उत्तराधिकार कानूनों के कारण भारतीय खेत छोटे और खंडित होते जा रहे हैं, जिससे मशीनीकरण और दक्षता में कमी आ रही है। औसत कृष्ट-भूमि का आकार 2.28 हेक्टेयर (1970-71) से घटकर 1.08 हेक्टेयर (2015-16) हो गया है।
- मानसून पर निर्भरता: भारत की कृषि का 55% हिस्सा मानसून पर निर्भर है, जिससे यह अनियमित वर्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील है।
- मृदा क्षरण: रासायनिक उर्वरकों और एकल फसल पद्धतियों के अत्यधिक उपयोग से मृदा उर्वरता में गिरावट आ रही है।
- कम अनुसंधान एवं विकास: भारत कृषि R&D में केवल 0.5% का निवेश करता है, जो वैश्विक मानकों से बहुत कम है।
- कृषि विपणन में अक्षमता: किसानों को उपभोक्ता मूल्य का केवल 30-40% मिलता है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है।
प्रभावी उपाय
- भूमि चकबंदी: सहकारी खेती और भूमि पूलिंग तंत्र को बढ़ावा देने से छोटे किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकियों और ऋण तक पहुँच मिलेगी।
- सिंचाई व्यवस्थाओं का सुधार: सूक्ष्म सिंचाई और जल संरक्षण के उपायों को अपनाना आवश्यक है, जिससे जल का बेहतर उपयोग हो सके।
- अनुसंधान और विकास में वृद्धि: कृषि में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर उच्च उपज वाले बीजों और जलवायु-अनुकूल फसलों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
- कृषि विपणन में सुधार: e-NAM और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करके किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए।
- संधारणीय कृषि प्रथाओं को बढ़ावा: जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे मृदा और जल की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
आगे की राह
भारत के कृषि क्षेत्र ने प्रगति की है, लेकिन भूमि विखंडन, मानसून पर निर्भरता और मृदा क्षरण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों का समाधान करते हुए स्थिरता और दक्षता को बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और नीति सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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Model Answer Introduction Agriculture is the backbone of India's economy, employing 46.1% of the workforce but contributing only 17.7% to GDP. This paradox highlights the urgent need to address the challenges hindering agricultural productivity and to enhance sustainability and efficiency within theRead more
Model Answer
Introduction
Agriculture is the backbone of India’s economy, employing 46.1% of the workforce but contributing only 17.7% to GDP. This paradox highlights the urgent need to address the challenges hindering agricultural productivity and to enhance sustainability and efficiency within the sector.
Challenges Hindering Agricultural Productivity
Measures to Enhance Agricultural Productivity
Way Forward
To unlock the full potential of Indian agriculture, a comprehensive approach that combines technological advancements, policy reform, and sustainable practices is essential. By addressing the challenges faced by farmers and enhancing their incomes, India can ensure food security and long-term growth in the agricultural sector.
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